₹78217 करोड़ की मिसाइल डिफेंस डील, Su-30MKI और MiG-29K जैसे फाइटर जेट बनेंगे महाबली, इधर बटन दबा, उधर लाहौर साफ – india Israel rupees 782179155000 missile package deal su30mki mig29 MiG29K fighter jet SPICE 1000 precision guided bomb iaf

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IAF Missile Deal: भारत का डिफेंस सेक्‍टर अभी भी मुख्‍य रूप से विदेशी खरीद पर निर्भर है. पिछले कुछ सालों में इसमें काफी बदलाव आया है. ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के सूत्र के साथ देश आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि अब भारत भी एक महत्‍वपूर्ण हथियार विक्रेता देश बनता जा रहा है. आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं. भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्‍तान तो पूर्वी सीमा पर चीन स्थित है. इन दोनों देशों का रुख भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है. अतीत में हुए युद्ध इसकी गवाही देते हैं. ऐसे में भारत के लिए एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी करना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोस्‍त और दुश्‍मन की पहचान और भी स्‍पष्‍ट हो चुकी है. बदले सामरिक माहौल को देखते हुए भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत और अपडेट करना शुरू कर दिया है. आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को महाबली बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है. नेवी में अब हर 6 सप्‍ताह के बाद एक युद्धपोत को शामिल करने की प्‍लानिंग है तो वहीं आर्मी ड्रोन फ्लीट बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है. एयरफोर्स के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर एयर टू एयर और एयर टू सर्फेस मिसाइल को बेड़े में शामिल किया जा रहा है. प्रिसीजन गाइडेड बम की खरीद भी चल रही है. इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट के तहत देश को किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से सुरक्षित करने पर लगातार काम चल रहा है. इन सबके बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. भारत मित्र देश इजरायल से कटिंग एज वेपन, मिसाइल और बम खरीदने के लिए बड़ी डील करने की तैयारी में है. इनमें से कुछ मिसाइल की रेंज 300 से 400 किलोमीटर तक है. मतलब घर बैठे बटन दबाते ही लाहौर में तबाही लाई जा सकती है. लाहौर भारतीय सीमा के करीब स्थित बड़ा शहर है.

जानकारी के अनुसार, भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग एक नए और अहम दौर में प्रवेश कर रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए भारत इजरायल से लगभग 8.7 अरब डॉलर (₹78217 करोड़) की डिफेंस डील करने की तैयारी में है. इस पैकेज में अत्याधुनिक SPICE-1000 प्रिसिजन गाइडेड बम, रैम्पेज मिसाइल, एयर लोरा (Air LORA) और आइस ब्रेकर (Ice Breaker) जैसी आधुनिक मिसाइलें शामिल हैं. इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है. यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत को अपनी सीमाओं पर कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की उन्नत एयर डिफेंस तैनाती है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से GPS जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल देखा गया है, खासकर मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान. ऐसे में भारत की यह खरीद उसकी रणनीतिक जरूरतों को दर्शाती है. आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत भारत को गया, जिससे भारत इजरायल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार बन गया है. इस नए पैकेज में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर मिसाइलें, लोइटरिंग म्यूनिशन, आधुनिक रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम भी शामिल हैं.

इजरायल से मॉडर्न वेपन सिस्‍टम खरीदने के बाद Su-30MKI और MiG-29K जैसे फाइटर जेट और भी घातक हो जाएंगे. (फाइल फोटो/Reuters)

रैम्पेज मिसाइल: भरोसेमंद वेपन

रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास मौजूद है. यह मिसाइल Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे विमानों से दागी जा सकती है. करीब 570 किलो वजनी यह मिसाइल GPS/INS गाइडेंस से लैस है और इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है. रैम्पेज का इस्तेमाल दुश्मन के एयरबेस, बंकर, कंट्रोल टावर और लॉजिस्टिक ठिकानों पर दूर से हमला करने के लिए किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर इसकी प्रभावशीलता देखी गई थी.

एयर LORA: दूर से सटीक वार

एयर लोरा एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से दागी जाने वाली LORA मिसाइल का उन्नत रूप है. यह मिसाइल पहले से भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और IAI के सहयोग से बनाई जा रही है. यह मिसाइल 400 से 430 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला कर सकती है और इसकी सटीकता इतनी ज्यादा है कि इसका CEP (त्रुटि सीमा) 10 मीटर से भी कम है. लगभग 1600 किलो वजनी यह मिसाइल मैक-5 की रफ्तार (6000 KMPH से ज्‍यादा की स्‍पीड) से उड़ती है और दुश्मन के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य अड्डों को नष्ट करने में सक्षम है.

इजरायल से खरीदे जाने वाली कुछ मिसाइल की मारक क्षमता इतनी है कि घर में बैठकर बटन दबाने से लाहौर में तबाही लाई जा सकती है. (फाइल फोटो/Reuters)

आइस ब्रेकर: इलेक्ट्रॉनिक वॉर में भी असरदार

राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित आइस ब्रेकर मिसाइल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह मिसाइल 400 किलो से कम वजनी है और करीब 300 किलोमीटर तक कम ऊंचाई पर उड़कर हमला कर सकती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, ऑटोमैटिक टारगेट रिकग्निशन और ऐसे सेंसर लगे हैं, जो GPS न होने पर भी लक्ष्य को पहचान सकते हैं. इसकी स्टील्थ डिजाइन और कम रडार पहचान क्षमता इसे दुश्मन की मजबूत एयर डिफेंस से बचाकर लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती है.

टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर पर क्‍या रूख?

इस सौदे की सबसे अहम बात यह है कि 2025 के अंत में पूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पर सहमति बन चुकी है. इसके तहत BEL और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत में ही एयर लोरा और आइस ब्रेकर मिसाइलों का निर्माण करेंगी. HAL विमानों में आइस ब्रेकर के एकीकरण का काम संभालेगी, जबकि BEL इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम पर काम करेगी. इसमें DRDO की तकनीकी विशेषज्ञता भी शामिल होगी, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी.

एयरफोर्स की ताकत में कितना इजाफा?

इन आधुनिक हथियारों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की डीप-स्ट्राइक क्षमता काफी बढ़ेगी. इससे न सिर्फ दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर दूर से हमला संभव होगा, बल्कि पायलटों का जोखिम भी कम होगा. साथ ही तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान भी ज्यादा प्रभावी बनेंगे. करीब 20 अरब डॉलर के एयरोस्पेस पैकेज का हिस्सा माने जा रहे इस प्रस्ताव को 2026 के मध्य तक कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इसके बाद भारत इन हथियारों का निर्यात इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मित्र देशों को भी कर सकता है. कुल मिलाकर यह सौदा भारत की सैन्य ताकत, रणनीतिक आत्मनिर्भरता और इज़राइल के साथ गहरे होते रक्षा संबंधों का स्पष्ट संकेत है.

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