Delhi ki Thag Hasiana | कहानी दिल्ली की ठग हसीना की, एक मकान को 2 बार बेचकर ठगे 16 लाख, अब क्राइम ब्रांच कर रही खातिरदारी | delhi police crime branch arrest woman mehnaz from daryaganj who sold a house twice and defrauded her of Rs 16 lakh cheating case
नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) ने नए साल की शुरुआत में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक शातिर महिला जालसाज को गिरफ्तार किया है. यह महिला कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक घोषित अपराधी थी, जो पिछले काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अपनी पहचान छिपाए बैठी थी. इस गिरफ्तारी के साथ ही 16.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी के एक पेचीदा मामले का पटाक्षेप हो गया है.
राजधानी दिल्ली में अपराध की दुनिया के खिलाड़ी चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन कानून की नजरों से बच पाना उनके लिए नामुमकिन होता है. साल 2023 में दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में एक चर्चित मामला सामने आया था. एक महिला, जिसकी पहचान मेहनाज के रूप में हुई है, उसने एक बेहद शातिर तरीके से धोखाधड़ी की साजिश रची. मेहनाज ने एक मकान बेचने के नाम पर शिकायतकर्ता को अपने झांसे में लिया. पीड़ित व्यक्ति को मकान पसंद आ गया और दोनों पक्षों के बीच सौदेबाजी हुई. इस सौदे के एवज में मेहनाज ने पीड़ित से बयाना के तौर पर कुल 16,50,000 रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली.
पीड़ित को उस वक्त गहरा झटका लगा जब उसे बाद में पता चला कि जिस मकान के लिए उसने अपनी मेहनत की कमाई मेहनाज को सौंपी थी, वह मकान तो पहले ही किसी और को बेचा जा चुका था. मेहनाज ने एक ही संपत्ति को दो अलग-अलग लोगों को बेचकर बड़ी ठगी की थी. जब शिकायतकर्ता ने अपने पैसे वापस मांगे, तो मेहनाज ने अपनी असली रंगत दिखानी शुरू कर दी. उसने न केवल पैसे लौटाने से इनकार किया, बल्कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपना ठिकाना ही बदल लिया.
फरारी और भगोड़ा घोषित होने का सफर
पीड़ित की शिकायत पर दिल्ली के आदर्श नगर थाने में धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने मेहनाज को जांच में शामिल होने के लिए कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देती रही. वह अपने स्थायी पते को छोड़कर गायब हो गई थी. पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद जब वह हाथ नहीं आई, तो साल 2024 में रोहिणी कोर्ट की न्यायाधीश गरिमा जिंदल ने उसे कानूनी तौर पर ‘घोषित अपराधी’ करार दे दिया. इसके बाद जनवरी 2025 में स्थानीय पुलिस द्वारा उसके खिलाफ पीओ चार्जशीट भी दाखिल की गई.
क्राइम ब्रांच का बिछाया जाल और गिरफ्तारी
भगोड़ों को पकड़ने का जिम्मा संभाल रही क्राइम ब्रांच की टीम लगातार मेहनाज की तलाश में जुटी थी. 1 जनवरी 2026 को एएसआई प्रेमपाल सिंह को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली कि मेहनाज पुरानी दिल्ली के इलाके में छिपी हुई है. सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव के निर्देशन और एसीपी संजय कुमार नागपाल की देखरेख में एक विशेष छापेमारी टीम तैयार की गई. इस टीम में इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी और रोबिन त्यागी के नेतृत्व में कई अनुभवी अधिकारी और महिला कांस्टेबल शामिल थीं.
पुलिस ने ढूढा सटीक निशाना
तकनीकी निगरानी और मानवीय इनपुट की मदद से मेहनाज का सटीक ठिकाना ढूंढ निकाला गया. वह पुरानी दिल्ली के दरियागंज स्थित ‘कूचा दक्षिणी राय’ की घनी आबादी वाले इलाके में एक किराए के मकान में अपने पति और बेटे के साथ रह रही थी. पुलिस टीम ने घेराबंदी की और उसे रंगे हाथों धर दबोचा. मेहनाज ने सोचा था कि पुरानी दिल्ली की भीड़भाड़ वाली गलियों में वह आसानी से गुमनाम जिंदगी जी लेगी, लेकिन क्राइम ब्रांच की सतर्कता ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया.
आरोपी का प्रोफाइल और भविष्य की कार्रवाई
मेहनाज मूल रूप से पुरानी दिल्ली की ही रहने वाली है और उसने हाईस्कूल तक पढ़ाई की है. साल 2023 में जब उसने ठगी की इस वारदात को अंजाम दिया था, तब वह आजादपुर इलाके में रह रही थी. उसका एक 6 साल का बेटा भी है. गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आदर्श नगर थाने के जांच अधिकारी ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस तरह की गिरफ्तारियों से समाज में एक कड़ा संदेश जाता है कि धोखाधड़ी करने वाले और कानून से भागने वाले अपराधी अंततः पकड़े ही जाएंगे. पुलिस अब इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि क्या मेहनाज ने इसी तरह से किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना शिकार बनाया है.