सबसे ताकतवार वेजिटेरियन नाश्ता, कमजोर शरीर को बना देगा लोहा, बढ़ जाएगा वजन
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Mahua Dubhri: उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बनने वाले महुआ डुभरी को सबसे ताकतवर नाश्ता माना जाता है. ये केवल स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि शरीद को अंदर से भी मजबूत बनाता है. अगर इसकी रेसिपी की बात करें तो यह बहुत ही आसान है, यह चुटकियों में तैयार हो जाता है.

यह खास डिश महुआ के फूल से तैयार होती है. जिसे दूध के साथ खाया जाता है. स्थानीय लोग इसे ताकत का खजाना भी कहते हैं. आयुर्वेद में भी इसका लोहा माना गया है और जो शरीर से कमजोर होते हैं, उन्हें महुआ डुभरी खाने को कहा जाता है.

ग्रामीण इलाकों में लोग सीजन में महुआ को बीनते हैं और अपने घर में इकट्ठा करके रखते हैं. महुआ अप्रैल के महीने से मिलने लगता है. सुबह-सुबह गांव के लोग इसे बिनते हैं. करीब मार्च के महीने से महुआ के पेड़ छोटे-छोटे पीले फूलों से लद जाते हैं.

पहले लोग इसे बिन कर इकट्ठा कर लेते हैं और फिर सुखाते हैं. जब बारिश का महीना आता है तो लोग इस बिने हुए महुए की डुभरी बनाना शुरू कर देते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग महुआ की डुभरी बड़े चाव से खाते हैं. इसे 12 महीने खा सकते हैं.
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अब बात करते हैं कि महुआ की डुभरी बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए. सबसे पहले आप चना, आटा, चिरौंजी, दाखें और नारियल गरी रख लें. इसके अलावा आप ड्राई फ्रूट भी डाल सकते हैं. लेकिन अगर आप सिंपल डुभरी खाना चाहते हैं तो महुआ काफी है. डुभरी बनाने के लिए चीनी या गुड़ की जरूरत नहीं पड़ती. क्योंकि सूखा हुआ महुआ खुद ही मीठा होता है.

सबसे पहले आपको गर्म पानी से महुआ को धो लेना है. फिर थोड़ी देर बाद इसे ठंडे पानी से धो लेना है. धुले हुए महुआ को आग पर गर्म हो रहे पानी में डाल देना है और फिर उबलने के लिए 1 से 2 घंटे के लिए छोड़ देना है. इसी दौरान चने को भी महुआ में मिला लेना है.

साथ ही जो आटा गूंथे हैं, उसकी छोटी-छोटी लोई बना लेनी है. इसी में चिरौंजी, मखाना और नारियल की गरी का बुरादा भी डाल देना है. अब आप देखेंगे की कुछ देर बाद ही महुआ की डुभरी बनकर तैयार हो गई. इसे आप दूध के साथ भी खा सकते हैं. छतरपुर, बुंदेलखंड में महुआ की डुभरी फेमस चीज है.

यहां के स्थानी लोग सुबह-शाम नाश्ते में खाते हैं और खेतों पर काम के लिए निकलते हैं. दोपहर में भी लोग इसका सेवन करते हैं.