हीरो के प्यार में पागल थी हसीना, जिंदगी भर रहीं कुंवारी, अधूरी मोहब्बत के नाम किए प्राण, बनी सबसे दर्दभरी कहानी
Last Updated:
यह कहानी शोहरत, समाज, मजहबी दीवारों और टूटे सपनों के बीच पनपी उस मोहब्बत की है, जो मुकम्मल न हो सकी, लेकिन कभी खत्म भी नहीं हुई. ये कहानी दिलीप कुमार और मधुबाला, राज कपूर और नरगिस, अमिताभ बच्चन और रेखा की नहीं बल्कि उस बॉलीवुड के हिट कपल की है, जिन्होंने एक दो नहीं सात फिल्में साथ की.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में एक ऐसी हसीना भी थी, जिसकी शोहरत, आवाज और खूबसूरती के आगे हर कोई नतमस्तक था, लेकिन उसकी निजी जिंदगी सिर्फ इंतजार और तन्हाई में बीत गई. एक सुपरस्टार हीरो के प्यार में वह इस कदर डूबी कि समाज, परिवार और हालात के आगे झुकते हुए भी दिल से कभी पीछे नहीं हटी. उस दौर में जब रिश्तों पर रिवाज और मजहब भारी पड़ते थे, उसकी मोहब्बत अधूरी रह गई. हीरे की अंगूठी समुद्र में फेंकी गई, सपनों का घर टूट गया और आगे बढ़ने की हर राह बंद हो गई. इसके बाद उस हसीना ने कभी शादी नहीं की, न ही किसी और को अपनी जिंदगी में जगह दी. शोहरत की चकाचौंध के पीछे उसकी कहानी आंसुओं, खामोशी और ताउम्र इंतजार की बन गई. यही वजह है कि यह प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे दर्दभरी और यादगार दास्तानों में गिनी जाती है. जानते हैं ये बॉलीवुड की कौन से अधूरी लव स्टोरी है?

बॉलीवुड के इतिहास में कुछ लव स्टोरी ऐसी होती हैं जो दशकों बाद भी दिल को छू जाती हैं. दिलीप कुमार और मधुबाला, राज कपूर और नरगिस, अमिताभ बच्चन और रेखा जैसी कई लवस्टोरी हैं, जो आज भी सुर्खियों में हैं. ऐसी ही एक दर्दनाक और अमर कहानी है 1940-50 के दशक की सुपरस्टार सुरैया और देव आनंद की. यहां दोनों के बीच प्यार और रामोंस दोनों था, लेकिन अंत दुखद था. फाइल फोटो.

सुरैया, जो अपनी मधुर आवाज और अदाकारी से मशहूर थीं. उन्होंने कभी शादी नहीं कीं और अपनी पूरी जिंदगी देव आनंद की यादों को समर्पित कर दीं. यह प्रेम कहानी शुरू हुई 1948 में फिल्म ‘विद्या’ के सेट पर, जहां दोनों पहली बार साथ काम कर रहे थे. फिल्म की शूटिंग के दौरान गाने ‘किनारे किनारे चले जाएंगे’ के सीन में नाव पलट गई. सुरैया को तैरना नहीं आता था, वे डूबने लगीं. देव आनंद ने तुरंत पानी में कूदकर उन्हें बचा लिया. बस यहीं से प्यार की कहानी ने नींव पड़ गई. फाइल फोटो.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सुरैया ने बाद में कहा था, ‘अगर आपने आज मेरी जान नहीं बचाई होती, तो आज मेरी जिंदगी खत्म हो जाती.’ देव ने जवाब दिया, ‘अगर आपकी जिंदगी खत्म होती, तो मेरी भी खत्म हो जाती.’ यहीं से उनका प्यार शुरू हुआ, जो जल्द ही गहरा और जुनूनी बन गया. दोनों ने 1948 से 1951 तक 7 फिल्मों में साथ काम किया – ‘विद्या’, ‘जीत’, ‘शायर’, ‘अफसर’, ‘निली’, ‘दो सितारे’ और ‘सनम’. फाइल फोटो.

देव आनंद ने अपनी बायोग्राफी ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में लिखा, ‘मैं सुरैया से पहली बार सच में प्यार में पड़ा. जितना मैं उन्हें नहीं पा सका, उतना ही ज्यादा चाहने लगा.’ देव ने सुरैया को हीरे की अंगूठी देकर प्रपोज किया, जिसकी कीमत उस समय 3000 रुपये थी. जो उन्होंने दोस्तों से कर्ज लेकर खरीदी. सुरैया ने स्वीकार कर लिया, लेकिन उनकी नानी ने सख्त विरोध किया. कारण था धार्मिक अंतर… सुरैया मुस्लिम थीं (जन्म नाम सुरैया जमाल शेख), जबकि देव हिंदू. फाइल फोटो.

नानी ने धमकी दी कि अगर शादी हुई तो दोनों को गिरफ्तार करवा देंगी या देव को नुकसान पहुंचा देंगी. परिवार ने उन्हें अलग करने के लिए हर संभव दबाव बनाया. दिल टूटने की स्थिति में सुरैया ने अंगूठी समुद्र में फेंक दी. उन्होंने देव से कहा, ‘मैं तुम्हारी मौत की जिम्मेदार नहीं बनना चाहती.’ कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि देव ने खुद अंगूठी समुद्र में फेंकी. यह ब्रेकअप 1951 में हुआ और उसके बाद दोनों ने कभी साथ काम नहीं किया. फाइल फोटो.

सुरैया ने परिवार के दबाव में आकर प्यार छोड़ दिया, लेकिन कभी किसी और से शादी नहीं की. वे अकेली रहीं और 31 जनवरी 2004 को 74 साल की उम्र में मुंबई में विभिन्न बीमारियों (हाइपोग्लाइसीमिया, इस्केमिया आदि) से गुजर गईं. अंतिम दिनों में उन्होंने एक पत्र लिखा कि उन्होंने 57 साल तक हर रात देव का इंतजार किया और अगले जन्म में बिना बाधाओं वाला जीवन मांगा. फाइल फोटो.

देव आनंद भी इस प्यार को जिंदगी भर नहीं भूले. उन्होंने कहा, ‘जब मैं उन्हें दुनिया की वजह से नहीं पा सका, तो पहली बार रोया.’ 2011 में देव की मौत के बाद उनकी जेब में सुरैया की फोटो मिली, जो उनके अमर प्यार की गवाही है. हालांकि, देव ने 1954 में अपनी को-स्टार कल्पना कार्तिक से शादी की, जिनसे उनके दो बच्चे हुए. बेटा सुनील आनंद और बेटी देवीना. फाइल फोटो.