गेहूं-धान छोड़ किसानों ने अपनाई स्ट्रॉबेरी की खेती, बाजार में जबरदस्त डिमांड, सेहत के साथ कमाई का भी खजाना
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब धीरे-धीरे परंपरागत फसलों से हटकर स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है, क्योंकि बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाने वाली स्ट्रॉबेरी कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल बनकर उभर रही है, इसी वजह से किसान इसकी खेती को अपनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब धीरे-धीरे स्ट्रॉबेरी की खेती करने लगे हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती करने से किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है और बाजारों में इसकी अधिक डिमांड रहती है, क्योंकि स्ट्रॉबेरी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है. कम लागत में अधिक मुनाफा स्ट्रॉबेरी की खेती से कमाया जा सकता है.

स्ट्रॉबेरी की खेती करने को बढ़ावा देने के लिए किसानों को उद्यान विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाता है, जिससे किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर अपनी आय को दोगुना कर सकें. क्योंकि स्ट्रॉबेरी की खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है और इस मौसम में बाजारों में इसकी डिमांड भी अधिक होती है. स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है.

बांकेगंज ब्लॉक के रहने वाले यदुनंदन सिंह पुजारी इस समय स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वे पिछले कई वर्षों से लगातार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. बाजारों में स्ट्रॉबेरी ₹400 प्रति किलो के हिसाब से बिकती है. कम लागत में अधिक मुनाफा स्ट्रॉबेरी की खेती से कमाया जा सकता है. स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बलुई और दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है.
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परंपरागत फसलों की खेती अब धीरे-धीरे नगदी फसलों की ओर बदल रही है, जिसमें फल की बागवानी खासकर स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है. इस बदलाव से किसानों की कमाई में वृद्धि हो रही है. दरअसल, परंपरागत फसलों की तुलना में नगदी फसलों में अधिक मुनाफा होता है और कम समय में ज्यादा फायदा मिलता है.

किसान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस समय वह तीन बीघा जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. स्ट्रॉबेरी के पौधे पुणे से मंगवाए जाते हैं और तीन बीघा में करीब 1500 पौधे लगाए जाते हैं. बाजारों में स्ट्रॉबेरी की अच्छी डिमांड रहती है. जनपद खीरी के अलावा शाहजहांपुर, सीतापुर और लखनऊ तक खीरी की स्ट्रॉबेरी की मांग बनी रहती है, जिस कारण कम लागत में अधिक मुनाफा स्ट्रॉबेरी की खेती से हो रहा है.