what happens after death in Hinduism। मृत्यु के बाद आत्मा कहां जाती है
Soul Journey After Death: जिंदगी में हम सबसे ज़्यादा अपने रिश्तों से जुड़े रहते हैं. मां, बच्चे, जीवन साथी, दोस्त… यही हमारे दिल का आधार बनते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस दिन हम इस शरीर को छोड़कर जाएंगे, उस दिन हमारी आत्मा किसे तलाशेगी? सबसे पहले किसे पुकारेगी? क्या मां को, बच्चों को या जीवन साथी को? या फिर किसी और रिश्ते को, जो दिल के बहुत करीब था? इस सवाल में इतनी गहराई है कि इसका जवाब पाने के लिए अनेक लोग पूरी उम्र आध्यात्म में डूबे रहते हैं, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने इस सवाल के जवाब को बेहद सरल और आत्मा को झकझोर देने वाली कथा में समझाया है. एक बार द्वारका में शांति के माहौल में बैठे गरुड़ जी ने श्री कृष्ण से यही सवाल पूछा. उनका सवाल सिर्फ जिज्ञासा नहीं था, बल्कि हर इंसान के मन का छिपा हुआ डर, मोह और भ्रम था. श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सवाल सिर्फ एक प्रश्न नहीं, बल्कि पूरे मानव जीवन की दिशा बदल देने वाला ज्ञान है. मृत्यु के बाद की यात्रा कैसी होती है? आत्मा क्या महसूस करती है? किसे पुकारती है? और कैसे कर्म, मोह और प्रेम उसका रास्ता तय करते हैं -यही इस कथा का सार है, अगर इसे समझ लिया तो मृत्यु का डर मिट सकता है और जीवन को जीने का नज़रिया बिल्कुल बदल सकता है.
1. श्री कृष्ण ने गरुड़ से कहा कि आत्मा रिश्तों से नहीं, भावनाओं की गहराई से जुड़ती है. पृथ्वी छोड़ने के बाद आत्मा सबसे पहले उसी इंसान को खोजती है जिसके लिए उसका प्रेम, लगाव या अधूरा संबंध सबसे ज्यादा था, अगर मां के लिए मन में गहरा मोह था, तो आत्मा सबसे पहले मां को पुकारेगी, अगर जीवन साथी को बिना कहे बहुत कुछ दिल में रह गया, तो आत्मा उसी के पास जाने की कोशिश करेगी, अगर संतान के लिए चिंता अधूरी रह गई, तो आत्मा वही रुक जाएगी, जब तक उसे मन से विदाई नहीं मिलती.
2. शरीर के खत्म होते ही आत्मा एक झटके में बाहर निकलती है. उसे समझ नहीं आता कि क्या हुआ. वह अपने ही शरीर को देखती है, लोगों को रोते हुए देखती है. वह बोलती है -“मैं यहीं हूं, मुझे सुनो.” लेकिन कोई उसे सुन नहीं पाता. शुरुआत के कुछ मिनट आत्मा के लिए सबसे ज़्यादा दर्द भरे होते हैं. क्योंकि भावनाएं ज़िंदा होती हैं पर शरीर नहीं. वो अपने प्रियजन के चारों ओर घूमती है और बार-बार कहती है -“मुझे मत छोड़ो, मैं अभी भी तुम्हारे साथ हूं.”
3. अगर व्यक्ति के कर्म अच्छे रहे हों, तो दिव्य ऊर्जा उसे सही मार्ग पर ले जाने आती है, लेकिन अगर जीवन पाप, छल, लालच और गलतियों से भरा रहा हो, तो आत्मा को डर और बेचैनी महसूस होती है. यमदूत जैसे स्वरूप सामने आते हैं जो उसे अगले लोक में ले जाते हैं, जहां उसके कर्मों का फल मिलता है.
4. मृत्यु से पहले भी कई संकेत मिलते हैं. जैसे शरीर में ठंडक का अहसास, सांसों की रफ़्तार में बदलाव, आंखों में चमक, पुराने प्रियजनों के सपने में दिखना, या किसी अदृश्य शक्ति का स्पर्श महसूस होना. कई लोग कहते हैं कि अंतिम समय में चेहरे पर एक अनोखी शांति आ जाती है. यह संकेत होता है कि आत्मा अपनी यात्रा शुरू करने को तैयार है.
5. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद पहले तीन दिन आत्मा घर के आस-पास ही रहती है. वह अपने शरीर और हालात को समझने की कोशिश करती है. सातवें दिन के बाद उसे आगे बढ़ने का संकेत मिलता है. 13वें दिन तक आत्मा का अगला रास्ता तय हो जाता है, अगर परिवार वाले श्रद्धा, नाम जप, दान और प्रार्थना करते हैं, तो आत्मा को आगे बढ़ने में आसानी मिलती है, अगर घर में रोना, चिल्लाना या मोह ज्यादा होता है, तो आत्मा अटक सकती है.
6. श्री कृष्ण कहते हैं -“नाम जप आत्मा की सबसे बड़ी ढाल है. इससे वह डर, मोह, दुख और भ्रम से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ती है. जीवन में कर्म और प्रेम ही असली पूंजी हैं. यही आत्मा के साथ आगे जाते हैं.”
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)