Happy Birthday Rahul Dravid turns 52: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी और कोच राहुल द्रविड़ 52 साल के हो गए हैं.

Share to your loved once


नई दिल्ली: भारीतय क्रिकेट टीम के महान क्रिकेटर राहुल द्रविड़ के 52 साल पूरे हो गए. राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ था. भारत के लिए राहुल द्रविड़ का करियर उपलब्धियों से भरा हुआ है. एक खिलाड़ी के अलावा उन्होंने कोचिंग में भी अपना झंडा बुलंद किया, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि राहुल द्रविड़ का सपना क्रिकेटर बनने का नहीं, बल्कि हॉकी प्लेयर बनने का था.

राहुल द्रविड़ अपने स्कूल के दिनों में हॉकी खेला करते थे. बेंगलुरु स्थित सेंट जोसेफ बॉयज हाई स्कूल की टीम में द्रविड़ सेंटर-हाफ पोजीशन में खेलते थे. स्कूल टीम के अलावा द्रविड़ जूनियर स्टेट टीम का भी हिस्सा रहे थे. सेंटर-हाफ पोजीशन पर द्रविड़ से बेहतर कोई नहीं था, लेकिन कोच के एक फैसले ने द्रविड़ की किस्मत ही बदल डाली और धीरे-धीरे उन्होंने अपने पहले प्यार हॉकी से दूर होकर क्रिकेट को अपना लिया.

कैसे हॉकी प्लेयर से क्रिकेटर बने राहुल द्रविड़

राहुल द्रविड़ एक बेहतरीन हॉकी प्लेयर थे. द्रविड़ के हॉकी करियर में तब एक अहम मोड़ आया जब उनके स्कूल के कोच शिव प्रकाश ने उन्हें सेंटर-हाफ से हटाकर राइट-हाफ पोजीशन पर भेज दिया. द्रविड़ का मानना था कि वह सेंटर-हाफ में अच्छा खेलते थे. कोच सेंटर-हाफ पोजीशन पर द्रविड़ की जगह संदीप सोमेश को ले आए. वे वही संदीप सोमेश हैं जो भारत के लिए नेशनल लेवल वर हॉकी में प्रतिनिधित्व किया.

राहुल द्रविड़ ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि जब कोच ने उनकी पोजीशन बदली तो उन्हें एहसास हुआ कि वह हॉकी के लिए उतना अच्छा नहीं हैं, जितना संदीप थे. उन्होंने कहा, “हॉकी टीम में पोजीशन बदलने के बाद खुशकिस्मती से मेरे पास क्रिकेट का विकल्प था.” हॉकी में अपनी पोजीशन बदले जाने के बाद द्रविड़ का ध्यान धीरे-धीरे क्रिकेट की ओर बढ़ने लगा. उन्हें लगने लगा कि वह हॉकी से ज्यादा क्रिकेट की पिच पर खुद को सहज महसूस कर रहे हैं. फिर क्या था उन्होंने इस खेल में खुद को झोंक दिया.

चेपॉक समर कैंप से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

हॉकी से दूर होने के बाद राहुल द्रविड़ ने स्कूल के स्तर पर भी क्रिकेट खेलना शुरू किया. जूनियर लेवल पर धीरे-धीरे द्रविड़ की पहचान बनने लगी. इसी बीच चिन्नास्वामी स्टेडियम में लगे एक समर कैंप में गए, जहां उन पर मशहूर कोच केकी तारापोर की नजर पड़ी. तारापोर ने द्रविड़ को खेलते देख तुरंत उनकी प्रतिभा को पहचान लिया और यहीं से उनके क्रिकेटिंग सफर की शुरुआत हो गई.

जूनियर क्रिकेट में लगातार कड़ी मेहनत के बाद उन्हें 1990 में पहली बार कर्नाटक स्टेट टीम में शामिल किया गया. घरेलू क्रिकेट में डेब्यू के बाद द्रविड़ को भारतीय टीम में आने के लिए करीब 6 साल लग गए. द्रविड़ को अप्रैल, 1996 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे में डेब्यू का मौका मिला था. इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया.

राहुल द्रविड़ का क्रिकेटिंग करियर

राहुल द्रविड़ का क्रिकेटिंग करियर बहुत ही शानदार रहा. इस जेंटलमैन खेल के राहुल द्रविड़ महानतम खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. द्रविड़ भारत के लिए 164 टेस्ट, 344 वनडे और 1 टी20 इंटरनेशनल में मैचों में मैदान पर उतरे. टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ ने 52.31 की औसत से 13288 रन बनाए. इस फॉर्मेट में द्रविड़ ने 63 अर्धशतक और 36 शतक लगाने का कारनामा किया है. टेस्ट में द्रविड़ के नाम 5 डबल सेंचुरी भी है. वहीं वनडे में द्रविड़ ने 10889 रन बनाए हैं. इस फॉर्मेट में उनके नाम 83 फिफ्टी और 12 सेंचुरी है.

बता दें कि टेस्ट और वनडे मिलाकर उन्होंने कुल 46543 गेंदों का सामना किया है. यही वजह है कि उन्हें क्रिकेट में द वॉल के नाम से जाता है. खुद को तोप समझने वाले गेंदबाज की भी द्रविड़ को आउट करने में पसीने छूट जाते थे. एक बार जब वह क्रीज पर पैर जमा लेते थे तो फिर उन्हें हिला पाना फिर मुश्किल हो जाता था. उन्होंने अनगिनत बार टीम इंडिया को मुश्किल परिस्थियों से निकालकर जीत दिलाई, जिसके कारण उन्हें मिस्टर डिपेंडबल के नाम से भी पुकारा जाता था. बल्लेबाजी में महानता की गाथा लिखने के अलावा उन्होंने विकेटकीपिंग में भी लंबे समय तक टीम इंडिया का साथ निभाया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP