How to become Aghori। अघोरी बनने की प्रक्रिया, अघोरी साधना का सच, श्मशान साधना अघोरी मार्ग
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How To Become Aghori: कुंभ मेले में आपने जरूर ऐसे साधु-संत देखे होंगे जिन्हें लोग अघोरी कहकर एक अलग नज़र से देखते हैं. उनके शरीर पर भस्म, हाथ में खोपड़ी, डरावनी-सी दिखने वाली साधना और श्मशान से जुड़ा जीवन… ये सब देखकर लोग समझ लेते हैं कि अघोरी कोई खतरनाक इंसान होता है. लेकिन क्या सच में अघोरी ऐसे ही होते हैं? क्या वह दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं? आखिर कौन बन सकता है अघोरी? क्या इसके लिए कोई खास नियम या तरीका होता है? इस आर्टिकल में बात करेंगे कि अघोरी किसे कहते हैं, अघोरी बनने के लिए कैसा जीवन अपनाना पड़ता है, कौन सी साधना की जाती है और कौन इस राह पर चल सकता है. ध्यान रखें, ये जानकारी सिर्फ ज्ञान देने के उद्देश्य से है, किसी को भी बिना सोच-समझे इस रास्ते की ओर नहीं बढ़ना चाहिए.

असल में अघोर पंथ साधना का वो रास्ता है, जहां इंसान अपने अंदर की हर कमजोरी, डर और लोभ को खत्म करने की कोशिश करता है. ये सफर आसान नहीं है, क्योंकि इस राह में साधक को समाज, परिवार, आराम, पैसा… लगभग सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ सकता है. जंगल, श्मशान, एकांत और ध्यान इनकी दुनिया बन जाती है.

अघोरी बनना कोई खेल नहीं है. ये जीवन त्याग, एकांत, श्मशान साधना और मानसिक मजबूती की राह है. हर कोई इस रास्ते के लिए नहीं बना होता. सावधानी, गुरु का मार्गदर्शन और सच्चा मन जरूरी है, वरना ये सफर उलझन और खतरे भरा भी साबित हो सकता है.

अघोरी कौन होते हैं? साधारण भाषा में कहें तो अघोरी वो लोग होते हैं जो अघोर पंथ का पालन करते हुए तंत्र और साधना की ऊंची राह पर चलते हैं. ये श्मशान, जंगल जैसे स्थानों पर भी आसानी से रह लेते हैं. उनका मानना है कि जब इंसान के मन से डर और घृणा खत्म हो जाती है, तब वो जीवन को असली रूप में समझ पाता है. यही वजह है कि अघोरी चीजों को अलग नजरिए से देखते हैं. उनके लिए इंसान, जानवर, सुंदर, बदसूरत, बूढ़ा, जवान सब एक समान होते हैं.
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अघोरी बनने का असली रास्ता 1. ब्रह्मचर्य और मन पर नियंत्रण<br />अघोरी बनने का पहला कदम है मन और शरीर पर पूरा नियंत्रण. ब्रह्मचर्य का पालन, गलत इच्छाओं पर रोक और रिश्तों को समान भाव से देखना जरूरी माना जाता है. उनके लिए कोई अच्छा-बुरा, सुंदर-असुंदर नहीं होता.

2. सबको समान भाव से स्वीकार करना टीवी पर अकसर दिखाते हैं कि अघोरी कुछ भी खा लेते हैं, सड़ा-गला मांस या जानवरों के अवशेष भी. इसका असली मतलब ये नहीं है कि वो हिंसक हैं, बल्कि उनके अनुसार ये अभ्यास मन के अंदर की घृणा और डर को खत्म करता है. धीरे-धीरे मन ऐसी हर चीज को बिना नफरत के देखने लगता है.

3. घर-परिवार का त्याग अघोरी बनने का सबसे कठिन हिस्सा यही है. क्योंकि साधना के लिए जंगल, श्मशान, एकांत की जरूरत होती है. ये जीवन परिवार, शादी, बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच रहकर नहीं चल सकता. इसलिए जो इस राह पर जाते हैं, अकसर समाज और रिश्तों से दूरी बना लेते हैं.

4. श्मशान और तांत्रिक साधना अघोर पंथ में श्मशान साधना का खास महत्व है. माना जाता है कि यहां ध्यान और साधना करने से मन जल्दी विकसित होता है क्योंकि सामने मौत की सच्चाई होती है. बहुत से अघोरी कपाल क्रिया, मंत्र, तंत्र साधना के जरिए सिद्धि पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये सब गुरु की देखरेख में ही किया जाता है.

क्या हर कोई अघोरी बन सकता है? सीधी बात -नहीं. ये रास्ता सिर्फ उन लोगों के लिए है जिनका मन पूरी तरह दृढ़ हो, जिनमें त्याग की क्षमता हो और जो अपनी इच्छाओं, डर और मोह को छोड़ सकें. सिर्फ जिज्ञासा या रोमांच के लिए इस दिशा में कदम बढ़ाना गलत माना जाता है. <strong>(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) </strong>