Success Story: पहली गेंद पर विकेट, IPL में नहीं मिली जगह, फिर बना डाला करोड़ों का खेल साम्राज्य

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नई दिल्ली. अगस्त 1997, स्थान- कोलंबो. क्रिकेट स्टेडियम में सन्नाटा, दिल की धड़कन कानों में गूंज रही थी और हाथ में थी लाल गेंद. निलेश कुलकर्णी ने जैसे ही रन-अप लिया, किसी को अंदाजा नहीं था कि इतिहास बनने वाला है. पहली ही गेंद पर एज लगा और टेस्ट क्रिकेट में पहली गेंद पर विकेट लेने वाले भारत के इकलौते गेंदबाज का नाम दर्ज हो गया. लगा कि अब शोहरत, पैसा और लंबा करियर सब कुछ यहीं से शुरू होगा. लेकिन IPL में नाम नहीं आया. मैदान से बाहर होना पड़ा. यहीं से खत्म नहीं, बल्कि निलेश कुलकर्णी की असली कहानी शुरू हुई और करोड़ों का खेल साम्राज्य खड़ा कर दिया.

निलेश कुलकर्णी ने श्रीलंका के बल्लेबाज मार्वन अटापट्टू को पहली ही गेंद पर आउट कर इतिहास रच दिया. कोलंबो की उस पिच पर निलेश की परीक्षा यहीं खत्म नहीं हुई. सनथ जयसूर्या और रोशन महानामा की रिकॉर्ड साझेदारी के सामने उन्होंने करीब 70 ओवर गेंदबाजी की, लेकिन पहली गेंद का वही विकेट उनकी पूरी पारी का इकलौता विकेट रहा. श्रीलंका ने 952 रन बना दिए और यह मैच भारत के लिए नहीं, बल्कि श्रीलंका के रिकॉर्ड के लिए याद किया गया.

सिर्फ 3 टेस्ट खेल पाए निलेश कुलकर्णी
निलेश कुलकर्णी भारत के लिए सिर्फ 3 टेस्ट खेल पाए. 4 साल बाद चेन्नई टेस्ट में मैथ्यू हेडन उनका आखिरी टेस्ट विकेट बने. उसी मैच में हरभजन सिंह ने 15 विकेट लेकर सुर्खियां बटोरीं और निलेश फिर घरेलू क्रिकेट की ओर लौट गए. इंटरनेशनल करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने मुंबई के लिए 357 फर्स्ट क्लास विकेट लिए. यह आंकड़े बताते हैं कि हुनर की कभी कमी नहीं थी. करियर के आखिरी दौर में निलेश को IPL में मौका नहीं मिला.

कैसे आया स्पोर्ट्स मैनेजमेंट का आइडिया
एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ डीवाई पाटिल स्टेडियम में मैच देखने गए. वहां उन्होंने देखा कि भारत की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग को चलाने के लिए ज्यादातर विदेशी प्रोफेशनल्स काम कर रहे थे. तभी उन्हें समझ आया कि देश में खेल खेलने वाले तो हैं, लेकिन खेल को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज करने वाले लोग तैयार नहीं हैं. यहीं से एक नए विचार ने जन्म लिया. निलेश ने तय किया कि वह भारत में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की पढ़ाई को एक मजबूत प्लेटफॉर्म देंगे. करीब डेढ़ साल तक उन्होंने भारत और विदेशों में रिसर्च की, सिलेबस तैयार किया और भारतीय खेल व्यवस्था के हिसाब से कंटेंट बनाया. 2010 में उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट (IISM) की शुरुआत की.

शुरू किया देश का पहला स्पोर्ट्स मैनेजमेंट डिग्री प्रोग्राम
शुरुआत आसान नहीं थी. माता-पिता को समझाना मुश्किल था कि स्पोर्ट्स मैनेजमेंट भी एक गंभीर करियर हो सकता है. लेकिन निलेश डटे रहे. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर देश का पहला स्पोर्ट्स मैनेजमेंट डिग्री प्रोग्राम शुरू कराया. धीरे-धीरे सरकार और यूनिवर्सिटीज ने भी इस फील्ड को मान्यता दी. आज IISM से निकले छात्र IPL, ISL, प्रो कबड्डी और सरकारी खेल योजनाओं में काम कर रहे हैं. निलेश की मुख्य कंपनी Eduhub Education Private Limited ने वित्त वर्ष 2024 तक करीब 18.9 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया. इसके अलावा उनके स्पोर्ट्स और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कई वेंचर्स हैं.

राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित
2020 में IISM को राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.  यह पहली बार था जब किसी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट संस्थान को इतना बड़ा राष्ट्रीय सम्मान मिला. निलेश आज भी अपने छात्रों को वही कहानी सुनाते हैं- पहली गेंद पर मिले विकेट की नहीं, बल्कि उन 69.5 ओवरों की, जिनसे उन्हें कुछ नहीं मिला. वह कहते हैं कि असली सीख असफलता से मिलती है. IPL में रिजेक्ट होना उनके लिए अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत साबित हुआ. 52 साल की उम्र में भी निलेश फिट रहते हैं, योग करते हैं और अपने छात्रों को सिखाते हैं कि खेल खत्म होने के बाद भी जिंदगी की एक सेकंड इनिंग होती है. जिस क्रिकेट ने उन्हें निराश किया, उसी क्रिकेट ने उन्हें भारत का करोड़ों के स्पोर्ट्स एजुकेशन एम्पायर बनाने की प्रेरणा दी.

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