Agri Tips : फसलों की दुश्मन है कड़ाके की सर्दी, जानें सरसों और आलू को बचाने के देसी फॉर्मूले

Share to your loved once


Last Updated:

Winter Agri Tips : उत्तर भारत कड़ाके की सर्दी से ठिठुर रहा है. शीतलहर और पाले का असर बढ़ता जा रहा है. रबी की प्रमुख फसलें जैसे सरसों और आलू बेहद संवेदनशील होती हैं. अगर समय रहते सही कदम न उठाए जाएं तो सर्दियों की वजह से फसल में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं. अंत में किसानों को भारी नुकसान हो सकता है. पाले का असर मुख्य रूप से पत्तियों पर पड़ता है. पत्तियां झुलस जाती हैं, जिससे पौधा अपने लिए पर्याप्त भोजन नहीं बना पाता.

सरसों की संवेदनशीलता

सरसों की फसल फूल और दाना बनने की स्थिति में पाले के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती है. जब तापमान शून्य के आसपास पहुंचता है, तो फूल झड़ने लगते हैं और दाने सिकुड़ जाते हैं. इसके कारण उत्पादन में कमी आती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

आलू की खेती

अब अगर बात आलू की खेती की करें तो इसमें पाले का असर मुख्य रूप से पत्तियों पर ज्यादा पड़ता है. पत्तियां झुलस जाती हैं और फोटोसिंथेसिस रुक जाता है. इससे सीधे कंदों का विकास रुक सकता है और आलू का आकार छोटा या अधूरा रह सकता है. इसलिए आलू की फसल भी शीतलहर के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं.

सिंचाई से बचाव

बलिया के कृषि विशेषज्ञ प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, शीतलहर से बचाव में सिंचाई का सही प्रबंधन सबसे प्रभावी उपाय है. ठंड/पाले की आशंका होने पर हल्की सिंचाई करना फसल के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकता है. खासतौर पर शाम के समय सिंचाई से जमीन की गर्मी रात में फसल को पाले से बचाने का काम करती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

पोषक तत्वों का छिड़काव

सरसों के लिए सल्फर और पोटाश युक्त पोषक तत्वों का छिड़काव पौधों की सहनशीलता बढ़ाता है. 0.1% सल्फ्यूरिक एसिड या 2% घुलनशील सल्फर का छिड़काव पाले से होने वाले नुकसान को कम कर सकता हैं. आलू की फसल में 2% थायोयूरिया या 1% यूरिया के घोल का छिड़काव बहुत सही होता है.

पारंपरिक उपाय

सरसों या आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए धुआं करना भी एक कारगर और पारंपरिक उपाय है. किसान शाम के समय खेत के चारों ओर कचरा, पुआल या सूखी घास जलाकर हल्का धुआं कर सकते हैं. इससे तापमान गिरने से रुकता है और फसल सुरक्षित रहती है. ध्यान रहे कि आग को खुला न छोड़ा जाए और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए.

मौसम की जानकारी

किसानों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए. शीतलहर की संभावना होने पर पहले से तैयारी कर लेना फसल को बचाने का सबसे आसान और असरदार तरीका है. समय पर तैयारी से होने वाले नुकसान बेहद कम किया जा सकता है.

रोग और कीट नियंत्रण

फसलों में रोग और कीट नियंत्रण भी बहुत जरूरी होता है. कमजोर पौधे पाले से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. समय पर छोटे-छोटे उपाय, सही पोषण और सतर्कता अपनाकर किसान सरसों और आलू की फसल को शीतलहर और पाले से बचाकर भारी नुकसान से सुरक्षित रख सकते हैं. ये उपाय उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाते हैं.

homeagriculture

फसलों की दुश्मन कड़ाके की सर्दी, जानें सरसों और आलू को बचाने के देसी फॉर्मूले

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP