घर पर ऐसे बनाएं कुमाऊं का फेमस चूल्हा मटन, तारीफ करते नहीं थकेंगे लोग, ट्राई करें ये स्पेशल रेसिपी – Uttarakhand News
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Pahadi Mutton Recipe: कुमाऊं का चूल्हा मटन पहाड़ों का एक खास देसी स्वाद है, जिसे लकड़ी के चूल्हे पर धीमी आंच में पकाया जाता है. कम मसालों, सरसों के तेल और दही से बना यह मटन अपनी हल्की धुएं वाली खुशबू और नरम स्वाद के लिए जाना जाता है. इसे घंटों आराम से पकाया जाता है, जिससे मटन अच्छी तरह गल जाता है और ग्रेवी गाढ़ी बनती है. जानिए इसे बनाने की स्पेशल रेसिपी.

कुमाऊं का चूल्हा मटन सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि पहाड़ की परंपरा और जीवनशैली का स्वाद है. इसे आम गैस पर नहीं, बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर धीमी आंच में पकाया जाता है. जिससे मटन में धुएं की हल्की खुशबू और गहराई वाला स्वाद आता है. पहाड़ों में यह मटन खास मौकों, त्योहारों और मेहमानों के स्वागत में बनाया जाता है. कम मसालों में तैयार होने वाला यह मटन स्थानीय जड़ी-बूटियों और दही के इस्तेमाल से अलग पहचान बनाता है. यही वजह है कि कुमाऊं का यह पारंपरिक मटन अब शहरों तक अपनी लोकप्रियता फैला चुका है.

पहाड़ी चूल्हा मटन बनाने के लिए ज्यादा मसालों की जरूरत नहीं होती. एक किलो बकरे का मटन, दो बड़े प्याज, लहसुन, अदरक, घर का बना दही, सरसों का तेल, नमक, धनिया पाउडर, हल्दी और लाल मिर्च पर्याप्त होते हैं. खास स्वाद के लिए जख्या (जंगली सरसों), भांग के बीज या पहाड़ी मसाला इस्तेमाल किया जाता है. तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च भी डाली जाती है. सरसों का तेल इस रेसिपी की जान है, जो मटन को देसी खुशबू देता है. पहाड़ों में मसाले ताजे पीसे जाते हैं, जिससे स्वाद और भी निखर जाता है.

चूल्हा मटन का स्वाद तभी निखरता है, जब मटन को सही तरीके से मैरीनेट किया जाए. मटन को अच्छी तरह धोकर उसमें नमक, हल्दी, अदरक-लहसुन का पेस्ट और दही मिलाया जाता है. इसके बाद इसे कम से कम एक घंटे के लिए ढककर रख दिया जाता है. पहाड़ों में अक्सर मटन को रातभर मैरीनेट किया जाता है, जिससे मसाले अंदर तक समा जाते हैं. दही मटन को नरम बनाता है और पकने के बाद ग्रेवी को गाढ़ापन देता है. मैरीनेशन जितना अच्छा होगा, चूल्हा मटन उतना ही स्वादिष्ट बनेगा.
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लकड़ी के चूल्हे पर पकाने का तरीका इस रेसिपी की आत्मा है. सबसे पहले लोहे या मोटे तले की कड़ाही को चूल्हे पर रखा जाता है. इसमें सरसों का तेल डालकर तेज गर्म किया जाता है, ताकि तेल की कड़वाहट खत्म हो जाए. इसके बाद जाख्या या जीरा डालकर प्याज भुने जाते हैं. प्याज जब हल्के भूरे हो जाएं, तब मैरीनेट किया हुआ मटन डाल दिया जाता है. धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए मटन को भुना जाता है, जिससे वह तेल छोड़ने लगे. यही प्रक्रिया चूल्हा मटन को खास बनाती है.

कुमाऊं के चूल्हा मटन में जल्दबाजी की कोई जगह नहीं होती. इसे हमेशा धीमी आंच पर पकाया जाता है. मटन को बीच-बीच में थोड़ा पानी डालकर गलाया जाता है. लकड़ी की आंच धीरे-धीरे मटन को अंदर तक पकाती है और हड्डियों से स्वाद निकालती है. लगभग डेढ़ से दो घंटे में मटन पूरी तरह गल जाता है. इस दौरान ग्रेवी गाढ़ी और खुशबूदार हो जाती है. यही स्लो कुकिंग तकनीक चूल्हा मटन को शहरों के प्रेशर कुकर मटन से अलग और ज्यादा स्वादिष्ट बनाती है.

चूल्हा मटन में पहाड़ी मसालों का इस्तेमाल इसे अलग पहचान देता है. भांग के बीज की चटनी या पिसा हुआ भांग का मसाला ग्रेवी में हल्की क्रीमी टेक्सचर लाता है. जाख्या का तड़का स्वाद को और गहरा करता है. कुछ घरों में तिमूर का तड़का भी लगाया जाता है. ऐसे कई हिमालयी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल मटन बनाने में किया जाता है. जिससे इसका स्वाद और भी गहरा हो जाता है.

कुमाऊं में चूल्हा मटन को सादगी के साथ परोसा जाता है. इसे मंडुए की रोटी, झंगोरे की खीर या सादे चावल के साथ खाया जाता है. ऊपर से हरा धनिया या पहाड़ी प्याज डालकर सजाया जाता है. कई जगहों पर इसके साथ भांग की चटनी या मूली का सलाद भी दिया जाता है. चूल्हे की हल्की धुएं वाली खुशबू मटन के स्वाद को और बढ़ा देती है. यही पारंपरिक परोसने का तरीका आज शहरों के ढाबों और रेस्टोरेंट्स में भी अपनाया जा रहा है.

अब कुमाऊं का चूल्हा मटन सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहा. शहरों में लोग पारंपरिक और देसी स्वाद की तलाश में इस रेसिपी को घर पर बना रहे हैं. सोशल मीडिया और फूड ब्लॉग्स के जरिए यह रेसिपी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. लोग गैस पर भी इसे धीमी आंच में बनाकर चूल्हे जैसा स्वाद लाने की कोशिश करते हैं. पहाड़ी मटन का यह अंदाज उन लोगों को खास पसंद आ रहा है, जो कम मसाले और असली स्वाद वाले खाने के शौकीन हैं.