Odisha IAS Usha Padhee News | Odisha News- मंदिर के सामने हाथ फैलाए खड़ा था मासूम, अचानक रुकी बड़ी सरकारी गाड़ी; फिर जो हुआ वो आपकी आंखों में आंसू ला देगा

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Odisha News: भुवनेश्वर की एक व्यस्त सड़क, सामने श्रीराम मंदिर और किनारे हाथ फैलाए खड़ा एक मासूम बच्चा यह दृश्य अक्सर लोग देखते हैं. लेकिन ज्यादातर नजरें आगे बढ़ जाती हैं. इसी जगह पर जब एक बड़ी सरकारी गाड़ी अचानक रुकी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उस बच्चे की किस्मत की दिशा बदलने वाली है. यह कोई औपचारिक निरीक्षण नहीं था बल्कि इंसानियत से भरा एक पल था.

इस कहानी में न कोई आदेश था न कोई मीडिया कवरेज की तैयारी. यहां एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने पद और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर वह किया. जो अक्सर सिस्टम से उम्मीद की जाती है लेकिन देखने को कम मिलता है. उषा पाढी का यह कदम सिर्फ एक बच्चे की मदद नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन का जीवंत उदाहरण बन गया.

क्या है पूरा मामला?

यह घटना राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह कार्यक्रम के समापन के बाद की है. उषा पाढी जो ओडिशा सरकार में वाणिज्य एवं परिवहन तथा आवास एवं शहरी विकास विभाग की प्रधान सचिव हैं, कार्यक्रम से लौट रही थीं. श्रीराम मंदिर के सामने सड़क किनारे उन्होंने एक व्यक्ति को अपने छोटे बच्चे के साथ भीख मांगते देखा. उषा पाढी ने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और दोनों के पास पहुंचीं.

बच्चे और पिता से क्या बातचीत हुई?

बातचीत के दौरान सामने आया कि बच्चा स्कूल नहीं जाता और पिता गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है. इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण वह बच्चे के साथ सड़क पर भीख मांगने को मजबूर था. उषा पाढी ने उनसे पूछा कि उन्होंने सरकारी पुनर्वास योजनाओं का लाभ क्यों नहीं लिया. पिता को इन योजनाओं की जानकारी ही नहीं थी. यहीं से प्रशासनिक संवेदनशीलता ने असली रूप लिया.

तुरंत कार्रवाई कैसे हुई?

उषा पाढी ने मौके पर ही भुवनेश्वर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को सूचना दी. कुछ ही देर में BMC की बेगर रिहैबिलिटेशन कमिटी मौके पर पहुंच गई. बच्चे और उसके पिता को वहां से रेस्क्यू किया गया और सीधे ओडिशा सरकार के सहाय शेल्टर होम भेज दिया गया. यह पूरी प्रक्रिया कुछ घंटों के भीतर पूरी हुई, जो सिस्टम की तत्परता को दर्शाती है.

‘सहाय’ शेल्टर होम क्या है?

सहाय ओडिशा सरकार की एक अहम सामाजिक पहल है, जिसका उद्देश्य सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर लोगों को सम्मानजनक जीवन देना है. इस शेल्टर होम में न सिर्फ सिर छुपाने की जगह मिलती है, बल्कि जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की पूरी कोशिश की जाती है. यहां रहने वालों को भोजन, कपड़े, मेडिकल ट्रीटमेंट और काउंसलिंग की सुविधा दी जाती है. बच्चों के लिए स्कूल में दाखिले और पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है ताकि वे दोबारा सड़क पर न लौटें.

क्यों खास है यह मामला?

अक्सर प्रशासनिक अधिकारी नीतियां बनाते हैं, योजनाओं की फाइलें देखते हैं और रिपोर्ट्स पढ़ते हैं. लेकिन उषा पाढी ने सड़क पर खड़े उस बच्चे को सिर्फ एक आंकड़ा नहीं समझा. उन्होंने मौके पर रुककर, बात करके और तुरंत सिस्टम को सक्रिय करके दिखाया कि गवर्नेंस का असली मतलब संवेदना है.

सोशल मीडिया और समाज की प्रतिक्रिया

इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उषा पाढी की जमकर सराहना की. कई यूजर्स ने लिखा कि अगर हर अधिकारी ऐसा रवैया अपनाए, तो सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या काफी हद तक कम हो सकती है. कुछ लोगों ने इसे “करुणामयी शासन” की मिसाल बताया.

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