Violence Against Bangladeshi Hindu | Bangladeshi Hindu Indian Border | दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल…अगला कौन? यूनुस के बाद अब तारिक रहमान से हिन्दुओं में खौफ, भारत से एक ही अपील – bangladesh protest violence against hindu minority muhammad yunus Tarique Rahman appeal to open indian border
Agency:एजेंसियां
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Violence Against Bangladeshi Hindu: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद शुरू हुआ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. BNP नेता तारिक रहमान की वापसी के बाद हिन्दू अल्पसंख्यकों में भय का माहौल और भी बढ़ गया है. हिंसा के शिकार हिन्दुओं ने अपनी जान बचाने के लिए भारत से भावुक अपील की है.
Violence Against Bangladeshi Hindu: बांग्लादेश में शेख हसीना की तख्तापलट के बाद से हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. बीएनपी नेता तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी से हिन्दुओं में भय और खौफ का माहौल बढ़ गया है. (फोटो: Reuters)Violence Against Bangladeshi Hindu: बांग्लादेश में जबसे शेख हसीना की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट हुआ है, उस वक्त से ही अल्संख्यक समुदाय खासकर हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं. युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद तो हिन्दुओं की सरेआम मॉब लिंचिंग कर दी गई है. BNP नेता तारिक रहमान की बंग्लादेश वापसी के बाद हिन्दुओं में खौफ और भी बढ़ गया है. इस बीच, हिंसा और लूटपाट से खौफजदा बांग्लादेश के हिन्दुओं ने भारत से सीमा को खोलने की अपील की है, ताकि वे अपनी जान बचा सकें. बांग्लादेश में हाल की हिंसक घटनाओं ने वहां रहने वाले हिंदू समुदाय को गहरे डर में धकेल दिया है. दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की लिंचिंग के बाद अल्पसंख्यक हिंदुओं के बीच असुरक्षा की भावना और तेज हो गई है. हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि कई हिंदू परिवार खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं और भारत से सीमाएं खोलने की अपील कर रहे हैं, ताकि संकट के समय उनके पास बच निकलने का रास्ता हो.
बांग्लादेश के रंगपुर, चटगांव, ढाका और मेमनसिंह में रहने वाले हिंदुओं में खौफ का आलम है. यहां के हिन्दू अल्पसंख्यकों ने बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी हिंदुओं को अपमान, ताने और धमकियों का सामना करना पड़ता है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, रंगपुर के 52 वर्षीय एक निवासी ने बताया, ‘हम अपने धर्म को लेकर लगातार अपमान सहते हैं, लेकिन विरोध करने की हिम्मत नहीं है. सड़क पर चलते हुए मिलने वाले ताने कभी भी भीड़ की हिंसा में बदल सकते हैं. हम डर के मारे चुप रहते हैं, क्योंकि कहीं हमारे साथ भी दीपू या अमृत जैसा न हो जाए.’ उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आने वाले चुनावों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आती है तो हालात और खराब हो सकते हैं, क्योंकि इस पार्टी को अल्पसंख्यकों के प्रति सख्त रवैया रखने वाला माना जाता है.
तारिक रहमान की वापसी से खौफ में क्यों हैं हिन्दू?
ढाका में रहने वाले एक अन्य हिंदू ने बताया कि दीपू दास की लिंचिंग ने हमें झकझोर दिया है. ऊपर से BNP नेता तारिक रहमान की बांग्लादेश में वापसी की खबरें डर बढ़ा रही हैं. अगर BNP सत्ता में आई तो हमारे लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी. शेख हसीना की अवामी लीग ही अब तक हमारे लिए ढाल बनी हुई थी. इन घटनाओं का असर भारत में बसे उन शरणार्थी इलाकों में भी महसूस किया जा रहा है, जहां पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए हिंदू परिवार दशकों पहले आकर बसे थे. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और चंद्रपुर एवं छत्तीसगढ़ के पाखांजूर जैसे इलाकों में रहने वाले लोग भी बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए हैं. निखिल बंगला समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. सुभोध बिस्वास कहते हैं कि भारत ही एकमात्र देश है, जहां बांग्लादेश के हिंदू संकट के समय उम्मीद कर सकते हैं. लेकिन सीमाएं बंद हैं. अगर हालात ऐसे ही रहे तो और हिंदुओं की जान जाएगी. हम सीमा पर प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं. सनातन जागरण मंच से जुड़े एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बांग्लादेश में करीब 2.5 करोड़ हिंदू रहते हैं. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. भारत में हिंदू संगठन सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं, ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे. हमें एक बड़े संकट का डर सता रहा है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें