सियासत, सस्पेंस और हरी फाइल: इधर ममता की शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED, उधर BJP ने दीदी से पूछे कड़वे सवाल
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Bengal Politics: कोलकाता के आई-पैक दफ्तर में ED की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल ने सियासी भूचाल ला दिया है. ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीएम पर जांच में बाधा डालने और फाइलें छीनने का आरोप लगाया है. बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर उस फाइल में क्या राज था जो ‘दीदी’ इतनी घबरा गई हैं?
बंगाल में खूब राजनीति हो रही है. पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ममता सरकार के बीच चल रही जंग अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गई है. कोलकाता स्थित आई-पैक (I-PAC) दफ्तर में हुई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप और वहां से ‘फाइलें’ ले जाने के मामले में ED ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली है. इधर भाजपा ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीखे हमले करते हुए पूछा कि आखिर उस ‘हरी फाइल’ में ऐसा क्या राज छिपा था, जिसे बचाने के लिए मुख्यमंत्री को खुद एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म के दफ्तर भागना पड़ा. इस सियासी खींचतान के बीच बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर भी हमला हुआ है, जिसे भाजपा ने ‘हरी फाइल’ कांड से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया है.
सियासत, सस्पेंस और ‘हरी फाइल’ का ड्रामा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘फाइल’ और ‘फर्जीवाड़े’ का रिश्ता पुराना है लेकिन आई-पैक दफ्तर का ताजा घटनाक्रम किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. रविशंकर प्रसाद ने संवैधानिक नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह तर्क गले नहीं उतरता कि वह वहां मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गई थीं. सवाल यह है कि क्या एक मुख्यमंत्री की संवैधानिक शपथ उन्हें किसी जांच एजेंसी की रेड में घुसने और वहां से दस्तावेज ले जाने की इजाजत देती है? भाजपा का आरोप है कि बंगाल पुलिस अब राज्य की जनता की रक्षक नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस की निजी जागीर बन गई है. जब पुलिस कमिश्नर और डीजीपी खुद मुख्यमंत्री के साथ एक निजी इमारत की 11वीं मंजिल पर रेड रोकने पहुंच जाएं तो प्रशासनिक निष्पक्षता का जनाजा निकलना तय है. रविशंकर प्रसाद ने साफ कहा कि यह ‘क्विड प्रो को’ यानी ‘तुम मुझे बचाओ, मैं तुम्हें बचाऊंगा’ का खेल है.
क्या I-PAC सिर्फ एक कंसल्टेंसी फर्म है?
इस पूरे विवाद के केंद्र में आई-पैक की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है. भाजपा ने बड़ा सवाल दागा है कि क्या यह फर्म केवल चुनावी रणनीतियां बनाती है या फिर टीएमसी के ‘अनअकाउंटेड मनी’ (बेहिसाब संपत्ति) को ठिकाने लगाने का एक जरिया मात्र है? कोल स्कैम, गोवा इलेक्शन और दुबई कनेक्शन की चर्चाओं ने इस संदेह को और गहरा कर दिया है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी मुख्य सचिव और प्रधान सचिव की मौजूदगी को प्रशासनिक मर्यादा का गंभीर उल्लंघन बताया है. बंगाल में संवैधानिक व्यवस्था के ध्वस्त होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के नेता प्रतिपक्ष को एक रैली के लिए 100 से ज्यादा बार कोर्ट जाना पड़ता है और फिर भी उन पर हमले होते हैं. सुप्रीम कोर्ट में ED की यह याचिका केवल एक रेड में बाधा डालने का मामला नहीं है बल्कि यह बंगाल में ‘कानून के राज’ और ‘दीदी के राज’ के बीच छिड़ी सबसे बड़ी कानूनी जंग है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें