Shakuni dice secret। महाभारत के पासों की कहानी,
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Shakuni Dice Mystery: शकुनि के पासे केवल खेल का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उनमें उसकी शक्ति और चालाकी छुपी थी. मृत्यु के बाद भगवान कृष्ण ने उन्हें नष्ट किया, लेकिन जल के संपर्क में पासे फिर से सक्रिय हो गए. कलयुग में जुए का खेल अभी भी उन्हीं पासों की शक्ति से जुड़ा माना जाता है.
क्या हुआ शकुनि के पासों का?Shakuni Dice Mystery: महाभारत में शकुनि का नाम आते ही उसके पासों की चर्चा भी होती है. यह केवल कोई खेल नहीं थे, बल्कि उनके मायावी पासों ने पांडवों और कौरवों के जीवन में एक बड़ा मोड़ पैदा किया. शकुनि के पासों में छुपा था एक ऐसा रहस्य जो महाभारत युद्ध तक के घटनाक्रम को प्रभावित करता रहा. कहते हैं कि शकुनि ने अपनी तंत्र विद्या और अपने माता-पिता की हड्डियों से इन पासों को बनाया था. इनके कारण ही पांडवों ने चौसर में हार का सामना किया, द्रौपदी दांव पर लगी और अंततः 13 साल तक वनवास सहना पड़ा, लेकिन सवाल यह है कि शकुनि की मृत्यु के बाद उसके पासों का क्या हुआ? क्या वे नष्ट हो गए या फिर उनका मायावी रूप अभी भी किसी न किसी रूप में जीवित है? इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कैसे शकुनि के पासे बने, उनकी विशेषता क्या थी और उनके मायावी पासों का राज आखिरकार किस तरह खुला.
शकुनि के पासों का निर्माण कैसे हुआ
महाभारत के ग्रंथों में पासों के निर्माण की पूरी कहानी नहीं बताई गई है, लेकिन अन्य पुराण और कथाओं में इसका विवरण मिलता है. शकुनि की बहन गांधारी का विवाह अंधे राजा धृतराष्ट्र से हुआ. इस विवाह ने शकुनि के मन में गहरी चोट और क्रोध पैदा किया. शकुनि ने अपनी घृणा को शक्ति में बदलते हुए पहले कौरव वंश का विनाश करने की योजना बनाई. उन्होंने कौरवों को पांडवों से अलग करने और ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन को राजा बनाने का षड्यंत्र रचना शुरू किया. इसी क्रम में उन्होंने अपने माता-पिता की हड्डियों और तंत्र विद्या के सहारे मायावी पासों का निर्माण किया. ये पासे केवल खेल का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उनमें शकुनि की शक्ति और इशारों का प्रभाव छुपा था. हर बार जब शकुनि पासे फेंकता था, अंक उसके अनुसार ही आते थे. इस कारण पांडवों का राजपाट हारना तय था.
शकुनि के पासों की खासियत
शकुनि के पासों में छिपा रहस्य था उनका मायावी स्वभाव. इन पासों को शकुनि ने इस तरह बनाया था कि वे हमेशा उसके इशारों के अनुसार ही चलते थे. चौसर के खेल में ये पासे पांडवों को लगातार हारते हुए दिखाते थे. सिर्फ भगवान श्री कृष्ण ही जानते थे कि ये पासे केवल शकुनि की शक्ति से ही नियंत्रित थे. यही कारण है कि महाभारत में पांडवों की हार और द्रौपदी के अपमान का कारण सीधे तौर पर शकुनि के पासों से जुड़ा हुआ था.
शकुनि की मृत्यु के बाद पासों का क्या हुआ
महाभारत युद्ध के दौरान जब सहदेव ने शकुनि का वध किया, तब पांडव उसके शिविर पहुंचे. वहां कौरवों ने पासों को खोजने की पूरी कोशिश की, ताकि उन्हें नष्ट किया जा सके, लेकिन यह संभव नहीं हुआ. दरअसल, भगवान कृष्ण ने पहले ही पासों को अपने हाथों से मसलकर राख कर दिया था. शकुनि के पासे इतने मायावी थे कि वे जल के संपर्क में आते ही अपने पुराने रूप में वापस आ जाते थे. जब पासों की राख अर्जुन के हाथ लगी, तो उन्होंने उसे समुद्र में बहा दिया. जल में जाकर पासे फिर से जीवित हो गए और कलयुग में पहले कलयुगी व्यक्ति के हाथ में पहुंचे. इसके बाद जुआ और पासे का खेल लगातार चलता रहा. आज भी माना जाता है कि कलयुग में जुए का खेल उसी शकुनि के पासों की शक्ति से प्रभावित है.
शकुनि के पासों का रहस्य और सीख
शकुनि के पासों ने महाभारत के कई प्रमुख घटनाक्रम को प्रभावित किया. यह केवल एक खेल का माध्यम नहीं थे, बल्कि उसमें छुपा था विश्वासघात, चालाकी और शक्ति का खेल. पासों का रहस्य यह सिखाता है कि इंसान की लालच और चालाकी कितनी विनाशकारी हो सकती है. शकुनि ने तंत्र विद्या से पासे बनाए और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित किया. मृत्यु के बाद भी उनका प्रभाव खत्म नहीं हुआ. यह कहानी आज भी हमें यह याद दिलाती है कि न सिर्फ मनुष्य, बल्कि उसके कर्म और वस्तुएं भी समय के साथ अपने प्रभाव को छोड़ती नहीं हैं.
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मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें