Vastu effects on travel दिशा शूल यात्रा नियम

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Disha Shool Rules: हम सबa कभी न कभी ऐसा अनुभव करते हैं कि घर से अच्छे मन से निकले थे, प्लान परफेक्ट था, सब व्यवस्था पूरी थी, फिर भी रास्ते में अचानक रुकावट, देरी, गाड़ी खराब होना, प्लान बिगड़ना, मीटिंग मिस होना या बेवजह तनाव सामने आ जाता है. कई लोगों को लगता है कि ये बस संयोग है, लेकिन वास्तु शास्त्र और ज्योतिष कहते हैं कि कई बार इसकी वजह दिशा और दिन का मेल न होना भी हो सकता है. हर दिशा का अपना अलग प्रभाव होता है और सप्ताह के अलग-अलग दिनों में ये प्रभाव बदल जाते हैं. इसी नियम को दिशा शूल कहा गया है. दिशा शूल का मतलब हुआ वो दिशा जिस दिन बाधा, रुकावट या परेशानी का कारण बन सकती है. मान्यता है कि अगर किसी दिन कोई दिशा अशुभ हो और उसी दिशा में यात्रा कर ली जाए तो रास्ते में दिक्कतें बढ़ सकती हैं. किसी जरूरी काम में रुकावट, मानसिक तनाव, समय की बर्बादी, पैसे का नुकसान या मनचाहे परिणाम न मिलना जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं. इसलिए पुराने समय में लोग सिर्फ तिथि, वार और मुहूर्त देखकर ही नहीं बल्कि दिशा का भी ध्यान रखकर यात्रा शुरू करते थे. आज भले ही हम टेक्नोलॉजी, नेविगेशन और तेज रफ्तार वाले समय में जी रहे हैं, लेकिन कई लोग अभी भी इस नियम का पालन करके फर्क महसूस करते हैं. वास्तु में यह माना जाता है कि सही दिशा में कदम बढ़ाने से ऊर्जा बढ़ती है और गलत दिशा में कदम रखने से रास्ते बिगड़ते हैं. खासकर लंबी दूरी की यात्रा, नौकरी का इंटरव्यू, बिजनेस मीटिंग, शादी से जुड़ी बातें, कोर्ट-कचहरी, स्वास्थ्य जांच या संपत्ति के काम में दिशा शूल को ध्यान में रखना फायदेमंद माना जाता है. हालांकि ये कोई डराने वाली या सजा देने वाली बात नहीं है, बल्कि सिर्फ एक गाइडेंस है ताकि आप पहले से तैयार रहें और परेशानी से बच सकें. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.

दिशा शूल क्या है?
दिशा शूल एक ऐसा योग है जिसमें सप्ताह के हर दिन एक विशेष दिशा में बाधा मानी जाती है. उस दिशा में यात्रा या बड़ा फैसला लेना थोड़ा जोखिमभरा माना जाता है. मान्यता है कि जिस दिशा में उस दिन शूल बन रहा हो, वहां जाने से काम में रुकावटें, देरी या मनमुताबिक परिणाम नहीं मिलते. इसलिए कहा जाता है कि किसी खास काम या सफर से पहले दिशा शूल देखकर ही कदम बढ़ाना चाहिए. अगर दिशा वही हो जहां शूल बन रहा है तो कोशिश करें कि यात्रा टाल दें या कोई छोटा-सा उपाय करके निकलें ताकि असर हल्का हो जाए.

सप्ताह के 7 दिन और अशुभ दिशाएं

दिन-                    अशुभ दिशा-                         क्या असर माना जाता है-                            उपाय (अगर जाना जरूरी हो)-

सोमवार-              पूर्व दिशा                               काम में रुकावट,                                       तनाव दही खाकर निकलें
मंगलवार-             उत्तर दिशा,                           उत्तर-पश्चिम मानसिक असंतुलन, देरी            गुड़ खाएं
बुधवार-                उत्तर दिशा, उत्तर-पूर्व             निर्णय में गलती, असहजता                          तिल और धनिया चबाकर जाएं
गुरुवार-               दक्षिण दिशा                          धन से जुड़ी दिक्कत, नुकसान                       दही-चीनी खाएं
शुक्रवार-             पश्चिम दिशा (अधिकतर शुभ)    हल्का प्रभाव, विवाद                                    जौ खाकर निकलें
शनिवार-             दिशा, उत्तर-पूर्व                      बाधाएं, अचानक दिक्कतें                             तेल का दान करके निकलें
रविवार-              पश्चिम दिशा (सामान्यतः ठीक)   थकान, बेवजह खर्च                                     दलिया खाएं

इन गलतियों से बचें
-सिर्फ दिशा देखकर मन में डर न पालें, ये बस गाइडलाइन है.
-अगर आपकी नौकरी, बिजनेस या जरूरी काम रोज इन्हीं दिशाओं में होते हैं तो उपाय करके ही निकलें.
-घर से निकलते समय नाराजगी, जल्दबाजी या उलझन में न रहें. मानसिक स्थिति भी दिशा के प्रभाव पर असर डालती है.
-अगर दिशा शूल बन भी रहा है, लेकिन काम जीवन बदलने वाला है, तो इसे रोकना जरूरी नहीं. बस सकारात्मक मन और उपाय के साथ आगे बढ़ें.

क्या दिशा शूल हर किसी पर प्रभाव डालता है?
हर किसी पर इसका एक जैसा प्रभाव नहीं होता, लेकिन जिन लोगों का काम लगातार यात्रा, मीटिंग या बाहर जाने से जुड़ा होता है, वे अकसर फर्क महसूस कर सकते हैं. जिनकी कुंडली में ग्रह कमजोर हों या लगातार रुकावटें बनी रहती हों, उनके लिए ये नियम मददगार साबित हो सकता है. ये किसी भय का विषय नहीं बल्कि चेतावनी जैसा है, ताकि आप सावधान रहें और अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं.

दिशा शूल कोई अटल नियम नहीं, लेकिन अनुभव और मान्यता बताते हैं कि दिशा का असर हमारे दिन पर होता है. इसलिए इसे नजरअंदाज करने की बजाय ध्यान में रखना बेहतर है. आखिरकार, अगर थोड़ा-सा ध्यान रास्ते को आसान बना सकता है, तो क्यों न इसे आजमाया जाए?

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