चिकन वाली खिचड़ी… सर्दियों में घर पर ऐसे बनाएं, झारखंड की पारंपरिक डिश का नाम जान आ जाएगी हंसी, स्वाद भी लाजवाब
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झारखंड की पारंपरिक डिश ‘चिकन लेटो’ सर्दियों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. देसी चावल, चिकन और घरेलू मसालों से तैयार यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि शरीर को प्राकृतिक गर्माहट और ताकत भी देता है. कम मसालों में बनने के कारण यह सेहतमंद है और झारखंडी संस्कृति की पहचान है.
जमशेदपुर: ठंड का मौसम आते ही झारखंड के घरों में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू रसोई से निकलने लगती है. इन्हीं में से एक खास और लोकप्रिय व्यंजन है चिकन लेटो. देखने में यह भले ही खिचड़ी जैसा लगता हो, लेकिन स्वाद और पौष्टिकता के मामले में यह एक अलग पहचान रखता है. झारखंडी समाज में लेटो को सर्दियों का खास भोजन माना जाता है, जिसे खासतौर पर ठंड के दिनों में बनाया और बड़े चाव से खाया जाता है.
स्थानीय गृहिणी अंजलि टुडू बताती हैं कि लेटो आमतौर पर सादा भी बनाया जाता है, लेकिन चिकन मिल जाने से इसका स्वाद और सेहत दोनों दोगुनी हो जाती है. यह व्यंजन हल्के देसी मसालों में तैयार होता है, जिससे यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए उपयुक्त माना जाता है. सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और ताकत देने के लिए चिकन लेटो को बेहद फायदेमंद माना जाता है.
इन सामग्रियों से बनता है खास व्यंजन
चिकन लेटो बनाने के लिए ज्यादा मसालों या महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. देसी चावल, हड्डी वाला चिकन, प्याज, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी, नमक और सरसों का तेल—बस इन्हीं चीजों से यह पारंपरिक डिश तैयार हो जाती है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह सादा होते हुए भी स्वाद से भरपूर होता है.
जानिए बनाने की विधि
सबसे पहले देसी चावल को धोकर कुछ देर के लिए भिगो दिया जाता है. दूसरी ओर चिकन को साफ कर हल्दी और नमक लगाकर रखा जाता है. अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को पीसकर पेस्ट तैयार किया जाता है. कढ़ाही या कुकर में सरसों का तेल गर्म कर उसमें प्याज भुना जाता है. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर भूनते हैं और फिर चिकन मिलाया जाता है. जब चिकन मसालों के साथ अच्छी तरह भुन जाए, तब चावल डालकर पानी मिलाया जाता है. धीमी आंच पर पकने के बाद जब चावल और चिकन पूरी तरह गल जाते हैं, तब स्वादिष्ट चिकन लेटो तैयार हो जाता है.
संस्कृति और स्वाद का मेल
चिकन लेटो सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है. सर्दियों में परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर इसे खाते हैं. यही वजह है कि आज भी आधुनिक खान-पान के दौर में यह पारंपरिक स्वाद झारखंडी घरों में अपनी जगह बनाए हुए है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.