कौन है लॉरेंस बिश्नोई, रोहित गोदारा और गोल्डी गैंग का खूंखार शार्पशूटर विक्की, जिसको पुलिस ने लोनी से उठाया? | who is vikas alias vicky betrayed lawrence bishnoi befriended rohit godara goldy brar delhi police caught from loni ghaziabad

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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टरों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर में गैंगस्टर सिंडिकेट के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बहुत बड़ी जीत हासिल की है. ‘ऑपरेशन गैंग बस्ट’ (Operation Gang Bust) के तहत कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की एनडीआर टीम ने लॉरेंस बिश्नोई, रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ गैंग के एक बेहद खतरनाक और वांछित साथी विकास उर्फ विक्की को धर दबोचा है. हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक गांव का रहने वाला विक्की लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था. उस पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में हत्या के प्रयास, लूट, अपहरण और रंगदारी जैसे कुल 18 संगीन मामले दर्ज हैं.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार के अनुसार, इंस्पेक्टर राकेश कुमार और एसीपी उमेश बर्थवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम फरार गैंगस्टरों की तलाश में कई महीने से जुटी थी. तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी इलाके में जाल बिछाया. विक्की यहां अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. पुलिस की टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. विक्की दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में मुख्य आरोपी था और पिछले कई महीनों से फरार चल रहा था. अदालत ने उसे 5 अलग-अलग मामलों में पहले ही भगोड़ा घोषित कर रखा था.

लॉरेंस बिश्नोई से जेल में हुई थी मुलाकात

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में विक्की ने अपने अपराध की दुनिया का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया. उसने बताया कि साल 2021 में जब वह जयपुर जेल में बंद था, तब उसकी मुलाकात कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से हुई थी. जेल के भीतर ही वह बिश्नोई के प्रभाव में आ गया और उसके सिंडिकेट का हिस्सा बन गया. बाद में जब लॉरेंस और रोहित गोदारा-गोल्डी बराड़ के गुटों के बीच आंतरिक तालमेल बना, तो विक्की ने खुद को गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा के लिए समर्पित कर दिया. वह गैंग के लिए फंड जुटाने के लिए रंगदारी और लूट की वारदातों को अंजाम देने लगा.

कौशल चौधरी की हत्या की रची थी साजिश

विकास उर्फ विक्की का नाम साल 2023 में तब सुर्खियों में आया था, जब उसने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के प्रतिद्वंद्वी और कौशल गैंग के सरगना कौशल चौधरी की हत्या की साजिश रची थी. विक्की ने गुरुग्राम के भोंडसी इलाके में एक फ्लैट किराए पर लिया था, जहां रोहित गोदारा गैंग के 10 शार्पशूटर रुके हुए थे. योजना यह थी कि जब कौशल चौधरी को कोर्ट में पेशी के लिए लाया जाए, तब उस पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया जाए. हालांकि, हरियाणा एसटीएफ ने समय रहते छापा मारकर सभी 10 शूटरों को पकड़ लिया, लेकिन विक्की वहां से भागने में सफल रहा. इस घटना के बाद हरियाणा पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था.

चाणक्यपुरी में पुलिस को दी थी चुनौती

जून 2025 में विक्की ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस को चुनौती दी थी. 23 जून की रात को वह अपने दो साथियों, गुरमीत और अमित के साथ एक कार में अवैध हथियार लेकर जा रहा था. चाणक्यपुरी इलाके में पेट्रोलिंग टीम ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसके दो साथियों को तो पकड़ लिया, लेकिन विक्की अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया. जांच में पता चला कि गोल्डी बराड़ ने उसे दिल्ली के एक नामी क्लब के बाहर फायरिंग करने और वहां के व्यापारियों को डराकर रंगदारी वसूलने का जिम्मा सौंपा था.

18 केसों की लंबी फेहरिस्त

विक्की का आपराधिक इतिहास 2013 से शुरू होता है. उस पर गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, जयपुर, हिसार और महाराष्ट्र के चिंदवाड़ा में दर्जनों केस दर्ज हैं. वह अपहरण और फिरौती के मामलों में भी माहिर रहा है. 2024 में जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी गतिविधियां और तेज कर दी थीं. वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके.

डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि विक्की की गिरफ्तारी से रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क को दिल्ली-एनसीआर में बड़ा झटका लगा है. पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके पास अवैध हथियार कहां से आते थे और दिल्ली के कौन से व्यापारी उसके निशाने पर थे. साथ ही, उसके उन मददगारों की भी तलाश की जा रही है जिन्होंने उसे लोनी में शरण दी थी.

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