सगे भाई का हत्यारा, भेष बदलकर रह रहा था गुरुग्राम में, दिल्ली पुलिस ने आधी रात को ऐसे कर दिया ‘सर्जिकल स्ट्राइक | delhi police arrests bhim mahto | resident of bihar person | gurugram news | delhi murder case 1999
नई दिल्ली. ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं’, यह कहावत दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर सच साबित कर दिया है. पुलिस ने एक ऐसे खूंखार अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने 25 साल पहले अपने ही सगे भाई का कत्ल कर दिया था. अदालत ने उम्रकैद की सजा मुकर्रर की थी, लेकिन बाद में कानून को चकमा देकर फरार हो गया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान भीम महतो के रूप में हुई है, जो साल 1999 से चल रहे एक मर्डर केस में जमानत के बाद फरार घोषित था. दिल्ली पुलिस की नबी करीम थाना टीम ने हरियाणा के गुरुग्राम में एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर इस भगोड़े को दबोचने में कामयाबी हासिल की है. लेकिन किस तरह से इस शख्स की गिरफ्तारी हुई है, यह दिल्ली पुलिस की समर्पण का बड़ा उदाहरण है.
यह पूरी कहानी साल 1999 में शुरू हुई थी, जब दिल्ली के नबी करीम इलाके में भीम महतो ने अपने सगे भाई किशन महतो की बेरहमी से हत्या कर दी थी. मामूली विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि भीम ने खून के रिश्तों को तार-तार कर दिया. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर भीम को गिरफ्तार किया था. साल 2002 में तीस हजारी कोर्ट ने उसे हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई थी. हालांकि, जेल में कुछ समय बिताने के बाद भीम महतो ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की और उसे कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई.
भाई ही बना भाई का काल
करीब दो दशकों तक यह मामला कोर्ट में चलता रहा. इस दौरान भीम महतो बाहर ही था. 30 अक्टूबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा. अदालत ने भीम को आदेश दिया कि वह 5 नवंबर 2025 तक जेल प्रशासन के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दे. लेकिन, भीम महतो के मन में कुछ और ही चल रहा था. सजा के डर से वह सरेंडर करने के बजाय अंडरग्राउंड हो गया. जब वह तय समय पर जेल नहीं पहुंचा, तो ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया.
डिजिटल फुटप्रिंट्स ने खोला राज
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी निधिन वल्सन (IPS) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया. पहाड़गंज के एसीपी सौरभ ए. नरेंद्र और नबी करीम के एसएचओ इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह के नेतृत्व में एसआई नीरज राठी, हेड कांस्टेबल महेश और हेड कांस्टेबल जगसोरन की टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की. पुलिस के पास भीम महतो का कोई ताजा सुराग नहीं था. टीम ने सबसे पहले बिहार स्थित उसके पैतृक गांव में छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया.
आधी रात को गुरुग्राम में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
टीम ने भीम महतो के पिछले कुछ महीनों के डिजिटल फुटप्रिंट्स, फोन कॉल्स और दिल्ली-एनसीआर में उसके संभावित ठिकानों का गहन विश्लेषण किया. जांच में पता चला कि वह अपनी पहचान छिपाकर हरियाणा के गुरुग्राम इलाके में रह रहा है. 2 जनवरी 2026 की रात, दिल्ली पुलिस को एक पुख्ता खुफिया जानकारी मिली कि भीम महतो गुरुग्राम के सेक्टर 17 स्थित सुखराली एन्क्लेव में छिपा हुआ है. टीम ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय इंटेलिजेंस की मदद से इलाके की घेराबंदी की. मुजरिम को भनक भी नहीं लगी कि दिल्ली पुलिस उसके इतने करीब पहुंच चुकी है.
अब सलाखों के पीछे गुजरेगी जिंदगी
देर रात चलाए गए एक सटीक ऑपरेशन में भीम महतो को धर दबोचा गया. गिरफ्तारी के वक्त वह दंग रह गया, क्योंकि उसे लगा था कि 25 साल पुराने केस में पुलिस अब उसे कभी नहीं ढूंढ पाएगी. डीसीपी निधिन वल्सन ने बताया कि भीम महतो अब एक लाइफ कन्विक्ट भगोड़ा है. उसे कानून की आवश्यक औपचारिकताओं के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे उसकी बाकी की उम्रकैद की सजा काटने के लिए जेल भेज दिया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सोचते हैं कि जमानत पर बाहर आने के बाद वे कानून से बच सकते हैं.
भीम महतो की गिरफ्तारी ने नबी करीम इलाके के उस पुराने जख्म को फिर से ताजा कर दिया है, जहां एक भाई ने दूसरे भाई का खून बहाया था. 25 साल बाद ही सही, लेकिन किशन महतो की आत्मा को आज न्याय मिला है. दिल्ली पुलिस की इस मुस्तैदी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है, जिसने एक पुराने और पेचीदा मामले को तकनीकी कौशल के जरिए सुलझा लिया.