Kalyani Indigenous Naval Gun | Indian New Naval Gun- ब्रह्मोस जैसी घातक, मिनट में 120 गोले, अब समंदर में बरसेगी ‘कल्याणी’ की आग! 2026 में कांप उठेगा दुश्मन का कलेजा

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Kalyani Indigenous Naval Gun: समंदर में भारत की मारक ताकत अब एक नए स्तर पर पहुंचने वाली है. जिस तरह ब्रह्मोस मिसाइल ने दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा किया, अब उसी तरह ‘कल्याणी’ की स्वदेशी नेवल गन्स समुद्री मोर्चे पर आग बरसाने को तैयार हैं. भारत फोर्ज की सब्सिडियरी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स 2026 में अपनी 76mm और 30mm की स्वदेशी नौसैनिक तोपों का प्रूफ टेस्ट शुरू करने जा रही है.

इन तोपों की खास बात सिर्फ उनकी मारक क्षमता नहीं, बल्कि यह है कि ये पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित की गई हैं. मिनट में 120 राउंड फायर करने की क्षमता, मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही ढेर करने का दम और समंदर में स्थिरता ये सब भारत की नौसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाने वाले हैं.

‘कल्याणी’ की दो नई नेवल गन्स

कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स दो तरह की नौसैनिक तोपों पर काम कर रही है:

  • 30mm नेवल गन, जो नजदीकी खतरों के लिए.
  • 76mm मीडियम-कैलिबर नेवल गन, जो मिसाइल, ड्रोन और सतह पर मौजूद दुश्मन जहाजों के खिलाफ तैनात होगी.
  • 30mm गन के अगस्त 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है, जबकि 76mm गन का प्रूफ टेस्ट भी उसी साल शुरू होगा.

क्यों अहम है यह हथियार?

भारतीय नौसेना लंबे समय से विदेशी नेवल गन्स पर निर्भर रही है. ऐसे में स्वदेशी तोपों का विकास मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है. खासकर प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स, भविष्य के कॉर्वेट्स और नए वॉरशिप्स को दो-दो 30mm गन्स की जरूरत होगी. यह पहल भारत की समुद्री सीमाओं को ड्रोन, मिसाइल और फास्ट अटैक बोट्स से सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाएगी.

कैसे बनी इतनी घातक? तकनीकी ताकत

76mm नेवल गन को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रणालियों जैसे OTO Melara से प्रेरणा लेकर, लेकिन पूरी तरह भारतीय जरूरतों के हिसाब से विकसित किया गया है. इसकी फायरिंग रेट 120 राउंड प्रति मिनट तक हो सकती है और गाइडेड म्यूनिशन के साथ इसकी रेंज 40 किलोमीटर तक पहुंच सकती है. 30mm गन 30×173mm NATO स्टैंडर्ड एम्युनिशन पर आधारित है, जो हल्के बख्तरबंद लक्ष्यों, ड्रोन और लो-फ्लाइंग थ्रेट्स के खिलाफ बेहद असरदार मानी जाती है.

ये तोपें ड्रोन, मिसाइल और दुश्मन जहाजों के खिलाफ भारतीय नौसेना की मारक क्षमता बढ़ाएंगी. (फोटो X)

एक नजर में ‘कल्याणी’ की नेवल गन्स की ताकत

  • पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण.
  • 30mm और 76mm दो अलग-अलग भूमिका वाली तोपें.
  • 76mm गन से मिनट में 120 राउंड फायर.
  • ड्रोन, मिसाइल और दुश्मन जहाजों पर सटीक हमला.
  • भारतीय नौसेना की जरूरतों के हिसाब से स्टेबलाइजेशन सिस्टम.

भारत फोर्ज का डिफेंस पावरहाउस बनना

भारत फोर्ज पहले ही 105mm और 155mm आर्टिलरी सिस्टम्स में अपनी क्षमता साबित कर चुका है. IDEX 2025 (अबू धाबी) में अमेरिकी कंपनी AM General के साथ हुआ समझौता, भारतीय कंपनी द्वारा अमेरिका को तोप सप्लाई करने का पहला उदाहरण है. इसके अलावा, कंपनी को ₹2,770 करोड़ का कार्बाइन कॉन्ट्रैक्ट. ₹250 करोड़ का अंडरवॉटर सिस्टम्स ऑर्डर भी मिल चुका है, जिसकी डिलीवरी 2026 तक होनी है.

क्या होंगे अगले कदम?

2026 में प्रूफ टेस्टिंग के दौरान इन गन्स की रिकॉयल मैनेजमेंट स्ट्रक्चरल मजबूती और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम से इंटीग्रेशन को परखा जाएगा. सफल टेस्टिंग के बाद भारतीय नौसेना में इनकी एंट्री का रास्ता साफ हो जाएगा.

रणनीतिक असर: समंदर में भारत की बढ़त

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच, ये नेवल गन्स भारत को ड्रोन वॉर, मिसाइल थ्रेट और सतह पर हमलों से निपटने में निर्णायक ताकत देंगी. 70% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट के साथ यह सिस्टम भारत को नेवल आर्टिलरी एक्सपोर्टर के रूप में भी स्थापित कर सकता है.

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