पांच साल में बनीं वो 4 फिल्में, 2 सुपरहिट-2 कल्ट मूवी, एक के सामने नहीं टिक पाई सनी देओल की मूवी, जीते 43 अवॉर्ड – khosla ka ghosla company chak de india 4 bollywood films made within 5 years 2 turn superhit 2 became cult must watch movie jaideep shahni movies
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Bollywood Must Watch Superhit Movies : वैसे तो हर फिल्म की अपनी डेस्टिनी होती है. फिर भी अगर राइटर-डायरेक्टर किसी फिल्म को लेकर बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं तो सफलता भी मिलती है. राइटर जितनी अच्छी कसी हुई स्क्रिप्ट-स्क्रीनप्ले लिखेगा, फिल्म के सफल होने की उम्मीद उतनी ही बढ़ जाती है. बॉलीवुड में 50-60 के दशक में ख्वाजा अहमद अब्बास और वीपी साठे की जोड़ी बतौर स्टोरी राइटर फेमस थी. 70-80 के दशक में सलीम-जावेद की लिखी स्क्रिप्ट फिल्म की सफलता की गारंटी थी. 2000 के दशक में ऐसे ही एक राइटर ने बॉलीवुड में कदम रखा. इस नौजवान स्क्रीनराइटर ने सिर्फ पांच साल में ऐसी 4 फिल्में लिखीं, जो बॉक्स ऑफिस पर छा गईं. दो फिल्में जहां सुपरहिट रहीं, वहीं दो फिल्में फ्लॉप होकर भी दर्शकों के दिल में बस गईं. इन फिल्मों को टीवी-यूट्यूब पर खूब देखा गया. चारों फिल्मों ने 81 से ज्यादा अवॉर्ड जीते. आइये जानते हैं इन सभी फिल्मों से जुड़े रोचक किस्से…….

बॉलीवुड में लीक से हटकर जब भी अच्छी फिल्में आईं दर्शकों ने हमेशा ही उन पर प्यार बरसाया है. 70-80 के दशक में राइटर सलीम-जावेद की जोड़ी ऐसी ही फिल्में लिखने के लिए जानी जाती थी. दिल्ली का एक नौजवान दिल में कई अरमान लेकर मायानगरी मुंबई पहुंचा. 2000 में फरदीन खान की ‘जंगल’ फिल्म से पहला ब्रेक मिला. फिल्म नहीं चली लेकिन अपनी दूसरी ही फिल्म से बॉलीवुड इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. इस युवा स्क्रीनराइटर का नाम है : जयदीप साहनी. जयदीप ने सिर्फ पांच साल के अंतराल में ऐसी चार फिल्में लिखीं जिनकी बहुत चर्चा हुई. दो फिल्में सुपरहिट रहीं. दो कल्ट मूवी साबित हुईं. ये फिल्में थीं : कंपनी (2000), बंटी और बबली (2005), खोसला का घोसला (2006) और चदे दे! इंडिया (2007). इन चारों फिल्मों ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 80 से ज्यादा अवॉर्ड जीते. दो नेशनल अवॉर्ड भी जीते. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स……..

सबसे पहले डायरेक्टर-प्रोड्यूसर रामगोपाल वर्मा की मूवी ‘कंपनी’ की बात करते हैं जो कि 12 अप्रैल 2002 को रिलीज हुई थी. इसकी स्क्रिप्ट जयदीप साहनी ने लिखी थी. मुंबई अंडरवर्ल्ड के ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, दाऊद इब्राहिम-छोटा राजन के बीच गैंगवार को दिखाती यह फिल्म आज कल्ट मूवी का स्टेटस ले चुकी है. इस फिल्म कहानी, किरदार, घटनाएं, लोकेशन इतने रियलिस्टिक थे कि दर्शक रील और रियल का फर्क भूल गए थे. राम गोपाल वर्मा ने इससे पहलए 1998 में सत्या मूवी बनाई थी जिसमें मनोज बाजपेयी ने भीखू म्हात्रे का कालजयी किरदार निभाया था. कंपनी मूवी में अजय देवगन, विवेक ओबेरॉय, मनीषा कोइराला, अंतरा माली, मलयालम सिनेमा के दिग्गज स्टार मोहनलाल, सीमा विश्वास और आकाश खुराना, राजपाल यादव और विजय राज जैसे एक्टर नजर आए थे.

रामगोपाल वर्मा और बोनी कपूर प्रोड्यूसर थे. म्यूजिक संदीप चौटाला का था. फिल्म का एक गाना ‘गंदा है पर धंधा है ये’ जयदीप साहनी ने ही लिखा था. 8 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 25 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह उस साल की आठवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. कंपनी में गैंगस्टर की लाइफ को काफी क्लासिक दिखाया गया. बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के बीच संबंधों को भी दिखाया गया. रामगोपाल वर्मा ने मुंबई सीरियल बम धमाकों के आरोपी और सनम फिल्म के प्रोड्यूसर-होटल कारोबारी हनीफ कड़ावाला की ओर से छोटा राजन-दाऊद इब्राहिम के बीच हुए गैंगवॉर की बताई कहानी के आधार पर कंपनी फिल्म का प्लॉट तैयार किया था. 1998 के बाद मुंबई में हुए गैंगवार पर कंपनी मूवी बनाई गई थी. कंपनी फिल्म में साउथ के सुपरस्टार मोहनलाल ने मुंबई पुलिस कमिश्नर का रोल निभाया था. रियल लाइफ में यह किरदार मुंबई पुलिस कमिश्नर धनुषकोड़ी शिवानंदन से इंस्पायर्ड था.
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कंपनी फिल्म को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कुल 22 अवॉर्ड मिले थे. 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड शामिल थे. बेस्ट डायलॉग का फिल्मफेयर अवॉर्ड जयदीप साहनी को मिला था. जयदीप साहनी को बेस्ट स्टोरी का आइफा अवॉर्ड भी मिला था. कंपनी फिल्म को लेकर जयदीप ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं दिल्ली से था. मुझे ऑर्गेनाइज क्राइम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा थे तो उनका सहारा था. वो शुरू से इन सबमें रुचि रखते थे. सत्या बना चुके थे, इसलि कहानी लिखने में उतनी दिक्कत नहीं हुई. काम चैलेजिंग जरूर था.’ इधर, रामगोपाल वर्मा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा थ,’एक प्रोड्यूसर ने बताया कि वो दाउद और छोटा राजन को जानता है. उसने बताया कि दोनों के बीच प्यार है और नफरत भी. इसी चीज को मैंने कंपनी फिल्म में दिखाया है.’

2005 में जयदीप साहनी की लिखी एक कहानी पर एक और फिल्म आई. इस फिल्म का नाम ‘बंटी और बबली’ था. फिल्म का डायरेक्शन कानपुर के शाद अली ने किया था. कहानी का मूल आइडिया आदित्य चोपड़ा ने दिया था जिसे जयदीप साहनी ने पूरा किया. प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा ही थे. इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, रानी मुखर्जी और अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. यह फिल्म 1967 की अमेरिकन फिल्म बोनी एंड क्लाइड से इंस्पायर्ड थी. अमेरिकन फिल्म को बिल्कुल भारतीय अंदाज में पेश किया गया. म्यूजिक शंकर-एहसान-लॉय का था. गीत गुलजार ने लिखे थे.

फिल्म का एक गाना’कजरारे-कजरारे’ बहुत ही पॉप्युलर हुआ था. यह 2000 के दशक का सबसे आइकॉनिक सॉन्ग माना जाता है. ऐश्वर्या राय की खूबसूरती बेमिसाल थी. फिल्म का बजट करीब 12.5 करोड़ था. मूवी ने 64 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 2005 में सबसे ज्यादा पैसा कमाने के मामले में दूसरे नंबर थी. बंटी और बबली को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 22 अवॉर्ड्स जरूर मिले थे लेकिन फिल्म कोई भी फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं जीत पाई थी.

2006 में जयदीप की लिखी कहानी पर एक और फिल्म ‘खोसला का घोसला’ सामने आई. यह फिल्म 22 सितंबर 2006 में रिलीज हुई थी. दिबाकर बनर्जी डायरेक्टर थे. बजट 3.5 करोड़ का था. इस फिल्म मे अनुपम खेर, बोमन ईरानी, परवीन डबास, विनय पाठक, तारा शर्मा, रणवीर शौरी लीड रोल में नजर आए थे. दो साल मूवी को किसी डिस्ट्रीब्यूटर ने फिल्म को खरीदा ही नहीं. रिलीज अटक गई. दिबाकर बनर्जी और जयदीप सहनी ने हार नहीं मानी. आज यह फिल्म कल्ट क्लासिक बन गई है. खोसला का घोसला को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था.

खोसला का घोसला फिल्म जयदीप साहनी ने अपने पर्सनल अनुभव के आधार पर लिखी थी. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘फिल्म का फर्स्ट हॉफ जो दिखाई देता है, वो घटना दिल्ली में हमारी फैमिली में आंटी के साथ हुई थी. उस समय हम स्कूल में पढ़ते थे. तब मैंने कुछ आइडिया लगाया था. कजिन सिस्टर की शादी थी तब पता चला कि उनके प्लॉट पर किसी का कब्जा हो गया है. दिमाग में जो खुराफात थी, वो दूसरे हॉफ में लिखी. खोसला का घोसला फिल्म को बनवाने में बहुत मुश्किल आई. उस समय ऐसी फिल्में नहीं बनती थीं. गाना-एक्शन सीक्वेंस-विलेन नहीं था. पिक्चर किसी तरह टूटकर बनाई. म्यूजिक के पैसे आए थे तो मैंने जल्दी से गाने लिखे थे. फिल्म बन गई तो दो-ढाई साल रिलीज ही नहीं हुई. डिस्ट्रीब्यूटर्स कहते थे कि ये तो कोई फिल्म ही नहीं है. फाइनली फिल्म रिलीज हुई और आज तक लोगों को पसंद है.’

खोसला का घोसला रिलीज होने के एक साल बाद ही जयदीप साहनी की एक की लिखी कहानी पर आई फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. 10 अगस्त 2007 को रिलीज हुई ‘चक दे इंडिया’ एक स्पोर्ट्स फिल्म थी जिसका डायरेक्शन शिमित अमीन ने किया था जिनका जन्म युगांडा में हुआ था. फिल्म को यशराज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में शाहरुख खान हॉकी कोच कबीर खान की भूमिका में थे. फिल्म में कोई भी रोमांटिक सीन-सॉन्ग नहीं था. म्यूजिक सलीम-सुलेमान का था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि गीत भी जयदीप साहनी ने ही लिखे थे. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘कुछ करिये कुछ करिये….चक दे इंडिया’ नेशनल एंथम बन गया था. बेसिक धुन आदित्य चोपड़ा ने ‘जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा’ से तैयार की थी. करीब 22 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 101 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. इसे आईएमडीबी पर 8.1 रेटिंग मिली हुई है. फिल को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कुल 43 अवॉर्ड मिले थे. चक दे इंडिया जिस दिन रिलीज हुई थी, उसी दिन सनी देओल की फिल्म ‘काफिला’ भी सिनेमाघरों में आई थी. चके दे इंडिया जहां सुपरहिट रही, वहीं ‘काफिला’ डिजास्टर फिल्म साबित हुई थी. सनी देओल की फिल्म शाहरुख खान की फिल्म के आगे टिक नहीं सकी.

चक दे इंडिया का आइडिया जयदीप साहनी को 2004 में एक न्यूजपेपर में छपे आर्टिकल से आया था जो कि महिला हॉकी टीम की जीत के बारे में था. जयदीप साहनी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मुझे तो पता भी नहीं था कि इंडिया में लड़कियों की हॉकी टीम है. मैंने तो सिर्फ एक पेपर में एक आर्टिकल पढ़ा था. उसको देखकर अजीब फीलिंग आई. क्रिकेट में हार जाते हैं तो फ्रंट पेज पर खबर होती है. अपने इंटरेस्ट की वजह से मैंने दो साल में टीमों-स्टेडियम का पीछा करते-करते स्टोरी लिखी. मैं प्रोफेशनल रिसर्चर नहीं था. कोच-खिलाड़ी स्पोंसरशिप के भीख मांगते थे. पब्लिक की नजर में उनकी कोई वैल्यू नहीं थी. मैं अमेरिका में था, जब यहां पिक्चर खुली तो मैंने मुंबई में यश चोपड़ा को फोन लगाया. वो बोले कि कोई फिल्म देखने नहीं आया. संडे से हाउसफुल होने लगे.’