गाजियाबाद: 312 परिवारों का ‘अपना घर’ का सपना सच, PMAY लॉटरी में निकले भाग्यशाली नाम, छलक आए खुशी के आंसू
Ghaziabad News: बरसों से आंखों में संजोया ‘अपना घर’ का सपना हकीकत की दहलीज तक जा पहुंचा. फटेहाल आंचल में उम्मीद की पर्चियां थामे बैठे उन बुजुर्गों और महिलाओं के लिए कल का सूरज खुशियों की नई किरण लेकर आया, जो अब तक किराए के कमरों या फुटपाथों पर अपनी जिंदगी काट रहे थे. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के हॉल में जब लॉटरी के ड्रम से उनके नाम की पर्ची निकली, तो किसी के हाथ दुआ में उठ गए तो किसी की बूढ़ी आंखों से सुकून के आंसू बह निकले.
हिंदी भवन में गूंजी तालियां, छलक आए खुशी के आंसू
लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में आयोजित इस लकी ड्रॉ के दौरान माहौल बेहद भावुक और उत्साहजनक रहा. जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह और वित्त नियंत्रक अशोक कुमार वाजपेयी की मौजूदगी में जब लॉटरी की प्रक्रिया शुरू हुई, तो हॉल में बैठे आवेदकों की धड़कनें तेज थीं. जैसे-जैसे नामों की घोषणा हुई, कई बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में सुकून के आंसू छलक आए. डासना में ‘अराध्यम बिल्डर्स’ द्वारा विकसित इस योजना में भाग्यशाली विजेताओं को उनके मकान नंबर मिल गए हैं.
कब्जे के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार
हालांकि आवंटन हो चुका है, लेकिन लाभार्थियों को फिजिकल पजेशन (कब्जा) मिलने में थोड़ा समय लगेगा. इसका मुख्य कारण प्रोजेक्ट साइट पर चल रहे ‘एक्सटर्नल डेवलपमेंट’ के कार्य हैं. सोसाइटी के बाहर की सड़कें, स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज सिस्टम जैसे बुनियादी ढांचे का काम अभी अंतिम चरण में है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं शत-प्रतिशत पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आवंटियों को शिफ्ट करना संभव नहीं होगा.
जीडीए सचिव का भरोसा: जल्द शुरू होगी रजिस्ट्री
आवंटियों की चिंता दूर करते हुए जीडीए सचिव विवेक मिश्रा ने बताया कि घबराने की जरूरत नहीं है. विभाग अगले कुछ ही दिनों में फ्लैट्स की रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है. शासन की ओर से भी स्पष्ट निर्देश हैं कि फिनिशिंग का काम युद्धस्तर पर पूरा कर जल्द से जल्द चाबियां सौंपी जाएं.
आंकड़ों में समझें प्रोजेक्ट की स्थिति
हालिया समीक्षा बैठक के अनुसार, जीडीए अपनी पांच प्रमुख योजनाओं- मधुबन बापूधाम, डासना, प्रताप विहार, नूरनगर और निवाड़ी में कुल 3,496 मकान बना रहा है. इसके अतिरिक्त, निजी बिल्डरों के सहयोग से 6,481 मकानों का निर्माण कार्य प्रगति पर है. सरकार द्वारा मिलने वाले अनुदान के कारण ये मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बेहद किफायती और मददगार साबित हो रहे हैं.