faridabad gangrape inside story | married girl viral video | eco van ambulance and Rs 600 | haryana police investigation | फरीदाबाद गैंगरेप केस की इनसाइड स्टोरी, ईको वैन, एंबुलेंस और 600 रुपये का झोल, पीड़िता की बहन का बड़ा खुलासा

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फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में 28 साल की एक नवविवाहिता के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. जहां एक ओर फरीदाबाद पुलिस दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले को सुलझाने का दावा कर रही है, वहीं पीड़िता की बहन ने पुलिस की थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. बहन का दावा है कि उसकी बहन के साथ दरिंदगी ईको वैन में नहीं, बल्कि एम्बुलेंस में हुई थी. इसके साथ ही निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर हो रही पैसों की मांग और पुलिस की पाबंदियों ने इस पूरे मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है. इस बीच पीड़िता का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उसने दावा किया है कि मेरे पेटीएम खाते में 600 रुपये ट्रांसफर किए गए. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि हरिय़ाणा पुलिस घटना के इतने घंटे बाद अंधेरे में ही तीर मार रही है?

इस बीच पीड़िता का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि यह घटना के बाद रिकॉर्ड की गई थी. इस वीडियो में पीड़िता बता रही है कि जैसे ही वह कार में बैठी उनमें से एक ने मेरे खाते में 600 रुपये पेटीएम कर दिए. फिर उन लोगों ने कार लॉक कर दी और मेरा मोबाइल छीन लिया. घना कोहरा होने के कारण में मैं कुछ कर रही सका. मैं जोर-जोर से चिल्लाई लेकिन मदद नहीं मिली. अब पुलिस इस गुत्थी को समझ नहीं पा रही है कि आखिर 600 रुपये क्यों जमा किए गए?

सोमवार से रविवार तक की पूरी कहानी

सोमवार- इस घटना की शुरुआत या दर्दनाक दास्तां सोमवार रात को शुरू हुई थी. पीड़िता अपने मायके में रह रही थी और सेक्टर 23 में अपने दोस्त से मिलने गई थी. रात के 12 बजे जब वह घर लौटने के लिए गुरुग्राम फरीदाबाद रोड पर खड़ी होकर साधन का इंतजार कर रही थी, तभी आरोपियों ने उसे लिफ्ट देने की पेशकश की. पीड़िता को झांसा देकर गाड़ी में बिठाया गया और फिर पूरी रात उसके साथ हैवानियत की गई.

मंगलवार- पीड़िता के साथ रैप करने के बाद लहूलुहान हालत में सड़क पर फेंक दिया गया. मंगलवार सुबह करीब 3 बजे, आरोपियों ने पीड़िता को फरीदाबाद के राजा चौक के पास चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया. पीड़िता के सिर में गंभीर चोटें आई थीं. किसी तरह उसने अपनी बहन को फोन किया, जो मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले गई. पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

बुधवार- गुरुवार: पुलिस की ‘ईको वैन’ थ्योरी और गिरफ्तारी बुधवार को फरीदाबाद पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो यूपी और एमपी के रहने वाले हैं. पुलिस ने बताया कि वारदात में एक ‘ईको वैन’ का इस्तेमाल हुआ था. आरोपियों से पूछताछ और शिनाख्त परेड की बात कही गई. पुलिस ने इसे एक साधारण लिफ्ट देकर रेप करने का मामला बताया.

शुक्रवार – शनिवार: शनिवार को पीड़िता की बहन मीडिया के सामने आई और पुलिस की जांच पर सवाल उठाए. बहन ने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है. उसने दावा किया कि उसे पहले जानकारी मिली थी कि आरोपी ‘एंबुलेंस’ के ड्राइवर हैं और वारदात एंबुलेंस के अंदर ही हुई है. बहन ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में पुलिस की कड़ी निगरानी है और उसे अपनी बहन से 12 घंटे में केवल 5 मिनट ही मिलने दिया जा रहा है.

रविवार- रविवार तक यह मामला आर्थिक तंगी और प्रशासनिक लापरवाही की ओर मुड़ गया. बहन का कहना है कि सेक्टर 23 के थाना प्रभारी ने इलाज में मदद का वादा किया था, लेकिन अब अस्पताल प्रबंधन उनसे बिल जमा करने का दबाव बना रहा है. बहन के मुताबिक, वह अब तक 45 हजार रुपये जमा कर चुकी है और अब 28 हजार रुपये की और मांग की जा रही है, जिसके अभाव में डॉक्टर इलाज रोकने की धमकी दे रहे हैं.

आखिर सच क्या है?

पीड़िता की बहन के आरोपों ने तीन मुख्य बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं. पहला, पुलिस ईको वैन में वारदाता की बात कह रही है, जबकि बहन का दावा एंबुलेंस का है. अगर एंबुलेंस में रेप हुआ है, तो यह सरकारी या निजी स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा पर बड़ा तमाचा है. परिवार का आरोप है कि उन्हें पीड़िता से मिलने नहीं दिया जा रहा. क्या पुलिस किसी सच्चाई के बाहर आने से डर रही है? सरकारी दावों के उलट, पीड़िता के परिवार से इलाज के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है.

हरियाणा महिला आयोग की दखल

इस मामले में अब राजनीति और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ गया है. हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने मामले का संज्ञान लिया है. उन्होंने साफ कहा है कि वह सोमवार तक पुलिस से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगेंगी. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बात की है और आरोपियों की पृष्ठभूमि की जांच करने को कहा है. रेणु भाटिया ने आश्वासन दिया है कि यदि इलाज में कोई बाधा आ रही है या पुलिस जांच में लापरवाही बरत रही है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल पीड़िता एक निजी अस्पताल में भर्ती है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. पुलिस अपने शुरुआती बयान पर अडिग है कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और वाहन ईको वैन ही था. हालांकि, एंबुलेंस वाले दावे ने जनता के बीच अविश्वास पैदा कर दिया है. पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए उस वाहन की दोबारा पहचान करने की कोशिश कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. यह मामला केवल एक दुष्कर्म का नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था की पारदर्शिता और संवेदनशीलता की परीक्षा बन गया है. क्या एक गरीब परिवार को न्याय के लिए अपनी जेब खाली करनी पड़ेगी? और क्या पुलिस के दावे सच हैं या बहन का आरोप? इन सभी सवालों के जवाब सोमवार को महिला आयोग की रिपोर्ट के बाद मिलने की उम्मीद है.

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