‘पुलिस अंकल अब मुझे भी मार डालेंगे’, अनाथ की दर्दभरी पुकार, पहले पिता और अब मां को भी दरिंदों ने लिया छीन | minor daughter heart breaking story | delhi police failure | parents are murdered | indian judiciary system news

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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में 10 जनवरी की शाम जो हुआ, उसने न केवल कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया. यह कहानी एक ऐसी बहादुर महिला की है जिसने अपने पति के हत्यारों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, लेकिन अंत में उसे मिली तो सिर्फ मौत. और अब, इस खौफनाक वारदात के बाद एक मासूम बच्ची के आंसुओं ने पूरी दिल्ली के दिल को झकझोर कर रख दिया है. दिल्ली में न्याय की उम्मीद और हिम्मत की एक मशाल बुझ गई. अदालत देखती रह गई और पति के हत्यारों को सजा दिलाने की जंग लड़ रही एक बहादुर मां की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. पीछे रह गई है एक बिलखती मासूम बेटी, जिसकी रूह कपा देने वाली पुकार सुनकर आज हर आंख नम है.

साहस और संघर्ष का खौफनाक अंत

44 वर्षीय रचना यादव एक केस की कोई मामूली गवाह नहीं थी, वह एक योद्धा थी. साल 2023 में उसके पति की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. उस दिन से लेकर आज तक, उसने एक पल भी चैन की सांस नहीं ली. वह घर संभालती और अपनी नाबालिग बेटी का हौसला बढ़ाती और फिर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटती. वह जानती थी कि राह आसान नहीं है, उसे धमकियां मिल रही थीं, डराया जा रहा था, लेकिन उसकी आंखों में सिर्फ एक ही सपना था. अपने पति को इंसाफ दिलाना. वह हाल ही में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी ताकि उसके पति के हत्यारे की अग्रिम जमानत रद्द कराई जा सके. लेकिन कातिलों के मंसूबे उसके साहस से कहीं ज्यादा ऊंचे और खतरनाक निकले.

बिना कांपे सीने में उतार दी गोली

चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे. जैसे ही महिला अपने घर के पास पहुंची, हत्यारों ने उसे घेर लिया. इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती या मदद के लिए चिल्लाती, पॉइंट-ब्लैंक रेंज से उसके सीने में गोली दाग दी गई. खून से लथपथ वह जमीन पर गिर पड़ी. उसकी सांसें टूट रही थीं, लेकिन शायद आखिरी वक्त में भी उसे अपनी उस बेटी की चिंता सता रही होगी, जिसके लिए वह जी रही थी. हमलावर बड़े आराम से हथियार लहराते हुए फरार हो गए, मानो उन्हें कानून का कोई खौफ ही न हो.

मासूम बेटी की करुण पुकार

‘अब मेरा कोई नहीं’. इस पूरी वारदात का सबसे दर्दनाक पहलू वह 14 साल की मासूम बच्ची है, जिसने 3 साल के भीतर अपने माता-पिता दोनों को खो दिया. अस्पताल के बाहर बिलखती उस बच्ची के शब्द वहां खड़े हर शख्स की रूह को छलनी कर रहे थे. उसने सिसकते हुए कहा, ‘जिसने मेरे पापा को हमसे छीना, उसी ने आज मेरी मां को भी मार डाला. मेरी मां बहुत बहादुर थी, वो पापा के लिए लड़ रही थी. उन्होंने पुलिस से कहा था कि हमें डर लगता है, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी. अब इस दुनिया में मेरा कोई नहीं बचा है. वो हत्यारे मुझे भी ढूंढ लेंगे, वो मुझे भी मार डालेंगे.’

सिस्टम फेल

बच्ची की यह पुकार केवल एक आरोपी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ भी है जो गवाहों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है. उसकी आंखों में भविष्य का कोई सपना नहीं, बल्कि सिर्फ मौत का खौफ नाच रहा है. वह बार-बार अपनी मां का नाम पुकारती और फिर चुप हो जाती, मानो उसे यकीन ही नहीं हो रहा कि अब उसे गले लगाने वाला कोई नहीं है.

दिल्ली पुलिस की विफलता

दिल्ली पुलिस की विफलता पर उठे सवाल यह हत्या केवल एक अपराधी का दुस्साहस नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक गहरा धब्बा है. जब मृतका पहले से ही गवाह थी और उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं, तो उसे सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम यानी गवाह सुरक्षा योजना के लंबे-चौड़े वादों का क्या हुआ? जब वह महिला सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगा रही थी, तब स्थानीय पुलिस सोती रही. अपराधियों को पता था कि अगर यह महिला जिंदा रही, तो वे कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, इसलिए उन्होंने सिस्टम की ढिलाई का फायदा उठाया और गवाह को ही रास्ते से हटा दिया.

उन गलियों में पसरा सन्नाटा

आज शालीमार बाग की उन गलियों में सन्नाटा है, लेकिन वह मासूम बच्ची की सिसकियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. लोग पूछ रहे हैं कि क्या भारत की राजधानी में न्याय मांगना इतना महंगा पड़ता है? क्या अब बेटियां इसी तरह अनाथ होती रहेंगी क्योंकि कातिलों के हाथ कानून से लंबे हो चुके हैं? इस मां की शहादत और उस बच्ची के आंसू अब दिल्ली पुलिस से जवाब मांग रहे हैं.

यह वारदात उस समय हुई जब रचना यादव अपने घर के पास स्थित एक पार्क में कपड़ा सुखाने गई थीं. पार्क में छुपे हमलावरों ने नजदीक से सिर में गोली मारी. मृतक का पति विजेंद्र यादव की भी साल 2023 में जहांगीरपुरी में सरे राह हत्या कर दी गई. उसी समय से रचना इंसाफ के लिए अकेले लड़ रही थी. इस मामले के आरोपी भरत यादव को हाल ही में हाईकोर्ट से मिली बेल को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी. रचना यादव ने जमानत रद्द कराने की याचिका दायर की थी. इसके बाद से ही रचना को लगातार धमकियां मिल रही थीं. लेकिन दिल्ली पुलिस ने कुछ नहीं किया. रचना की मासूम बेटी का आरोप है कि अगर दिल्ली पुलिस समय पर सुरक्षा दी होती तो उसकी मां आज जिंदा होती.

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