7 हिट गानों वाली कल्ट फिल्म, 1 भी गाना नहीं था फ्लॉप, जीते 11 अवॉर्ड्स, इस म्युजिक कंपोजर पहली बार बनाए थे गाने
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जब लोग उन फिल्मों की बात करते हैं जो दशकों बाद भी याद की जाती हैं, तो उन फिल्मों में ‘रोजा’ का नाम भी शामिल होता है. यह उन फिल्मों में से एक है जो कभी भी देख लें, रिलेवेंट लगती हैं. इसकी फीलिंग्स, कहानी और म्युजिक समय के साथ और भी बेहतर होते गए हैं. इसका सबसे बड़ा क्रेडिट मणिरत्नम की कहानी कहने के स्टाइल को जाता है.

इस पैन इंडिया फिल्म ने 90 के दशक की शुरुआत में लोगों को काफी प्रभावित किया. इस फिल्म की न सिर्फ कहानी और बल्कि म्युजिक आज भी लोगों के जुबां और दिलों-दिमाग पर चढ़ा हुआ है. फिल्म की कहानी कभी भी पुरानी नहीं लगती. साल 2023 की ब्लॉकबस्टर ‘एनिमल’ में इसके म्युजिक को रिक्रिएट किया गया, जिससे फिल्म के गाने फिर चर्चा में आए.

साल 1992 में रिलीज हुई ‘रोजा’ में अरविंद स्वामी और मधु ने लीड रोल निभाया. फिल्म तमिलनाडु के एक छोटे से गांव की एक यंग महिला की कहानी है, जिसकी जिंदगी अचानक बदल जाती है जब उसके पति को जम्मू-कश्मीर में एक सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान आतंकवादी अगवा कर लेते हैं. कहानी उसके संघर्ष पर केंद्रित है कि वह अपने पति को कैसे वापस लाती है. इसमें प्यार, डर और उम्मीद की भावनाएं भरी हुई हैं. राजनीति भी कहानी में आती है, लेकिन मानवीय भावनाओं पर हावी नहीं होती.

‘रोजा’ मणिरत्नम की प्रसिद्ध पॉलिटिकल ट्रिलॉजी की शुरुआत भी थी. इसके बाद ‘बॉम्बे’ (1995) और ‘दिल से..’ (1998) आईं. इन सभी फिल्मों में देश के तनावपूर्ण समय में रिश्तों को दिखाया गया है. मधु का किरदार फिल्म का दिल था. उनकी एक्टिंग ने दर्शकों को फिल्म से जुड़ने में आसान बना दिया. फिल्म ने दिखाया कि आम लोग बड़े संघर्षों के असर को कैसे झेलते हैं.
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कहानी के अलावा, ‘रोजा’ ने अपने संगीत से भारतीय सिनेमा को पूरी तरह बदल दिया. अगर ‘रोजा’ नहीं होती, तो शायद दुनिया ए.आर. रहमान से कभी नहीं मिल पाती, जिन्होंने बाद में भारत और दुनिया भर में संगीत की परिभाषा बदल दी. यह फिल्म उनका डेब्यू थी और हर गाने ने मानवीय भावनाओं को बखूबी उभारा. क्या आप जानते हैं कि मणिरत्नम ने अपने लंबे समय के साथी इलैयाराजा की जगह ए.आर. रहमान को चुनकर बड़ा रिस्क लिया था? उस समय यह बड़ा जोखिम था, लेकिन यह दांव शानदार रहा. इस फिल्म के संगीत ने भारतीय फिल्मी गानों का स्तर ही बदल दिया.

‘रोजा’ का साउंडट्रैक कई भाषाओं में रिलीज हुआ था. इसमें तमिल और हिंदी में सात-सात गाने थे. इसके अलावा तेलुगु, मलयालम और मराठी में भी वर्जन आए. एक इंस्ट्रूमेंटल एलबम भी अलग से रिलीज हुआ. इस तरह संगीत देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा. हर गाने की अपनी अलग पहचान थी. पूरा एलबम शुरू से अंत तक यादगार रहा.

‘रोजा’ के गाने आज भी फिल्म को जिंदा रखते हैं. ‘चिन्ना चिन्ना आसाई’ या हिंदी में ‘छोटी सी आशा’, जिसे मिन्मिनी ने गाया, छोटे सपनों और खुशियों की बात करता है और इसके लिए उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला. ‘रुक्कुमणि रुक्कुमणि’, जिसे एस.पी. बालासुब्रमण्यम और के.एस. चित्रा ने गाया, एक जोशीला फोक-स्टाइल गाना है, वहीं देशभक्ति से भरा ‘तमिझा तमिझा’ या हिंदी में ‘भारत हमको जान से प्यारा है’, जिसे हरिहरन ने गाया, गर्व का अहसास कराता है.

लेकिन जो गाना सबसे ऊपर है, वह है रोमांटिक डुएट ‘पुधु वेल्लै मझाई’, हिंदी में ‘ये हसीन वादियां’. तमिल में इसे उन्नी मेनन और सुजाता ने गाया, हिंदी में एस.पी. बालासुब्रमण्यम और के.एस. चित्रा ने. यह गाना भावुक भी है और सपनों जैसा भी. और यही वजह है कि गाने के खूबसूरत दृश्यों के कारण यह जगह हनीमून कपल्स के लिए भी खास मानी जाती है.

ए.आर. रहमान के ‘रोजा’ के संगीत को जबरदस्त पहचान मिली. उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. इसके अलावा फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर (तमिल) भी मिला. तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड भी जल्द ही मिला. डेब्यू प्रोजेक्ट के लिए इतनी पहचान मिलना बहुत दुर्लभ था. इससे साफ हो गया कि भारतीय सिनेमा में एक नया संगीतकार आ गया है. बाद में रहमान ने ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के ‘जय हो’ गाने और बेस्ट ओरिजिनल स्कोर के लिए दो ऑस्कर भी जीते.

‘रोजा’ के संगीत का असर भारत से बाहर भी गया. 2005 में टाइम मैगजीन ने इसके साउंडट्रैक को ’10 बेस्ट साउंडट्रैक्स’ में शामिल किया. यह लिस्ट फिल्म क्रिटिक रिचर्ड कॉर्लिस ने बनाई थी. ‘रोजा’ को ‘सिटिजन केन’ जैसी विश्व प्रसिद्ध फिल्मों के साथ जगह मिली. इससे रहमान के डेब्यू को इंटरनेशनल पहचान मिली.

म्युजिक के अलावा, ‘रोजा’ को फिल्ममेकिंग और एक्टिंग के लिए भी खूब सराहा गया. इसे नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट फीचर फिल्म ऑन नेशनल इंटीग्रेशन के लिए ‘नरगिस दत्त अवॉर्ड’ मिला. फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ में इसे बेस्ट फिल्म (तमिल) का अवॉर्ड मिला. तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स में भी फिल्म ने कई बड़े अवॉर्ड्स जीते. ‘रोजा’ को मास्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी नॉमिनेशन मिला. बाद में यह इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के इंडियन पैनोरमा सेक्शन में भी दिखाई गई. कुल मिलाकर, फिल्म ने 11 अवॉर्ड्स अपने नाम किए.