Bathroom mirror vastu। शीशा लगाने के वास्तु नियम

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Bathroom Mirror Vastu: घर बनवाते समय या रिनोवेशन कराते वक्त लोग किचन, बेडरूम और पूजा स्थान पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन बाथरूम को अकसर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि वास्तु शास्त्र के हिसाब से बाथरूम घर का ऐसा हिस्सा होता है जहां नकारात्मक ऊर्जा सबसे ज्यादा बनती और जमा होती है. यही वजह है कि बाथरूम से जुड़ी छोटी-छोटी चीजें भी पूरे घर के माहौल, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं. आज के समय में लगभग हर बाथरूम में शीशा लगाया जाता है. सुबह तैयार होते वक्त, चेहरा धोते समय या ब्रश करते हुए शीशा देखना हमारी आदत बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाथरूम में शीशा लगाना वास्तु के हिसाब से सही है या गलत? कई लोग इस सवाल को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं. कुछ का मानना है कि बाथरूम में शीशा लगाने से नेगेटिव एनर्जी बढ़ती है, वहीं कुछ लोग इसे पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं.

असल में वास्तु शास्त्र शीशा लगाने से मना नहीं करता, बस कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है. शीशे की दिशा, उसका आकार, उसकी सफाई और उसकी पोजीशन अगर सही हो, तो यह नुकसान की जगह फायदा भी दे सकता है. इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में जानेंगे कि बाथरूम में शीशा लगाना चाहिए या नहीं, अगर लगाना है तो किस दिशा में, किस आकार का और किन बातों से बचना जरूरी है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से.

वास्तु के मुताबिक बाथरूम में शीशा लगाना सही है या नहीं
वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम में शीशा लगाया जा सकता है, लेकिन बिना सोचे-समझे नहीं. बाथरूम में मौजूद शीशा वहां की ऊर्जा को दोगुना करने का काम करता है, अगर वहां साफ-सफाई है और सही दिशा में शीशा लगा है, तो सकारात्मक असर दिखता है, लेकिन गलत जगह या गलत हालत में लगा शीशा परेशानी का कारण बन सकता है.

किस दिशा में लगाएं बाथरूम का शीशा
अगर आप बाथरूम में आईना लगवाना चाहते हैं, तो उसके लिए पूर्व या उत्तर दिशा सबसे बेहतर मानी जाती है. इन दिशाओं में लगाया गया शीशा घर की ऊर्जा को संतुलित रखता है और मन को शांत करता है. खासकर सुबह के समय जब आप खुद को शीशे में देखते हैं, तो इससे दिन की शुरुआत बेहतर मूड के साथ होती है.

गोलाकार शीशा क्यों माना जाता है अच्छा
वास्तु के मुताबिक गोलाकार शीशा बाथरूम के लिए अच्छा विकल्प होता है. गोल शेप नुकीले कोनों से मुक्त होती है, जिससे नेगेटिव वाइब्स कम होती हैं. साथ ही ऐसा शीशा देखने में भी सुंदर लगता है और मन में पॉजिटिव फीलिंग पैदा करता है. छोटे या मीडियम साइज का गोल शीशा बाथरूम के लिए सही रहता है.

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दरवाजे के सामने शीशा लगाने से बचें
बाथरूम में शीशा लगाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि वह दरवाजे के ठीक सामने न हो. माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति बाथरूम में प्रवेश करता है, तो उसके साथ पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह की ऊर्जा अंदर जाती है, अगर शीशा दरवाजे के सामने होगा, तो यह ऊर्जा वापस रिफ्लेक्ट होकर घर में फैल सकती है, जो ठीक नहीं माना जाता.

आयताकार शीशा भी है सही विकल्प
अगर गोलाकार शीशा पसंद नहीं है, तो आप आयताकार दर्पण भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बस ध्यान रखें कि उसका फ्रेम मजबूत हो और किनारे टूटे या चिपके हुए न हों. आयताकार शीशा साफ-सुथरा और सही ऊंचाई पर लगा होना चाहिए, ताकि इस्तेमाल करते समय पूरा चेहरा साफ दिखे.

दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने बाथरूम के नियम
अगर आपके घर का बाथरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में बना हुआ है, तो वास्तु के अनुसार वहां पूर्व दिशा की दीवार पर वर्गाकार शीशा लगाना बेहतर रहता है. ऐसा करने से बाथरूम से जुड़ा वास्तु दोष कम हो सकता है और घर का बैलेंस बना रहता है.

टूटा या गंदा शीशा क्यों होता है अशुभ
वास्तु शास्त्र में टूटा, चटक या गंदा शीशा बहुत अशुभ माना जाता है. ऐसा शीशा घर में तनाव, पैसों की दिक्कत और आपसी रिश्तों में खटास बढ़ा सकता है. इसलिए अगर बाथरूम का शीशा साफ नहीं रहता या उसमें दरार आ गई है, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए.

शीशे में टॉयलेट सीट दिखना क्यों गलत है
इस बात का भी ध्यान रखें कि बाथरूम के शीशे में टॉयलेट सीट का रिफ्लेक्शन न दिखे. वास्तु के मुताबिक ऐसा होना नकारात्मक असर डालता है और घर की शांति को बिगाड़ सकता है. जरूरत पड़े तो शीशे की पोजीशन थोड़ी बदलें.

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