भारत का ‘सुपर शील्ड’: NSG का ये ‘हथियार’ तोड़ेगा आतंक की कमर, बम धमाकों के खिलाफ मिला सबसे बड़ा हथियार

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IED Data Centre: अमित शाह ने गुरुग्राम में राष्ट्रीय आईईडी डेटा प्रबंधन मंच लॉन्च किया, जिसे एनएसजी, आरआरयू, आईआईटी-दिल्ली, एनआईए और आई4सी ने मिलकर विकसित किया है. यह आतंकवाद के खिलाफ ढाल बनेगा. वर्ष 2000 में स्थापित एनबीडीसी के पास 1999 से देश में हुई बम विस्फोट की सभी घटनाओं का डेटाबेस है.

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भारत को मिला 'सुपर शील्ड': NSG का ये 'हथियार' तोड़ेगा आतंक की कमरएनएसजी को 1984 में बनाया गया था. (फाइल फोटो)

गुरुग्राम. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एक राष्ट्रीय डिजिटल आईईडी डेटा प्रबंधन मंच की शुरुआत की, जो ‘आतंकवाद के खिलाफ अगली पीढ़ी के सुरक्षा कवच’ के रूप में कार्य करेगा और देश में होने वाले सभी प्रकार के बम विस्फोटों के खिलाफ एक व्यापक प्रतिरोधक होगा. राष्ट्रीय आईईडी डेटा प्रबंधन प्रणाली (एनआईडीएमएस) को संघीय आतंकवाद-रोधी कमांडो बल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) द्वारा गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-दिल्ली, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की मदद से विकसित किया गया है. यह सभी प्रकार के बम विस्फोटों का ‘सटीक’ अध्ययन करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग उपकरणों से लैस है.

देश में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोटों को आंतरिक सुरक्षा क्षेत्र में ‘सबसे चुनौतीपूर्ण’ खतरों में से एक के रूप में वर्गीकृत किया गया है. इन वर्षों में आईईडी विस्फोट में हजारों नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं. केंद्रीय मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये एक लिंक के माध्यम से इस मंच का उद्घाटन किया. यह केंद्र मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) छावनी में स्थित है. मंत्री ने कहा कि एनआईडीएमएस आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ एक ‘ढाल’ और ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ के रूप में काम करेगा क्योंकि यह पुलिस, विभिन्न जांच एजेंसियों, राज्य आतंकवाद-रोधी दस्तों, एनआईए जैसी संघीय एजेंसियों तथा केंद्रीय बलों को विभिन्न प्रकार के बम विस्फोटों के तौर-तरीके और कार्यप्रणाली का विश्लेषण करने के लिए ‘व्यापक’ डेटा प्रदान करेगा.

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि यह मंच आईईडी विस्फोटों के लिए ‘एक राष्ट्र एक डेटा भंडार’ के रूप में कार्य करेगा. यह एकत्रित किए गए फॉरेंसिक साक्ष्यों की गुणवत्ता बढ़ाकर अभियोजन में तेजी लाने में मदद करेगा और अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाएगा. एनएसजी के महानिदेशक (डीजी) बी. श्रीनिवासन ने कहा कि एनआईडीएमएस एक ‘वास्तविक समय पर’ सूचना का आदान-प्रदान करने वाला मंच है, जिसे आतंकवाद-रोधी और उग्रवाद-रोधी क्षेत्र में काम करने वाली सरकारी एजेंसियों के लिए बनाया गया है. यह देश में होने वाली सभी बम विस्फोट घटनाओं पर डेटा एकत्र करेगा, उसका विश्लेषण करेगा और उसे प्रसारित करेगा. उन्होंने कहा कि यह मंच अपने आप में ‘अनोखा’ है, क्योंकि इसके प्रारंभिक चरण के दौरान 26 ‘‘मित्र’’ देशों से संपर्क किया गया था और उनके पास ऐसी कोई सुविधा नहीं थी.

एनएसजी के अनुसार, डेटाबेस में 800 उपयोगकर्ता (विभिन्न एजेंसियां) हैं और यह विभिन्न बम विस्फोट घटनाओं के बीच ‘विशेष संबंधों’ को पकड़ने, विस्फोट के बाद की जांच करने और कुछ बम विस्फोट की घटनाओं को रोकने के लिए ‘पूर्वानुमान’ विश्लेषण करने में भी सक्षम होगा. एनएसजी के अनुसार, इस डेटाबेस में 800 उपयोगकर्ता (विभिन्न एजेंसियां) हैं और यह विभिन्न बम विस्फोट घटनाओं के बीच विशिष्ट संबंध को दर्ज करने में सक्षम होगा, विस्फोट के बाद की जांच कर सकेगा और कुछ बम धमाकों को रोकने के लिए ‘पूर्वानुमान’ के आधार पर विश्लेषण करने में भी सक्षम होगा.

यह महत्वाकांक्षी परियोजना आतंकवाद-रोधी कमांडो बल ‘एनएसजी’ के राष्ट्रीय बम डेटा केंद्र (एनबीडीसी) का हिस्सा है, जो देश में हुए सभी प्रकार के बम विस्फोटों का विश्लेषण करता है, साथ ही वैश्विक स्तर पर हुए बड़े विस्फोटों का भी विश्लेषण करता है. वर्ष 2000 में स्थापित एनबीडीसी के पास 1999 से देश में हुई बम विस्फोट की सभी घटनाओं का डेटाबेस है. वर्ष 1984 में गठित एनएसजी के ‘ब्लैक कैट’ कमांडो को चुनिंदा उच्च जोखिम वाले वीआईपी (अति विशिष्ट लोगों) की सुरक्षा के अलावा विशिष्ट आतंकवाद-रोधी और अपहरण-रोधी अभियानों को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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