pigeon in house meaning। घर में कबूतर का अंडे देने का मतलब
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Pigeon In House Meaning: लोग अक्सर कहते हैं कि अगर घर की छत पर कबूतर बैठे दिख जाएं, घोंसला बना लें या अंडे दे दें, तो यह किसी बड़ी घटना का संकेत होता है. कोई इसे शुभ मानता है, तो कोई डर जाता है कि कहीं यह अशुभ ना हो. कई जगह पर कहा जाता है कि कबूतर अंडे दें तो राहु का असर बढ़ जाता है, घर में परेशानियां आने लगती हैं और नेगेटिव ऊर्जा अपना असर दिखाती है. दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि कबूतर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ से जुड़े हैं, इसलिए उनका घर में आना सौभाग्य बढ़ने का इशारा है. अब आम इंसान इन दो बातों के बीच फंस जाता है कि आखिर असली सच क्या है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

कबूतर का घर में आना ना पूरी तरह शुभ है, ना पूरी तरह अशुभ. पक्षी संकेत देते हैं, फैसला हमारी ऊर्जा तय करती है. इसलिए वहम में न पड़ें. घर को पॉजिटिव बनाएं, माहौल शांत रखें और समझदारी के साथ प्रकृति के संकेत पहचानें. यही असली राह है.

ईमानदारी से कहें तो कबूतर जैसे जीव हमारे डर या हमारी किस्मत को कंट्रोल नहीं करते, लेकिन हां, जहां यह घोंसला बनाते हैं, वहां की ऊर्जा जरूर बदल सकती है. यही वजह है कि कुछ मामलों में लोगों को नेगेटिव असर महसूस होता है और कुछ जगहों पर पॉजिटिव. इस कहानी के जरिए हम समझेंगे कि कबूतर का घर में आना सिर्फ पक्षी की मौजूदगी नहीं, बल्कि आपके घर की ऊर्जा का आईना भी हो सकता है. तो आइए बिना किसी वहम में पड़े, इस पूरे मामले को एक कथा और समझदारी के साथ जानें.

कबूतर का घर में आना: कृष्ण और गरुड़ की सीख पुरानी कथाओं में बताया गया है कि द्वारका में एक दिन गरुड़ जी श्री कृष्ण के पास एक सवाल लेकर पहुंचे. उन्होंने कहा कि पृथ्वी लोक में कई घरों में कबूतर अंडे देते हैं और लोग उससे अलग-अलग मतलब निकाल लेते हैं. किसी को लगता है कि इससे बरकत आएगी, तो किसी को डर लगता है कि इससे घर की किस्मत खराब हो जाएगी. असल बात क्या है? श्री कृष्ण ने गरुड़ जी को समझाया कि पक्षी शुभ या अशुभ नहीं होते. असली खेल ऊर्जा का होता है. जहां घर की ऊर्जा मजबूत होती है, वहां कबूतर के आने से शांति महसूस होती है. पर जहां पहले से ही टेंशन भरा माहौल, झगड़े, बीमारियां, या पैसों की दिक्कत चल रही हो, वहां उनका अंडा देना भी ऊर्जा को और भारी कर सकता है. यानी पक्षी नहीं, बल्कि घर की वाइब असर दिखाती है.
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किसान विष्णुदत्त की कहानी: संकेत को समझिए, डरिए मत उत्तर भारत के एक गांव में विष्णुदत्त नाम का गरीब लेकिन नेकदिल किसान रहता था. उसकी छत पर कबूतर आए, घोंसला बनाया और अंडे दिए. पहले तो गांव वाले बोले कि अब बरकत होगी. पर धीरे-धीरे घर की हालत बिगड़ने लगी. खेत सूख गए, बीमारी बढ़ गई और आख़िर में किसान की तबीयत इतनी बिगड़ी कि वह चल बसा. लोग कहने लगे कि कबूतर अशुभ हैं. लेकिन श्री कृष्ण स्पष्ट करते हैं -“कबूतर अशुभ नहीं थे, घर की ऊर्जा पहले से ही कमजोर थी. कबूतर सिर्फ संकेत थे, कारण नहीं.”

यानी अगर घर में पहले ही नेगेटिविटी, झगड़ा, तनाव और अनबन चल रही है, तो कबूतर जैसे जीव उस ऊर्जा को महसूस करके उसका हिस्सा बन सकते हैं. पर जहां शांति, भक्ति और सद्भाव हो, वहां उनका आना बिल्कुल सामान्य और कभी-कभी शुभ भी माना जाता है.

अगर घर में कबूतर आते हैं तो क्या करें? -घर हमेशा साफ रखें -सुबह-शाम दीपक जलाएं -नमक के पानी से पोंछा लगाएं -अगर अंडे दे दिए हों तो डरें नहीं, बस प्यार से अलग जगह करने की कोशिश करें -कोई नुकसान ना पहुंचाएं -मंदिर जैसी पवित्र जगह की तरफ रुख करें