Famous Personality: शहनाई सम्राट से लेकर हॉकी के जादूगर तक…बनारस की ये हस्तियां देशभर में हैं मशहूर
Last Updated:
बनारस एक ऐसा शहर है जो अपनी अलग-अलग खूबियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है.इस प्राचीन शहर को वाराणसी और काशी के नाम से भी जाना जाता है.गंगा किनारे बसा ये शहर दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है.जस शहर में संगीत,खेल,राजनीति सहित अलग-अलग क्षेत्रों के ऐसे नामचीन लोग भी है जिन्होंने अपने क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की थी.आइये जानते है उनके बारे में.

शहनाई सम्राट भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान काशी के ही रहने वाले थे. वाराणसी के हड़ाय सराय इलाके में उनका घर था. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने शहनाई की धुन को पूरे दुनिया में पहचान दिलाई थी. 15 अगस्त 1947 को आजादी की पहली सुबह पर उन्होंने दिल्ली के लाल किले से शहनाई की धुन पर देशभक्ति के गीत सुनाया था, जिसके बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी.

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी काशी से नाता था. गंगापार रामनगर में उनका आवास था. इस आवास पर आज भी उनके जीवन से जुड़ी अहम चींजों को रखा गया है. उनका घर अब म्यूजियम में तब्दील हो गया है. लाल बहादुर शास्त्री जी ने ही पुलिस को लाठी की जगह भीड़ नियंत्रण के लिए वॉटर कैनन के इस्तेमाल की तकनीक सुझाई थी और उसे लागू भी किया था. महज 18 महीने के कार्यकाल में उन्होंने देश हित में कई बड़े फैसले लिए थे.

गिरिजा देवी शास्त्रीय संगीत की जानी मानी गायिका थी. उनका नाता बनारस संगीत घराने से था. गिरिजा देवी ने भी ठुमरी गायन को पूरे देश में एक अलग पहचान दिलाई थी. कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित भी किया था. इसके अलावा भी उन्हें कई नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड मिले थे.
Add News18 as
Preferred Source on Google

हॉकी के जादूगर मोहम्मद शाहिद भी काशी के रहने वाले थे. वे भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी थे. उन्हें 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक गेम में गोल्ड मेडल जीता था. इसके अलावा वो एशियन और एशियाड खेलों में भी भारतीय टीम का हिस्सा थे और उन्होंने मेडल भी हासिल किए थे. साल 1986 में उन्हें पद्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. हालांकि, इसके पहले उन्हें अर्जुन अवार्ड भी मिल चुका था.

पण्डित छन्नूलाल मिश्र भी शास्त्रीय संगीत के जाने माने कलाकार थे. वे चैती, ठुमरी, दादरा, कजरी के लिए पूरे देश में विश्वविख्यात थे. उन्हें बनारस संगीत घराने का मजबूत स्तम्भ माना जाता था. साल 2014 में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी बने थे. पण्डित छन्नू मिश्र को ‘खेले मसाने में होली’ गीत काफी लोकप्रिय है. संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सरकार ने उन्हें पद्मश्री और फिर पद्मविभूषण अवॉर्ड से नवाजा था.

प्रशान्ति सिंह ने भी खेल की दुनिया में अपनी नई पहचान बनाई है. प्रशांति भारतीय महिला राष्ट्रीय बास्केटबॉल टीम की शूटिंग यार्ड है. साल 2019 में प्रशान्ति को पद्म अवॉर्ड से नवाजा गया. इसके अलावा उन्हें अर्जुन अवॉर्ड और रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है.

राजनीति से लेकर लेखक के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले कमलापति त्रिपाठी का भी वाराणसी से नाता रहा है. वो वाराणसी के औरंगाबाद इलाके में रहते थे. कमलापति त्रिपाठी, यूपी के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. इसके अलावा वो एक अच्छे लेखक भी थे. पंडित कमलापति त्रिपाठी ने आजादी की लड़ाई में भी अपना योगदान दिया था वो असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय थे.

ललित उपाध्याय हॉकी के फॉरवर्ड खिलाड़ी रहे हैं. भारतीय टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने दो बार उन्होंने ओलंपिक में मेडल भी हासिल किया है. टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था. वाराणसी के शिवपुर के रहने वाले ललित उपाध्याय ने फिलहाल हॉकी से संन्यास ले लिया है.