34 साल की पड़ोसन के फ्लैट में घुसा 18 का लड़का, आधी रात में किया कांड, 9 दिनों तक चक्कर खाती रही पुलिस | love story of 18 year neighbor boy | software engineer sharmila kushalappa murder | bengaluru police | fire accident fake

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बेंगलुरु. भारत के जिस शहर को सिलिकॉन वैली कहा जाता है, वहां से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने सुरक्षा और पड़ोसियों पर भरोसे को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पूर्वी बेंगलुरु के सुब्रमण्य लेआउट में 3 जनवरी की रात को एक फ्लैट में आग लग गई थी. बेंगलुरु पुलिस की शुरुआती जांच में यह दर्दनाक हादसा लगा था. लेकिन इस घटना के 9 दिनों बाद बेंगलुरु पुलिस को ऐसे सुराग हाथ लगी, जो दरअसल एक सोची-समझी और बर्बर हत्या निकली. एक 34 वर्षीय महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर शर्मिला कुशलप्पा, जो अपने फ्लैट में मृत पाई गई थीं, उनकी मौत आग से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई थी. पुलिस ने इस मामले में उनके पड़ोस में रहने वाले एक 18 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी दरिंदगी को छिपाने के लिए पूरे घर को आग के हवाले कर दिया था. इस लड़के को महिला सॉफ्टवेयर पर दिल आ गया और घटना वाली रात वह अचानक फ्लैट में दाखिल हुआ.

3 जनवरी 2026 की देर रात जब सुब्रमण्य लेआउट स्थित एक अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल से आग की लपटें उठीं, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक फ्लैट का काफी हिस्सा जल चुका था. मलबे के बीच 34 वर्षीय शर्मिला कुशलप्पा का शव मिला. शुरुआती जांच में पुलिस और पड़ोसियों को लगा कि यह शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग का नतीजा है. कमरे की हालत ऐसी थी कि किसी को भी संदेह नहीं हुआ कि यह एक ‘परफेक्ट मर्डर’ की कोशिश हो सकती है. लेकिन जब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, तो फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुलिस के होश उड़ा दिए.

फॉरेंसिक रिपोर्ट ने खोली पोल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शर्मिला के फेफड़ों में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा उतनी नहीं थी, जितनी किसी आग में फंसे व्यक्ति की होनी चाहिए. इसका मतलब था कि जब फ्लैट में आग लगी, तब शर्मिला सांस नहीं ले रही थीं. उनकी गर्दन पर दबाव के निशान पाए गए, जिससे यह साफ हो गया कि उनकी हत्या गला दबाकर (Suffocation) की गई थी. इसके बाद आग लगाई गई ताकि सबूत पूरी तरह नष्ट हो जाएं और इसे एक ‘फायर एक्सीडेंट’ करार दिया जा सके. बेंगलुरु पुलिस ने तुरंत मामले को हत्या की धारा में तब्दील कर दिया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन की जांच शुरू की.

पड़ोसी बना हैवान

18 साल के छात्र की काली करतूत जांच के दौरान पुलिस का शक बगल के फ्लैट में रहने वाले 18 वर्षीय युवक पर गया, जो पीयूसी (PUC) का छात्र है. पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपने बयान बदल रहा था. जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और तकनीकी साक्ष्य सामने रखे, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. आरोपी ने बताया कि 3 जनवरी की रात वह शर्मिला के फ्लैट में जबरन दाखिल हुआ था. उसने शर्मिला से यौन संबंधों (Sexual Favors) की मांग की, जिसका शर्मिला ने डटकर विरोध किया.

इस घटना ने बेंगलुरु जैसे आधुनिक शहर में महिलाओं की सुरक्षा पर एक गहरा जख्म दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)

आरोपी शख्स ने किया हैरान करने वाला खुलासा

आरोपी ने खुलासा किया कि जब शर्मिला ने शोर मचाने की कोशिश की और खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया, तो उसने गुस्से में आकर उनका गला घोंट दिया. जब उसे एहसास हुआ कि शर्मिला की मौत हो गई है, तो वह घबरा गया. पकड़े जाने के डर से उसने अपने फोन पर ‘अपराध के निशान मिटाने के तरीके’ सर्च किए और फिर फ्लैट में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल कर आग लगा दी. वह वहां से शर्मिला का मोबाइल फोन भी चुरा ले गया था, ताकि किसी भी तरह का डिजिटल रिकॉर्ड न रहे.

छोटी उम्र का प्यार कितना खतननाक?

इस घटना ने बेंगलुरु जैसे आधुनिक शहर में महिलाओं की सुरक्षा पर एक गहरा जख्म दिया है. एक पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर महिला अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रही, और वह भी उस पड़ोसी से जो उम्र में उससे काफी छोटा था. आरोपी छात्र को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस वारदात में कोई और भी शामिल था या क्या आरोपी ने पहले भी इस तरह की किसी घटना को अंजाम देने की कोशिश की थी.

अब शर्मिला के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वे एक न्यायप्रिय और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे थे, लेकिन एक सनकी छात्र की वासना और डर ने उनके घर का चिराग बुझा दिया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में इतनी पुख्ता चार्जशीट तैयार करेंगे कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिले. यह केस उन अपराधियों के लिए भी एक सबक है जो सोचते हैं कि वे आग और राख के नीचे अपने गुनाहों को दफन कर सकते हैं. विज्ञान और पुलिस की सतर्कता ने साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और सच्चाई कभी नहीं छिपती.

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