देसी स्वाद का खजाना! इसके आगे मिक्सी भी फेल! सिलबट्टे में ऐसे बनाएं लाजवाब चटनी – Uttar Pradesh News
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Silbatta Chutney : भारतीय रसोई की पहचान न केवल मसालों से, बल्कि उन्हें तैयार करने के तरीकों से होती है. सिलबट्टे की चटनी उसी पहचान का एक अहम हिस्सा है. जब पत्थर के सिल पर ताज़ी सामग्री पीसी जाती है, तो रसोई में एक अलग ही खुशबू फैल जाती है, जो सीधे दिल और भूख दोनों को जगा देती है. आगे विस्तार से जानिए…

बात अगर सिलबट्टा की हो, तो यह कोई नया औज़ार नहीं, बल्कि सदियों से भारतीय घरों की शान रहा है. एक समय था, जब हर घर में सुबह की शुरुआत सिलबट्टे की आवाज़ से होती थी. महिलाएं ताज़ी चटनी इसी सिलबट्टे पर पीसती थीं और वही स्वाद पूरे दिन के खाने को खास बना देता था.

आज भले ही मिक्सी हर रसोई में मौजूद हो, लेकिन शायद सच्चाई यहीं है कि सिलबट्टे पर पीसी चटनी का मुकाबला कोई मशीन नहीं कर सकती हैं. मिक्सी तेज़ चलती है, गर्मी पैदा करती है, जबकि सिलबट्टा धीरे-धीरे सामग्री को पीसकर उसका असली स्वाद निखरता है.

हरी धनिया, मिर्च, लहसुन, प्याज और टमाटर जब सिलबट्टे पर एक साथ आपस में मिलते हैं, तो उनका स्वाद ज्यादा तीखा, चटपटा और संतुलित बनता है. पराठे, दाल-चावल या खिचड़ी के साथ इस चटनी को खाने का मज़ा कई गुना बढ़ जाता है.
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बलिया शहर निवासी बुजुर्ग डॉ. शिवकुमार सिंह ने कहा, सिलबट्टे पर पीसने से पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं. इसमें न तो ज़्यादा गर्मी होती है और न ही तेज़ घर्षण होता हैं. इसी वजह से चटनी में पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल्स बेहतर तरीके से शरीर को मिलते है.

शहरों में भले ही मिक्सी का चाल चलन बढ़ गया हो, लेकिन गांवों और कस्बों में आज भी सिलबट्टे की चटनी खाने और देखने को मिल जाती है. त्योहार, शादी या खास मौके हों, वहां देसी स्वाद के लिए आज भी लोग सिलबट्टे का ही उपयोग करते हैं.

सिलबट्टे की चटनी न केवल खाने की चीज़ है, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ी हुई है. यह हमारी दादी-नानी की रसोई, मिट्टी की खुशबू और पारिवारिक अपनापन को याद दिलाती है. इसी वजह से यह परंपरा आज भी लोगों के दिलों में रचा और बसा हुआ है.

कहा जाता हैं कि पृथ्वी गोल हैं, हर जगह घूमकर केंद्र पर ही आना है. आज जब लोग फिर से पारंपरिक और प्राकृतिक चीज़ों की ओर लौट रहे हैं, ऐसे में सिलबट्टे की चटनी एक बार फिर चर्चा में है. अगर आप भी असली देसी स्वाद और सेहत का मज़ा लेना चाहते हैं, तो कभी सिलबट्टे पर चटनी ज़रूर पीसकर खाएं.