नए साल में तूफान मचाएगा भारत का शेयर बाजार, कौड़ी लगाकर करोड़ों बनाने का मौका! निलेश शाह ने कर दी भविष्यवाणी
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Share Market Projection : कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट के एमडी निलेश शाह ने कहा है कि आने वाले साल में भारतीय बाजार का रिटर्न पॉजिटिव रहने की पूरी संभावना है. उन्होंने निवेशकों से भरोसा बनाए रखने और बीते समय को भूलकर आगे बढ़ने की सलाह दी है.
निलेश शाह ने 2026 में भी शेयर बाजार के पॉजिटिव रिटर्न देने की संभावना जताई है. नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार ने साल 2025 में अपने निवेशकों को जमकर रिटर्न दिया है. अब कल से नया साल शुरू होने वाला है और दिग्गज एक्सपर्ट ने भविष्यवाणी की है कि साल 2026 में भी भारतीय शेयर बाजार अपने निवेशकों को मालामाल कर सकता है. कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा है कि नए साल में भी बाजार का रिटर्न पॉजिटिव रहने की पूरी संभावना है. उन्होंने कोटक म्यूचुअल फंड के सालाना परिदृश्य में बताया है कि ग्लोबल इकनॉमी भले ही उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत की ग्रोथ आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.
निलेश शाह ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मौद्रिक सपोर्ट मिलता रहेगा. आरबीआई भी रेपो रेट घटाने के लिए आगे भी तैयार दिख रहा है. ग्लोबल ग्रोथ भी पिछले साल के मुकाबले अब राहत महसूस कर रही है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखेगा. यह निवेशकों के लिए अच्छी खबर है. उन्होंने कहा कि आने वाला साल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव माहौल बनाएगा. लिहाजा निवेशकों को ग्लोबल चुनौतियों से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है.
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम
शाह ने कहा कि भले ही भारतीय शेयर बाजार में तेजी का रुख आगे भी बने रहने की संभावना है, लेकिन निवेशकों के सामने कुछ जोखिम भी है. खासकर ग्लोबल मार्केट से यह जोखिम ज्यादा दिख रहा है. खासकर महंगाई, तकनीक और भूराजनैतक कारणों की वजह से इसमें ज्यादा दिक्कतें आ सकती हैं. सबसे बड़ा जोखिम आज भी डिडॉलराइजेशन और महंगाई का दोबारा वापस आना है, जबकि एआई एक बुलबुले की तरह पूरी दुनिया को डिस्टर्ब कर रहा है. इन सभी के बीच चीन और अमेरिका के बीच छिड़ी आपसी जंग ने भी दुनिया को काफी ज्यादा जोखिम डाल रखा है.
चीन-अमेरिका को लेकर क्या बोले शाह
निलेश शाह ने चीन को लेकर लॉन्ग टर्म में इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव आने की ज्यादा आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि चीन में जारी आर्थिक जोखिम एक तरह से बूम और बर्स्ट जैसे हालात पैदा कर रहे हैं, जो लॉन्ग टर्म में पैसे बनाने में दिक्कतें पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा कि अगर आप आज चीन के शेयर बाजार में CSI 300 इंडेक्स को देखें तो यहां जो ट्रेड 17 साल पहले दिख रहा था, वैसा नहीं है. आज अगर चीन के बाजार कोई भी गिरावट आती है तो इसका सीध असर दुनिया के शेयर बाजारों पर भी दिखेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका की इकनॉमी एआई में भारी निवेश से फायदे में है, लेकिन सरकार पर बढ़ता कर्ज और दोबारा घाटा चिंता का विषय है. देखा जाए तो करेंसी का मूवमेंट और पूंजी का प्रवाह 2026 में भी उतार-चढ़ाव जैसे माहौल पैदा कर सकता है.
भारत के लिए क्या संदेश
निलेश शाह ने कहा कि भारत में पिछले एक दशक से ढांचागत बदलाव चल रहा है, जो महंगाई की ऊंची दर से उतरकर स्थिरता और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट तक पहुंचा है. ये हालात भारतीय अर्थव्यवस्था को ग्लोबल झटकों से बचाए रखने में कामयाब रहेगा. हालांकि, विकास दर की जमीनी हकीकत पर नजर जमाए रखनी होगी, क्योंकि अनुमान है कि भारत की विकास दर 6 से 8 फीसदी के आसपास बनी रहेगी. भारत फिर भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, लेकिन दोहरे अंक की विकास दर मुश्किल होगी. भारत की दूसरी चुनौतियां ये हैं कि निजी निवेश सुस्त पड़ रहा है और एआई की वजह से रोजगार के मोर्चे पर भी परेशानी पैदा हो रही है. भारत की ग्रोथ के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें