Rampur Halwa : मछली, मिर्च और एलोवेरा से बनता है ये हलवा, रामपुर की नवाबी पहचान, खाते ही सर्दियां छूमंतर – Uttar Pradesh News
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Rampur Halwa Recipe : रामपुर की गलियों में सर्दियां आते ही कुछ ऐसे हलवे बनते हैं, जिनके नाम सुनकर लोग चौंक जाते हैं. कहीं मछली से हलवा बनता है तो कहीं मिर्च और एलोवेरा से मिठास निकाली जाती है. ये हलवे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि नवाबी दौर में दवा की तरह खाए जाते थे. आज भी ठंड में जोड़ों के दर्द, कमजोरी और शरीर को गर्म रखने के लिए लोग इन अजीब लेकिन खास हलवों को तलाशते हैं. देसी घी, दूध, मेवे और जड़ी-बूटियों से बने ये हलवे रामपुर की शाही रसोई की विरासत हैं.

नीम का नाम सुनते ही लोग मुंह बना लेते हैं लेकिन रामपुर के नवाबी दौर में इससे बना हलवा जरूरत पड़ने पर खास दवा माना जाता था. नीम की कड़वाहट निकालकर देसी घी, दूध और शहद में पकाया जाता है. यह हलवा पेट को अंदर से साफ रखने में मदद करता है. नवाब इसे सीमित मात्रा में खाते थे और आज भी यह सिर्फ रामपुर की पहचान बना हुआ है.

रामपुर में अदरक के हलवे की परंपरा नवाबी दौर से चली आ रही है. पहले यह हलवा सिर्फ शाही महल में बनता था लेकिन अब आम लोग भी इसे चाव से खाते हैं. चौथी पीढ़ी से जुड़े अब्दुल अहद बताते हैं कि यह हलवा अदरक, गेहूं और जड़ी-बूटियों से तैयार होता है. सर्दियों में शरीर को गर्म रखने वाला यह हलवा 560 रुपये किलो में मिलता है और रामपुर से बाहर भी खूब पसंद किया जाता है.

रामपुर की शाही रसोई से निकला मछली का हलवा करीब 100 साल पुरानी रेसिपी है. रहमत अली ने इसे नवाबों के लिए तैयार किया था, जिसे आज उनकी पांचवीं पीढ़ी महफूज अली बना रही है. दूध, मसाले और देसी घी में पकने वाला यह हलवा सर्दियों में ताकत देता था. आज यह रामपुर से निकलकर विदेशों के फूड फेस्टिवल्स तक अपनी पहचान बना चुका है.<br />photo source:- PRARANG
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नवाबी दौर में जब सर्दियों में नवाब साहब को जोड़ों के दर्द या शरीर में जकड़न की शिकायत होती तब हकीम एलोवेरा खाने की सलाह देते थे. कड़वा होने की वजह से इसे सीधे खाना मुश्किल था इसलिए एलोवेरा का हलवा तैयार किया गया. देसी घी और खास बूटियों से बना यह हलवा धीमी आंच पर पकता था. आज भी रामपुर में यह हलवा जोड़ों के दर्द में फायदेमंद माना जाता है और आज इसकी कीमत 700 रुपये किलो है.

रामपुर का हब्शी हलवा देश-विदेश तक अपनी अलग पहचान बना चुका है. करीब 150 साल पुरानी नवाबी रेसिपी से तैयार यह हलवा देसी घी, दूध, मेवे और खास जड़ी-बूटियों से बनता है. इसकी खासियत है कि यह शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ताकत देता है. सर्दियों में इसे स्पेशली पसंद किया जाता है. इसकी कीमत करीब 450 से 550 रुपये किलो तक होती है.

रामपुर का मिर्च हलवा नवाबी रसोई की अनोखी पहचान माना जाता है. करीब सौ साल पुरानी इस रेसिपी में हरी मिर्च, खोया, दूध और देसी मसालों का इस्तेमाल होता है. मिर्च को पहले चाशनी में पकाकर उसका तीखापन कम किया जाता है. इसके बाद हलवे को धीमी आंच पर तैयार किया जाता है. खास मौकों और फ़ूड फेस्टिवल पर यह हलवा परोसा जाता है, जो स्वाद और खुशबू दोनों में बेहद अलग होता है.

रामपुर का पापड़ी हलवा, जिसे कड़ाका भी कहा जाता है. नवाबी दौर की खास मिठाई है. करीब 100 साल पुरानी इस रेसिपी में अंकुर किए हुए गेहूं, शुद्ध देशी घी और दूध का इस्तेमाल होता है. इसे बनाने में घंटों की मेहनत लगती है तभी इसका स्वाद इतना खास बनता है. उसके बाद इसके ऊपर ड्राई फूड डाले जाते हैं. आज इसकी कीमत 800 रुपये किलो है.

हल्दी का हलवा नवाबी दौर में सर्दियों की दवा माना जाता था. ठंड में जोड़ों के दर्द और अंदरूनी सूजन के लिए इसे बेहद फायदेमंद समझा जाता है. देसी घी, दूध और हल्दी से बना यह हलवा स्वाद के साथ सेहत भी देता है. नवाब इसे रोज नहीं बल्कि जरूरत के हिसाब से खाते थे. आज भी रामपुर में इसे पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है. बाहर फूड फेस्टिवल में रामपुर के शाही शेफ से जरूर बनवाया जाता है.

रामपुर की पहचान उसके अनोखे शाही हलवों से भी है. यहां मछली का हलवा, हब्शी हलवा, एलोवेरा हलवा, मिर्च का हलवा और पपड़ी हलवा नवाबी दौर से बनाए जा रहे हैं. सर्दियों में ये हलवे खासतौर पर खाए जाते हैं क्योंकि इन्हें सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. देसी घी, दूध, मेवे और जड़ी-बूटियों से बने ये हलवे रामपुर की शाही रसोई की विरासत हैं.