Karnataka EVM Survey Report | People Trust EVM | Rahul Gandhi EVM Claim | Rahul Gandhi Vote Chori | सिद्दारमैया सरकार का एक सर्वे और चक्रव्यूह में फंस गए राहुल गांधी, दिल्ली से मुंबई तक कांग्रेस कैसे घिरी? | Karnataka Siddaramaiah government publish evm survey report Rahul Gandhi vote chori narrative puncture congress on backfoot

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Karnataka EVM Survey Report: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. संसदीय चुनाव में एक अरब से ज्‍यादा लोग वोट डालने के योग्‍य हैं. इनमें से करोड़ों लोग अपने मताधिकार का इस्‍तेमाल करते हैं, ऐसे में वोटिंग प्रक्रिया का पारदर्शी, निष्‍पक्ष और भ्रष्‍टाचार मुक्‍त होना अनिवार्य है. भारत में इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से वोटिंग होती है. EVM को लेकर विपक्ष की ओर से अक्‍सर ही सवाल उठाए जाते हैं. खासकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इसको लेकर बेहद आक्रामक रहे हैं. राहुल ने तो EVM पर सवाल उठाते हुए कथ‍ित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अभियान छेड़ द‍िया है. अब राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी शासित कर्नाटक सरकार की ओर से EVM को लेकर ऐसी रिपोर्ट जारी की गई है, जिससे राहुल गांधी अपने दावे को लेकर खुद ही चक्रव्‍यूह में फंस गए हैं. कर्नाटक में इस समय सिद्दारमैया मुख्‍यमंत्री हैं. सर्वे रिपोर्ट की मानें तो 83 फीसद लोगों ने EVM पर भरोसा जताया है. ऐसे में बेंगलुरु से लेकर मुंबई और हैदराबाद से लेकर दिल्‍ली तक में राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठने लगे हैं.

दरअसल, EVM को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस के बीच कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए एक नए सर्वे ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. सर्वे में यह बात सामने आई है कि राज्य के अधिकांश मतदाता EVM पर भरोसा करते हैं और उन्हें सुरक्षित मानते हैं. इस सर्वे के नतीजों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस और खास तौर पर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि जब भी कांग्रेस चुनाव हारती है, वह ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगती है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

हैदराबाद में इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता एन. रामचंदर राव ने कहा कि देश की जनता को ईवीएम पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, ‘भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां बड़े पैमाने पर EVM के जरिए चुनाव कराए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार साफ कर चुका है कि EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं है. जब कांग्रेस चुनाव हारती है, तब वह ईवीएम को दोष देने लगती है.’ राव ने यह भी कहा कि ईवीएम को लेकर फैलाई जा रही शंकाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास हैं. वहीं, दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर और भी तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को जब भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, वह EVM और चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने लगते हैं. पूनावाला ने कहा, ‘कर्नाटक में हुए सर्वे से साफ है कि जनता ईवीएम को सुरक्षित मानती है और उस पर भरोसा करती है. हर बार जब राहुल गांधी ईवीएम या व्यवस्था को दोष देते हैं, उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ता है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़कर अपनी विफलताओं से ध्यान हटाना चाहती है.

यह सर्वे कहां और किसने कराया?
यह सर्वे कर्नाटक में कराया गया. इसे राज्य के मुख्य निर्वाचन ने करवाया. सर्वे की रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी ने प्रकाशित की है, जो योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी विभाग के तहत आती है.

सर्वे में कितने लोगों से बात की गई?
इस सर्वे में कुल 5,100 लोगों से बातचीत की गई. ये लोग कर्नाटक की 102 विधानसभा सीटों से थे. सर्वे में बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु प्रशासनिक संभाग शामिल थे.

यह सर्वे किस उद्देश्य से किया गया था?
यह 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद नागरिकों के ज्ञान, सोच और व्यवहार (KAP) को समझने के लिए किया गया एंडलाइन सर्वे था.

सर्वे में चुनावों को लेकर लोगों की राय क्या सामने आई?
सर्वे के मुताबिक, कर्नाटक के ज्यादातर नागरिक मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं. करीब 84.55 प्रतिशत लोगों ने इस बात से सहमति जताई.

किस संभाग में यह भरोसा सबसे ज्यादा दिखा?
कलबुर्गी संभाग में चुनावों पर भरोसा सबसे ज्यादा दिखा. यहां 84.67 प्रतिशत लोगों ने सहमति जताई और 10.19 प्रतिशत ने पूरी तरह सहमति दी. इसके बाद बेलगावी संभाग का नंबर रहा.

ईवीएम को लेकर लोगों का भरोसा कितना है?
सर्वे के अनुसार, 83.61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा है और इससे सही नतीजे आते हैं.

ईवीएम पर भरोसा किस इलाके में ज्यादा है?
ईवीएम पर सबसे ज्यादा भरोसा कलबुर्गी संभाग में देखा गया. यहां 83.24 प्रतिशत लोगों ने सहमति जताई और 11.24 प्रतिशत ने पूरी तरह भरोसा जताया. मैसूरु संभाग दूसरे नंबर पर रहा.

क्या पहले की तुलना में ईवीएम पर भरोसा बढ़ा है?
हां. 2023 में ईवीएम पर भरोसा 77.9 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 83.61 प्रतिशत हो गया है.

क्या लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डालने गए थे?
हां. सर्वे में शामिल 95.75 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला.

वोटर लिस्ट को लेकर लोगों की क्या राय रही?
जिन 4,272 लोगों के नाम वोटर लिस्ट में थे, उनमें से 95.44 प्रतिशत ने कहा कि उनका नाम सही तरीके से सूची में दर्ज था.

क्या सर्वे में वोट को प्रभावित करने की कोशिशों की बात भी सामने आई?
हां. करीब 16.3 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें किसी न किसी तरह से वोट प्रभावित करने की कोशिश का सामना करना पड़ा.

वोट प्रभावित करने के सबसे आम तरीके कौन से रहे?
सबसे ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ देने का लालच दिया गया, जो कुल मामलों का 42.26 प्रतिशत रहा. इसके बाद नौकरी दिलाने का वादा दूसरा सबसे बड़ा तरीका रहा.

किस इलाके में सरकारी योजनाओं के लालच की बात ज्यादा सामने आई?
कलबुर्गी संभाग में यह सबसे ज्यादा देखा गया, जहां 74.26 प्रतिशत मामलों में सरकारी योजनाओं का जिक्र हुआ.

चुनाव में पैसे के इस्तेमाल को लेकर लोगों की क्या सोच है?
सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि चुनावों में पैसों का असर बढ़ रहा है. करीब 44.9 प्रतिशत लोगों ने इस बात से सहमति जताई, जबकि 4.65 प्रतिशत ने पूरी तरह सहमति दी.

इस सर्वे के राजनीतिक मायने क्या हैं?
यह रिपोर्ट कांग्रेस के लिए झटका मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ईवीएम को लेकर सवाल उठा रहे हैं. वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर लाने का फैसला भी किया है.

कुल मिलाकर सर्वे क्या संकेत देता है?
कुल मिलाकर सर्वे यह बताता है कि कर्नाटक के ज्यादातर नागरिक चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम पर भरोसा करते हैं, हालांकि चुनावों में पैसे और लालच की भूमिका को लेकर चिंता भी बनी हुई है.

‘EVM पर लगे सभी आरोप खारिज’

मुंबई में शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी कर्नाटक सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह सर्वे बेहद व्यापक और स्पष्ट है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए इस सर्वे में 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों को शामिल किया गया. सर्वे के अनुसार 91 प्रतिशत लोगों ने माना कि ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई और चुनाव आयोग की ओर से भी कोई हस्तक्षेप नहीं था. शाइना एनसी ने कहा कि ये आंकड़े उन सभी आरोपों को खारिज करते हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं. रांची से भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी इसी तरह का बयान देते हुए कहा कि जहां-जहां भी इस तरह के सर्वे कराए गए हैं, वहां की राज्य सरकारें खुद ईवीएम की विश्वसनीयता की गवाह बनी हैं. उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है. प्रतुल शाह देव ने सवाल उठाया कि अगर ईवीएम में किसी तरह की गड़बड़ी होती, तो क्या कांग्रेस कहीं भी सरकार बना पाती? कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है, यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि ईवीएम निष्पक्ष और भरोसेमंद हैं.

EVM पर चुनाव आयोग का क्‍या पक्ष है?

ईवीएम को लेकर यह बहस कोई नई नहीं है. पिछले कई चुनावों के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. हालांकि चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और तकनीकी विशेषज्ञ बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनमें छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है. चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम को कई स्तरों पर जांचा जाता है और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है. कर्नाटक सर्वे के नतीजों को भाजपा लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत बता रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के सर्वे यह साबित करते हैं कि आम मतदाता न केवल चुनाव प्रक्रिया को समझता है, बल्कि उस पर भरोसा भी करता है. भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस बार-बार ईवीएम पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करती है.

अब आगे क्‍या होगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले ईवीएम को लेकर बयानबाजी और तेज हो सकती है. हालांकि कर्नाटक सर्वे जैसे आंकड़े यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर मतदाताओं का भरोसा अब भी मजबूत है. कुल मिलाकर ईवीएम को लेकर छिड़ी यह बहस केवल तकनीक की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास और राजनीतिक जवाबदेही की भी है, जिसमें जनता की राय सबसे अहम मानी जा रही है.

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