how to fry fish without breaking । बिना टूटे फिश फ्राई परफेक्ट क्रिस्पी कैसे बनाएं
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How to Fry Fish Without Breaking: फिश फ्राई बिना टूटे बनाने के लिए सही मछली का चुनाव सबसे जरूरी है. मछली को अच्छे से सुखाना, हल्की लेकिन मजबूत कोटिंग करना और सही तापमान पर तेल गरम करना बहुत फर्क डालता है. फ्राई करते वक्त जल्दबाजी न करें और मछली को खुद पैन से छूटने दें. इन आसान टिप्स से घर पर भी परफेक्ट क्रिस्पी फिश फ्राई बन सकती है.

How to Fry Fish Without Breaking: मछली फ्राई दिखने में जितनी आसान लगती है, उतनी बनती नहीं है. अक्सर घर में ऐसा होता है कि मसाला लगाया, तेल गरम किया और मछली डालते ही वह चिपक गई या पलटते वक्त टूटकर बिखर गई. प्लेट में परोसते समय फिश फ्राई की जगह छोटे छोटे टुकड़े दिखते हैं. बंगाल में पहली बार माछ भाजा बनाने वालों की यह सबसे आम शिकायत होती है, वहीं गोवा में कई बार पोमफ्रेट रवा फ्राई रवा के साथ ही टूट जाती है. असल में यह गलती रेसिपी की नहीं बल्कि तकनीक की होती है. सही मछली का चुनाव, सही कटिंग, तेल का तापमान और थोड़ा सा सब्र, यही वो बातें हैं जो फिश फ्राई को परफेक्ट बनाती हैं. अगर आप भी चाहते हैं कि घर पर बनी फिश फ्राई बाहर जैसी गोल्डन, क्रिस्पी और बिना टूटे बने, तो यह गाइड आपके बहुत काम आने वाली है.

फिश फ्राई के लिए सही मछली का चुनाव क्यों जरूरी है: हर मछली फ्राई के लिए सही नहीं होती. बहुत नरम और ज्यादा फ्लेकी मछलियां तेल में जाते ही टूट जाती हैं. फ्राई के लिए ऐसी मछली चाहिए जिसका फलेश मजबूत हो और जो गर्म तेल को झेल सके. अगर कच्ची मछली को चम्मच से छूते ही वह टूटने लगे, तो समझिए वह फ्राई के लिए सही नहीं है.

भारत में फ्राई के लिए सबसे अच्छी मछलियां मानी जाती हैं सुरमई, पोमफ्रेट, रोहू, कतला, तिलापिया और कैटफिश. ये मछलियां ठीक से कट की जाएं तो आकार बनाए रखती हैं और अच्छी तरह क्रिस्पी होती हैं. बहुत ज्यादा ऑयली मछलियों से शुरुआत करने से बचना चाहिए.
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सही सफाई और कटिंग से आधी परेशानी खत्म: कई बार मछली टूटने की वजह शुरुआत में की गई गलती होती है. बहुत पतले टुकड़े या असमान कटिंग फ्राई के दौरान कमजोर पड़ जाती है. फ्राई के लिए मछली के टुकड़े कम से कम एक से डेढ़ इंच मोटे रखें. सारे पीस लगभग एक जैसे साइज के हों ताकि पकाने में बैलेंस बना रहे. कांटे और स्केल्स अच्छे से निकालें और धोने के बाद मछली को पूरी तरह सुखा लें.

मछली को सुखाना क्यों है सबसे जरूरी स्टेप: गीली मछली को सीधे तेल में डालने से वह चिपकती है और टूट जाती है. नमी की वजह से तेल में भाप बनती है और क्रस्ट सही नहीं बन पाता. मछली को धोने के बाद किचन टॉवल से अच्छी तरह पोंछें. अगर समय हो तो मछली को फ्रिज में खुला रखकर 20 से 30 मिनट भी रख सकते हैं. इससे एक्स्ट्रा नमी निकल जाती है और फ्राई ज्यादा क्रिस्पी बनती है.

इंडियन स्टाइल फिश फ्राई के लिए सही मैरिनेशन: भारतीय फिश फ्राई मसालों के बिना अधूरी है. हल्दी, लाल मिर्च, अदरक लहसुन पेस्ट, नींबू का रस और नमक, यह बेसिक मैरिनेशन लगभग हर जगह काम करता है. बंगाल में सादा हल्दी नमक, केरल में लाल मिर्च और करी पत्ता, गोवा में रवा के साथ मसाले, हर जगह अंदाज अलग है. मैरिनेशन के बाद मछली को 10 से 15 मिनट आराम देना जरूरी है ताकि मसाला अच्छे से चिपक जाए.

कोटिंग सही होगी तो मछली नहीं टूटेगी: कोटिंग फिश फ्राई को मजबूती देती है. गोवा में रवा, उत्तर भारत में बेसन, बंगाल में हल्की चावल का आटा, यह सब मछली को पकड़ देते हैं. कोटिंग बहुत मोटी न हो, बस इतनी हो कि मछली को एक सपोर्ट मिल जाए. कोटिंग के बाद मछली को तुरंत तेल में न डालें, दो तीन मिनट रुकना फायदेमंद होता है.

कौन सा पैन फिश फ्राई के लिए बेस्ट है: पैन का चुनाव भी बहुत फर्क डालता है. कास्ट आयरन तवा सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह हीट को बराबर रखता है. स्टील के पैन में भी फ्राई हो सकती है लेकिन उसे पहले अच्छे से गरम करना जरूरी है. नॉन स्टिक पैन बिगिनर्स के लिए आसान होता है, लेकिन उसमें रंग उतना गहरा नहीं आता.

तेल का सही तापमान ही असली गेम चेंजर है: अगर तेल ठंडा होगा तो मछली चिपकेगी और तेल सोखेगी. अगर बहुत ज्यादा गरम होगा तो बाहर से जल जाएगी और अंदर से कच्ची रह जाएगी. मीडियम हाई आंच सबसे सही रहती है. तेल तैयार है या नहीं, यह चेक करने के लिए उसमें थोड़ा सा आटा डालें. अगर वह तुरंत ऊपर आकर सिजल करे तो तेल सही है.

फिश फ्राई करते वक्त ये गलती बिल्कुल न करें: मछली डालते ही उसे छेड़ना सबसे बड़ी गलती है. पहले दो तीन मिनट उसे वैसे ही रहने दें ताकि नीचे की साइड पर क्रस्ट बन जाए. जब मछली खुद पैन से छूटने लगे तब ही पलटें. चौड़ी स्पैचुला का इस्तेमाल करें और एक बार से ज्यादा पलटने से बचें. फ्राई होने के बाद मछली को सीधे प्लेट में न रखें, पहले टिशू या वायर रैक पर रखें ताकि क्रिस्पी बनी रहे.

भारत के अलग अलग फिश फ्राई स्टाइल: बंगाली माछ भाजा सरसों के तेल में हल्दी नमक के साथ बनाया जाता है. केरल मीन फ्राई नारियल तेल और तीखे मसालों के लिए मशहूर है. गोवा का रवा फ्राई कुरकुरा और गोल्डन होता है. अमृतसरी फिश बेसन और अजवाइन की खुशबू के साथ डीप फ्राई की जाती है. हर स्टाइल में तकनीक वही रहती है, बस मसाले बदलते हैं.

अगर फिश फ्राई टूट जाए तो क्या करें: अगर मछली टूट भी जाए तो परेशान न हों. उसे फेंकने की जरूरत नहीं. आप उसे फिश कटलेट, फिश पुलाव, सैंडविच फिलिंग या सलाद में इस्तेमाल कर सकते हैं. स्वाद वहीं रहता है, बस रूप बदल जाता है.

हेल्दी ऑप्शन भी हैं मौजूद: जो लोग ज्यादा तेल से बचते हैं, वे शैलो फ्राई, एयर फ्रायर या ओवन बेकिंग ट्राय कर सकते हैं. टेक्सचर थोड़ा अलग होगा लेकिन मछली टूटेगी नहीं और हल्की भी रहेगी.