अमीरों की रेकी, ‘हवा’ में सौदा, ‘बाबा जी’ गैंग ने करोड़पति महिला से कैसे लूटे 12 करोड़? सुनकर दंग रह जाएंगे आप

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नई दिल्ली. दिल्ली अब दिलवालों का शहर नहीं रहा. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अब ठग, लूटेरों और गैंगस्टरों का शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है. यहां पर आम आदमी से लेकर खास भी अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने एक एक करोड़पति महिला की शिकायत पर एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो करोड़पतियों को ‘हवा’ में ही फ्लैट बनाकर बेच देता था. इस गिरोह ने गुड़गांव में स्थित दिल्ली-एनसीआर की सबसे आलीशान सोसाइटी डीएलएफ कैमेलियास (DLF Camellias) में उस प्रॉपर्टी को 12 करोड़ में बेच दिया जिसका अस्तित्व ही नहीं था. अब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड मोहित गोगिया समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना राम सिंह उर्फ ‘बाबा जी’ की तलाश जारी है.

दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि यह पूरा खेल फर्जी बैंक नीलामी और जाली दस्तावेजों के सहारे खेला गया. इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत 13 जून 2025 को हुई, जब एक शिकायतकर्ता ने ‘एमजी लीजिंग एंड फाइनेंस’ के मालिक मोहित गोगिया और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई. आरोपियों ने पीड़िता को एसबीआई (SBI) बैंक के फर्जी नीलामी दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि उनकी फर्म ने ‘DLF Camellias’ में एक प्रॉपर्टी खरीदी है. झांसे में आकर महिला ने अगस्त से अक्टूबर 2024 के बीच आरटीजीएस (RTGS) और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 12.04 करोड़ रुपये आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए. बाद में बैंक ने पुष्टि की कि दिखाए गए सभी सेल सर्टिफिकेट और रसीदें पूरी तरह से जाली थीं.

200 करोड़ का बड़ा जाल और ‘बाबा जी’ का कनेक्शन

दिल्ली पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग केवल 12 करोड़ तक सीमित नहीं है. मास्टरमाइंड मोहित गोगिया और फरार सरगना राम सिंह उर्फ ‘बाबा जी’ ने मिलकर दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, गोवा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. राम सिंह उर्फ बाबा जी ‘बाबा जी फाइनेंस’ नाम की एक फर्म चलाता है, जो ठगी के पैसे को ऊंची ब्याज दरों पर मार्केट में घुमाने का काम करती थी. पुलिस ने मोहित के पास से दो ऐसी लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं, जिन्हें ठगी की रकम से खरीदा गया था और जिनका इस्तेमाल बाबा जी के काफिले में पायलट कारों के रूप में किया जाता था.

मुम्बई से उत्तराखंड तक पीछा और गिरफ्तारी

डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम के निर्देशन में इंस्पेक्टर सत्येंद्र पूनिया और सोहन लाल की टीम ने इस गैंग को पकड़ने के लिए तकनीक और मैनुअल इंटेलिजेंस का सहारा लिया. मुख्य आरोपी मोहित गोगिया गिरफ्तारी के डर से मुंबई भाग गया था. जब वह मुंबई से उत्तराखंड की ओर भाग रहा था, तभी पुलिस ने उसे ऋषिकेश-देहरादून रोड पर डोईवाला के पास दबोच लिया. मोहित की निशानदेही पर विशाल मल्होत्रा, सचिन गुलाटी, अभिनव पाठक और भरत छाबड़ा को भी गिरफ्तार किया गया है.

शातिर तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग

पूछताछ में पता चला कि विशाल मल्होत्रा और सचिन गुलाटी ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने (लेयरिंग) के लिए किया था, जिसके बदले उन्हें मोटा कमीशन मिलता था. अभिनव पाठक ने पीड़िता को मुख्य आरोपी से मिलवाया था, जबकि भरत छाबड़ा ने अपने लैपटॉप पर वे फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे, जिन्हें देखकर कोई भी धोखा खा जाए. मास्टरमाइंड मोहित गोगिया का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी काफी लंबा है. उसके खिलाफ दिल्ली, गोवा और पंजाब में धोखाधड़ी के 16 से ज्यादा मामले दर्ज हैं.

38 साल का मोहित गोगिया दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर निवासी है, जो विवादित या फर्जी प्रॉपर्टी की पहचान कर जाली दस्तावेज बनाता था. ठगी की रकम का 40% हिस्सा इसे मिलता था. इस सिंडिकेट का मुख्य हैंडलर राम सिंह उर्फ बाबा जी था, जो 60% मुनाफा रखता था और फाइनेंस फर्म के जरिए पैसा ठिकाने लगाता था. 33 साल का भारत छाबड़ा जाली सेल सर्टिफिकेट और बैंक लेटर्स तैयार करने वाला एक्सपर्ट था. पुलिस ने इन सभी आरोपियों के बैंक खातों को ‘फ्रीज’ कर दिया है. फिलहाल पुलिस की टीमें राम सिंह उर्फ बाबा जी और इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों की तलाश में देशभर में छापेमारी कर रही हैं. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है.

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