लेख पढ़कर और तैयार होकर आएं…सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्‍यों कहा ऐसा? दिए बड़े संकेत – supreme court stray dogs what 3 judge bench ask to do which big indication given

Share to your loved once


Last Updated:

Stray Dog News: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर ढाई घंटे सुनवाई हुई. कोर्ट ने कुत्तों के बिहेवियर को लेकर चर्चा की. बेंच ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्यों ने जो आंकड़े दिए हैं, उनमें से किसी ने यह नहीं बताया कि नगर पालिकाओं की तरफ से कितने शेल्टर चलाए जाते है. देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं. इनमें से हर एक में 100 कुत्ते रह सकते हैं.

लेख पढ़कर और तैयार होकर आएं...सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्‍यों कहा ऐसा?सुप्रीम कोर्ट में 8 जनवरी 2025 को आवारा कुत्‍तों से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई. (फोटो: PTI)

Stray Dog News: सुप्रीम कोर्ट में देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुनवाई एक बार फिर शुरू हो गई है. इस संवेदनशील और व्यापक मुद्दे पर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ सुनवाई कर रही है. अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि समस्या कानूनों की कमी की नहीं, बल्कि उनके सही और प्रभावी क्रियान्वयन की है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खास तौर पर संस्थागत परिसरों (जैसे अदालतों, स्कूलों और अस्पतालों) में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल उठाया. पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने पूछा था कि क्या इन जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी स्वीकार्य होनी चाहिए और प्रशासन द्वारा एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों का पालन न करने की कीमत आम नागरिकों को क्यों चुकानी पड़ रही है. इस दौरान बेंच ने एक अखबार में पब्लिश आर्टिकल का हवाला देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में इस लेख को पढ़कर और तैयार होकर आएं.

देश के वरिष्ठ वकील और पशु अधिकारों के विशेषज्ञ के. वेणुगोपाल ने अदालत में स्पष्ट कहा कि अस्पताल के वार्डों में कुत्तों की मौजूदगी किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि अस्पतालों के वार्ड में कुत्ते नहीं हो सकते, लेकिन समस्या यह है कि अब तक वैधानिक नियमों को लागू करने की इच्छाशक्ति ही नहीं दिखाई गई.’ वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) की ओर से जारी एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) उनके अपने नियमों का ही उल्लंघन करती है. उन्होंने कोर्ट के सामने इस समस्या के आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं को भी रखा. वेणुगोपाल के अनुसार, यदि मौजूदा प्रस्तावित मॉडल को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो इसका अनुमानित खर्च करीब 26,800 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इसके लिए देशभर में करीब 91,800 नए शेल्टर बनाने होंगे. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि हर जिले में एक एबी (एनिमल बर्थ) सेंटर बनाया जाए, तो इसकी लागत लगभग 1,600 करोड़ रुपये आएगी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नियमों को लागू करने के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट बजटीय आवंटन नहीं है.

क्‍या दिए सुझाव?

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट ने यह भी सुझाव दिया कि इस मुद्दे से निपटने के लिए केंद्र सरकार के कम से कम पांच मंत्रालयों को मिलकर काम करना चाहिए और एक सिंगल नोडल एजेंसी बनाई जानी चाहिए ताकि नीति, बजट और क्रियान्वयन में तालमेल सुनिश्चित हो सके. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि अब शेष चार राज्यों ने भी अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं. उनके अनुसार, अब तक 16 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन कर लिया है, जबकि 7 राज्य अब भी पीछे हैं. वहीं, वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने पशु कल्याण बोर्ड की एसओपी पर सवाल उठाते हुए बताया कि चार बड़े राज्यों ने इस पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कुत्तों को अचानक और बिना वैज्ञानिक योजना के हटाया गया, तो इससे चूहों जैसे अन्य रोगवाहक जानवरों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के नए खतरे पैदा हो सकते हैं. इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से हर कुत्ते को हटाने का निर्देश कभी नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि कुत्तों से जुड़े मामलों को नियमों और कानून के तहत ही संभाला जाना चाहिए, न कि किसी अतिवादी या अव्यवहारिक तरीके से.

कोर्ट ने क्‍या दिया संकेत?

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह संकेत भी दिया कि असली समस्या कानूनों या नियमों की नहीं, बल्कि उनके जमीनी स्तर पर पालन की है. कोर्ट ने माना कि यदि मौजूदा नियमों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है. इसी बीच पीठ ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर कुछ देर बाद फिर से बैठेगी, ताकि सभी पक्षों की दलीलों पर गहराई से विचार किया जा सके. आज की सुनवाई के अंत में जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि अगली सुनवाई में सभी वकीलों से अनुरोध किया जाएगा कि वे 29 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित लेख ‘दुनिया की छत पर, जंगली कुत्ते लद्दाख की दुर्लभ प्रजातियों का शिकार कर रहे हैं’ को पढ़कर आएं. कोर्ट ने संकेत दिया कि आवारा और जंगली कुत्तों के पर्यावरण और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई आज पूरी हो गई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी और देशव्यापी नीति व क्रियान्वयन को लेकर अहम दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

homenation

लेख पढ़कर और तैयार होकर आएं…सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्‍यों कहा ऐसा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP