मजे से चबा रहा था च्यूइंगम, फिर आया ऐसा फैसला, सुनते ही पसीने से लथपथ हुआ दरिंदा, लड़खड़ाते हुए गिरा फर्श पर

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एक 6 साल की बच्ची स्कूल से घर जाने के लिए निकली थी. उसे क्या पता था कि अगले पल ही उसके साथ क्या होने वाला है. स्कूल बैग पीठ पर, हाथ में बोतल और चहकती खिलखिलाती घर जाती बच्ची अपनी मां से मिलने के लिए एक्साइटेड थी. सोच रही थी घर जाकर खेलूंगी. पर तभी एक हैवान-दरिंदे से उसकी मुलाकात हो गई. उसे लगा अंकल कितने प्यारे हैं जो उसे टॉफी दिलाने की बात कह रहे हैं. पर यही अंकल था, जिसने उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी. आज वो बच्ची रातों में चीखती है, दर्द से तड़पती है… उसे तो यह तक नहीं पता उसका कसूर क्या था. हालांकि, आज उसे कानून से तो न्याय मिला है. उस दरिंदगे को मौत की सजा सुनाई गई है.

जीभ कटी, शरीर पर काटने के निशान और…

मामला है 25 जुलाई 2025 का. कालिंजर थाना क्षेत्र के महोरछा गांव में अमित रैकवार नाम के शख्स ने स्कूल से लौट रही बच्ची को दो रुपये की टॉफी का लालच देते हुए 10 रुपये का नोट देकर गुटका मंगाने के लिए अपने घर बुलाया और हैवानियत की हदें पार कर दीं थीं. बच्ची के शरीर पर काटने के निशान और गंभीर चोटें थीं. यहां तक कि मासूम की कटी जीभ आरोपी के घर के नाली में पुलिस को मिली थी. मेडिकल कालेज में डॉक्टरों ने दुष्कर्म पीड़िता का प्राथमिक उपचार कर देर रात ही कानपुर के लिए रेफर कर दिया था, जहां पर उसकी तीन सर्जरी की गई थीं. वहीं 17-18 वर्ष की आयु पूरी करने पर बच्चेदानी की सर्जरी भी कराई जाएगी.

56 दिनों तक चली सुनवाई

पुलिस ने वारदात के बाद ही देर रात अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया था. तीन दिन बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था. सात अक्तूबर 2025 को कालिंजर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा छह और भारतीय नवीन दंड संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमा शुरू हुआ. कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 10 गवाह पेश किए गए. इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले तीन डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक, डीएनए, मेडिकल रिपोर्ट और बीएनएसएस की धारा 180 व 183 के तहत दर्ज बयान शामिल थे. इन सभी सबूतों ने आरोपी को पुख्ता तौर पर दोषी साबित किया. पिता का कहना है कि बच्ची अब स्कूल नहीं जाती, रातों को चीखती है. घटना की यादें अभी भी परिवार को सताती हैं.

बेफिक्र था दरिंदा, फिर मिल गई सजा

अब जब यूपी के बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) में आज सजा सुनाई जा रही थी, तब अमित को लग रहा था, जैसे वो बच जाएगा. एकदम बेपरवाह खड़ा हुआ था. दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के दौरान वह मजे से च्यूइंगम चबाता रहा था, मानो उसे आने वाले फैसले की गंभीरता का अंदाजा ही न हो. मगर, जैसे ही जज ने मृत्यु दंड का फैसला सुनाना शुरू किया तो उसे पसीना आने लगा. बार-बार कहने लगा साहब मैंने कुछ नहीं किया. मैं तो था ही नहीं घर पर. मगर, जज ने एक न सुनी. धीरे-धीरे अमित के हाथ-पांव कांपने लगे. लड़खड़ाते हुए फर्श पर जा गिरा. अब उसके पिता बाबूलाल ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है.

क्या बोले जज साहब?

इस पूरे मामले में यूपी के बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है. उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ. न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी को मरते दम तक फंदे से लटका कर रखा जाए. इसके बाद उन्होंने कलम की निब तोड़ दी. न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है.

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