CJI Suryakant Warning to Lawyers | CJI Suryakant News | CJI Haryana Hisar Visit- ‘तुम यहां क्यों लाइफ वेस्ट कर रहे हो?’ जानिए वो किस्सा जिसने एक वकील को बनाया भारत का चीफ जस्टिस

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CJI Suryakant Warning to Lawyers: ‘तुम यहां क्यों लाइफ वेस्ट कर रहे हो?’ यह एक ऐसा सवाल था, जिसने एक युवा वकील की दिशा ही बदल दी. साल 1984 में हिसार की जिला अदालत में प्रैक्टिस शुरू करने वाले उस वकील ने शायद तब यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वही भारत के चीफ जस्टिस की कुर्सी तक पहुंचेगा. लेकिन अदालत के गलियारों में कही गई यही एक लाइन उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई. यह किस्सा खुद भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने साझा किया, जब वे हिसार बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे. उन्होंने बताया कि कैसे करियर की शुरुआत में एक सीनियर जज की टिप्पणी ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया. आज जब वे देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर हैं, तो यह कहानी सिर्फ उनकी सफलता की नहीं, बल्कि मेहनत, मार्गदर्शन और सही समय पर मिले एक झटके की भी है, जिसने एक वकील को CJI बना दिया.

इसके साथ ही उन्होंने युवा वकीलों को बड़ी चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि कानूनी दुनिया तेजी से बदल रही है और जो वक्त के साथ नहीं बदलेगा, वह पीछे छूट जाएगा. हिसार और हांसी बार एसोसिएशन के कार्यक्रमों में बोलते हुए CJI ने साफ कहा कि आज टेक्नोलॉजी को समझना कोई विकल्प नहीं, बल्कि न्याय देने की बुनियादी शर्त बन चुका है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार CJI सूर्यकांत ने चेताया कि साइबर क्राइम, डिजिटल फ्रॉड और ग्लोबल कमर्शियल विवादों के दौर में अगर वकीलों ने खुद को अपडेट नहीं किया, तो वे प्रभावी पैरवी नहीं कर पाएंगे. इसी दौरान उन्होंने 40 साल पुरानी अपनी शुरुआती वकालत के दिनों को भी याद किया.

क्यों वकीलों को बदलने की चेतावनी दी CJI ने?

CJI सूर्यकांत के मुताबिक आज अपराधों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है. साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे मामलों में सिर्फ कानून की किताबें काफी नहीं हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल सबूतों को समझने, टेक्नोलॉजी का विश्लेषण करने और नए तरह के अपराधों से निपटने के लिए वकीलों को तकनीकी रूप से सक्षम होना ही पड़ेगा.

CJI ने कहा कि हिसार बार एसोसिएशन से उनका रिश्ता सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक है.

कैसे बदल रही है न्याय व्यवस्था?

रिपोर्ट के अनुसार CJI ने बताया कि भारतीय न्यायपालिका ने टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में दुनिया भर में उदाहरण पेश किया है. कोविड-19 के दौरान वर्चुअल कोर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बिना रुके न्याय दिया गया. आज अदालतों के फैसलों का कई भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है ताकि आम लोग भी उन्हें समझ सकें. यह बदलाव वकीलों से भी नई सोच और नई तैयारी की मांग करता है.

क्या कहा युवा वकीलों से?

CJI सूर्यकांत ने खास तौर पर युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में उन्हें देश की सीमाओं से बाहर भी केस लड़ने पड़ सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘कल आपको इस देश की भौगोलिक सीमा से बाहर जाकर भी केस फाइल करना और बहस करनी पड़ सकती है.’ उनका साफ संदेश था कि युवा वकील खुद को ग्लोबल लेवल का लॉयर बनने के लिए अभी से तैयार करें.

40 साल पुरानी कहानी क्यों खास है?

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत भावुक भी हुए. उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल 1984 को वे पहली बार हिसार कोर्ट आए थे और 29 जुलाई को एडवोकेट आत्मा राम बंसल के साथ प्रैक्टिस शुरू की. उन्होंने याद किया कि तब एक जिला जज ने एक सीनियर वकील से कहा था, ‘इसे यहां क्यों बर्बाद कर रहे हो?’ इसके बाद वे चंडीगढ़ चले गए, लेकिन हिसार बार से उनका रिश्ता कभी टूटा नहीं.

हिसार बार से भावनात्मक जुड़ाव

CJI ने कहा कि हिसार बार एसोसिएशन से उनका रिश्ता सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक है. उन्होंने कहा, मुझे यहां जो प्यार, स्नेह और मार्गदर्शन मिला, वही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने हिसार बार के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के वकीलों ने देशभर में न्याय सेवा में अहम योगदान दिया है.

कमर्शियल विवाद और विदेशी निवेश का असर

CJI ने यह भी बताया कि भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के साथ विदेशी निवेश बढ़ा है. इसके चलते कमर्शियल विवाद और कॉरपोरेट मुकदमों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून, कॉन्ट्रैक्ट लॉ और टेक्नोलॉजी की समझ जरूरी हो गई है. इसी वजह से वकीलों को अपनी रणनीति और स्किल्स बदलनी होंगी.

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत भावुक भी हुए. (फाइल फोटो)

हांसी कार्यक्रम में क्या कहा CJI ने?

हांसी बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने बताया कि अदालतों में काम का बोझ बढ़ रहा है, इसलिए संसाधन और सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं. उन्होंने हांसी को जिला बनाए जाने को ऐतिहासिक कदम बताया और हांसी न्यायिक परिसर में ई-लाइब्रेरी की सुविधा देने का भी अनुरोध किया. CJI सूर्यकांत का संदेश साफ है जो वकील समय के साथ खुद को नहीं बदलेगा, वह पीछे रह जाएगा. बदलते अपराध, बदलती अर्थव्यवस्था और बदलती तकनीक के दौर में खुद को अपडेट करना ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है.

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