खौफनाक बदला! 72 राउंड फायरिंग, 69 गोलियां सीने में, बुलेटप्रूफ जैकेट बेकार, दिल दहला देने वाले मर्डर की कहानी

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नई दिल्ली. दक्षिणी दिल्ली के आया नगर में बीते 30 नवंबर को हुए मर्डर केस में बड़ा खुलासा हुआ है. इस हत्याकांड में 72 राउंड फायरिंग हुई थी. खास बात यह है कि मरने वाले शख्स के शरीर में 69 गोलियां दागी गई थी. इस हत्याकांड में 52 साल के रतन लोहिया नाम के शख्स की मौत हो गई थी. दिल्ली पुलिस को इस हत्याकांड में अब कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के सुराग मिले हैं. कॉन्ट्रैक्ट देने वाला भी एक लोहिया परिवार ही था, जिसके मुखिया की मई में हत्या कर दी गई थी. सूत्रों के मुताबिक पुलिस को ऐसे इनपुट मिले हैं कि रतन की हत्या के लिए विदेश में बैठे गैंगस्टर्स को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. रतन हत्याकांड में शामिल शूटरों की तलाश में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल टीमें लगी हुई हैं. जानिए दिल्ली को दहलाने वाले इन दो हत्याकांड की जांच कहां तक पहुंची और दोनों परिवारों में अब कैसा माहौल है?

दक्षिण दिल्ली और गुरुग्राम की सीमा पर बसे आया नगर गांव की संकरी गलियां आज खौफ और सन्नाटे की गवाह बनी हुई हैं. यहां लोहिया उपनाम साझा करने वाले दो परिवारों के बीच छिड़ी प्रतिशोध की अग्नि ने अब तक दो की जान ले ली है. इस रंजिश का सबसे भयावह मंजर 30 नवंबर की सुबह देखने को मिला, जब 52 वर्षीय डेयरी मालिक रतन लोहिया को सरेराह गोलियों से भून दिया गया. यह दिल्ली के आपराधिक इतिहास की शायद पहली ऐसी वारदात थी, जहां एक ही व्यक्ति पर 72 राउंड फायरिंग की गई और उसके शरीर से 69 गोलियां निकाली गईं.

दो घर, दो कहानियां और एक खूनी अंत

आया नगर के बाबा मोहल्ला में रतन लोहिया का साधारण दो मंजिला मकान अब वीरान सा है. घर की दीवारों पर लगे सीसीटीवी कैमरे बाहर की हर हरकत पर नजर रखते हैं, लेकिन घर के भीतर सन्नाटा पसरा है. रतन की पत्नी कमलेश और बेटी दीपिका अब केवल डर के साये में जी रही हैं. वहीं, उनसे महज एक किलोमीटर दूर अरुण लोहिया की आलीशान कोठी है, जिसके बाहर अब दिल्ली पुलिस के दो जवान तैनात रहते हैं. इन दोनों घरों के मुखिया अब इस दुनिया में नहीं हैं और दोनों की हत्या का तरीका लगभग एक जैसा ही था.

विवाद की जड़

दो परिवारों में खूनी खेल की शुरुआत साल 2020 के लॉकडाउन के दौरान हुई थी. रतन का बेटा दीपक, जो स्कूल वैन चलाता था, बेरोजगार हो गया और अरुण लोहिया के करीब आ गया. परिवार का आरोप है कि दीपक ने अरुण के रियल एस्टेट कारोबार में लगभग 25 लाख रुपये निवेश किए थे. जब दीपक ने अपने पैसे वापस मांगे तो दोनों के बीच कड़वाहट बढ़ गई. अप्रैल 2024 में दीपक की बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके बाद उसने अरुण के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया. पंचायत ने सुलह की कोशिश की, लेकिन दोनों के बीच दुश्मनी खत्न नहीं हुई.

पहला खून और प्रतिशोध की शुरुआत

15 मई 2024 को छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास अरुण लोहिया की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. इस मामले में पुलिस ने रतन के बेटे दीपक और उसके साथियों को गिरफ्तार किया. दीपक के जेल जाने के बाद भी दुश्मनी खत्म नहीं हुई. रतन को लगातार धमकियां मिल रही थीं. अपनी जान बचाने के लिए रतन ने महरौली के एक रिटायर्ड फौजी से बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदी थी. वह रोज डेयरी जाते समय इसे पहनते थे, उन्हें लगा था कि यह लोहे का कवच उन्हें बचा लेगा.

30 नवंबर और 72 गोलियों का तांडव

30 नवंबर को सुबह-सुबह जब रतन अपनी डेयरी की ओर जा रहे थे, तभी एक निसान मैग्नाइट कार में आए पांच हमलावरों ने उन्हें घेर लिया. हमलावरों को पता था कि रतन ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी है, इसलिए उन्होंने सबसे पहले उनके सिर पर तीन गोलियां मारीं. इसके बाद करीब 4 मिनट तक अंधाधुंध फायरिंग की गई. हमलावरों ने मैगजीन बदल-बदल कर गोलियां बरसाईं. सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों को रतन के शरीर, कपड़ों और जैकेट से 69 गोलियां निकालने में दो घंटे का समय लगा.

जांच में गैंगस्टरों का कनेक्शन

दिल्ली पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण हत्या नहीं थी. इसमें हाई-टेक विदेशी हथियारों जैसे जिगाना और बेरेटा पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया. पुलिस को शक है कि अरुण के चाचा कमल ने इस हत्याकांड की साजिश रची और इसके लिए पश्चिमी यूपी के कुख्यात रणदीप भाटी गैंग के शूटरों की मदद ली. इसके अलावा, अमेरिका में बैठे गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया और हिमांशु भाऊ गैंग की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है. दिल्ली पुलिस का दावा है कि रतन की हत्या में शामिल कमल और अन्य शूटरों ने भाटी गैंग से पनाह मांगी थी. उनकी आखिरी लोकेशन ग्रेटर नोएडा में मिली थी. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल और साउथ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की टीमें भाटी गैंग के कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी हैं.

बुलेटप्रूफ जैकेट क्यों हुई फेल?

पुलिस के अनुसार, रतन जो जैकेट पहन रहे थे, वह लाइटवेट ‘लेवल 2 बुलेटप्रूफ जैकेट थी, जो .357 मैग्नम हैंडगन की गोलियां रोक सकती है. लेकिन यह विदेशी पिस्टल जैसे जिगाना या बेरेटा से चली 9 एमएम या .30 बोर की गोलियों से बचाव नहीं कर सकती. 72 में से 45 गोलियां रतन के शरीर में घुसीं, जबकि 15-20 गोलियां कपड़ों में फंसी रहीं.

बचे हुए परिवार का डर

इस घटना के एक महीने के बाद आज रतन का परिवार पूरी तरह टूट चुका है. रतन के परिवार ने छोटे बेटे को सुरक्षा के डर से विदेश भेज दिया है. हालांकि, उन्होंने अरुण की हत्या की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया. रतन की पत्नी कमलेश के मुताबिक अरुण के कई दुश्मन थे. अब सिर्फ वे ही बची हैं और हमेशा डर के साए में जी रही हैं. रात को नींद नहीं आती, हर आवाज से डर लगता है. अगर वे घर में घुस आए तो?

कब खत्म होगी दोनों परिवारों की खूनी रंजिश?

दो परिवारों की खूनी रंजिश की कहानी यही खत्म नहीं होती. रतन, जो कभी अपनी डेयरी और यूट्यूब चैनल पर भजन गाने के लिए जाने जाते थे, आज एक ऐसी जंग की भेंट चढ़ गए जिससे उनका सीधा लेना-देना भी नहीं था. उनकी बेटी दीपिका कहती हैं, ‘मेरे पिता ने तो दीपक से रिश्ता भी तोड़ लिया था, फिर उन्हें क्यों मारा गया? अब हमारे घर में कोई मर्द नहीं बचा, हमारी जिंदगी बर्बाद हो गई है’. पुलिस अब तक मुख्य हमलावरों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बरकरार है.

कुलमिलाकर आया नगर में रतन लोहिया और अरुण लोहिया के घरों में डर का माहौल है. रतन के घर में पत्नी कमलेश और बेटी दीपिका जैसे खो सी गई हैं और ऊपर से सिर्फ बच्चों की आवाजें आती हैं, जो सर्दी की छुट्टियों में अपनी मां से मिलने आए हैं. वहीं, रतन लोहीया के घर से एक किलोमीटर की दूरी पर अरुण लोहिया का घर पर भी सन्नाटा पसरा है. अरुण का घर किसी हवेली जैसा है. ऊंची ईंटों और कांटेदार तारों की दीवार के पीछे से सफेद ग्रीकन खंभे झांकते हैं. खिड़कियों के पीछे कोई हलचल नहीं दिखती, शाम ढलने के बाद भी वहां अंधेरा ही रहता है. बाहर दो पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं. इन दोनों घरों में कुछ महीनों के भीतर दो हत्याएं हो चुकी हैं.

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