Pongal festival and traditional dish। पोंगल उत्सव तमिलनाडु की पारंपरिक डिश और धार्मिक महत्व पर जानकारी.
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पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख फसल उत्सव है, जिसमें खानपान का विशेष महत्व होता है. इस त्योहार पर बनाई जाने वाली पारंपरिक डिश को भी पोंगल ही कहा जाता है, जो समृद्धि, आभार और नई फसल के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है. बिना इस खास डिश के पोंगल का उत्सव अधूरा समझा जाता है.

पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख फसल उत्सव है, जिसे खासतौर पर तमिलनाडु में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह पर्व सूर्य देव, प्रकृति और किसानों की मेहनत के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक माना जाता है.

पोंगल उत्सव की सबसे खास बात इसकी ट्रेडिशनल डिश ‘पोंगल’ है, जिसके बिना यह त्योहार अधूरा माना जाता है. यही डिश इस पर्व को उसका नाम भी देती है और धार्मिक व सांस्कृतिक रूप से इसका गहरा महत्व है.

पोंगल की पारंपरिक डिश मुख्य रूप से चावल और मूंग दाल से बनाई जाती है. इसे खुले बर्तन में पकाया जाता है, ताकि उबाल आने पर दूध और चावल बाहर की ओर उफनें. तमिल भाषा में “पोंगल” का अर्थ ही होता है उफनना या उबाल आना, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान लोग सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं.
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पोंगल की डिश को आमतौर पर मिट्टी या पीतल के बर्तन में बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी पारंपरिक हो जाता है.

पोंगल की ट्रेडिशनल डिश दो प्रमुख प्रकार की होती है. पहली है सक्करै पोंगल और दूसरी वेण पोंगल. सक्करै पोंगल मीठा होता है, जिसे गुड़, दूध, चावल और मूंग दाल से तैयार किया जाता है. इसमें इलायची, काजू और किशमिश डालकर इसे और स्वादिष्ट बनाया जाता है. यह डिश खासतौर पर सूर्य देव को प्रसाद के रूप में अर्पित की जाती है और फिर परिवार व पड़ोसियों में बांटी जाती है. इसे शुभता और मिठास का प्रतीक माना जाता है.

वहीं दूसरी ओर वेण पोंगल एक नमकीन डिश होती है, जिसे रोजमर्रा के भोजन या खास मौके पर खाया जाता है. इसे चावल और मूंग दाल के साथ घी, काली मिर्च, जीरा, अदरक और करी पत्ते डालकर बनाया जाता है. वेण पोंगल का स्वाद बेहद सादा लेकिन पौष्टिक होता है. इसे आमतौर पर नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोसा जाता है. यह डिश न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि पचने में भी हल्की मानी जाती है.

पोंगल की डिश का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत खास है. इसे घर के आंगन या खुले स्थान पर बनाना शुभ माना जाता है. पूरे परिवार के सदस्य इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं, जिससे आपसी जुड़ाव और सामूहिकता का भाव मजबूत होता है. पोंगल के दौरान नई फसल से बने चावल और गन्ने का इस्तेमाल किया जाता है, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है.