स्वाद ऐसा जो याद दिलाए दिल्ली-अमृतसर, खंडवा का ये छोले-कुलचे वाला बना फेमस
Choupal Restaurant Special Chole Kulcha: खंडवा में अगर आपसे कोई पूछे कि यहां खाने में क्या खास है, तो ज़्यादातर लोग समोसे, कचौरी या पोहे का नाम लेंगे। लेकिन अब खंडवा की खाने की लिस्ट में एक नया नाम तेजी से जुड़ गया है—अमृतसरी स्टाइल छोले-कुलचे। वो भी ऐसा स्वाद, जो सीधे दिल्ली और अमृतसर की याद दिला दे. शहर के रामेश्वर मंदिर के सामने स्थित चौपाल रेस्टोरेंट इन दिनों लोगों की जुबान पर छाया हुआ है। यहां मिलने वाले छोले-कुलचे का स्वाद कुछ ऐसा है कि सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती है, जो एक बार खा लेता है, वह दोबारा आए बिना नहीं रह पाता. यहां खास बात यह है कि कुलचे तवे पर नहीं, बल्कि तंदूर में तैयार किए जाते हैं. तंदूर की आंच में सिके हुए कुलचे जब बाहर निकलते हैं, तो उनकी खुशबू ही भूख बढ़ा देती है. ऊपर से देसी बटर की परत और अंदर आलू की मसालेदार स्टफिंग- यही वजह है कि यह स्वाद बाकी जगहों से अलग लगता है.
चौपाल रेस्टोरेंट के मालिक गौरव सिंह बिसेन बताते हैं कि उनका मकसद शुरू से ही कुछ अलग करने का था. गौरव कहते हैं, “खंडवा में खाने के शौकीन लोगों की कोई कमी नहीं है. लोग दिल्ली और पंजाब का असली स्वाद यहां भी चाहते थे. इसी सोच के साथ हमने अमृतसरी स्टाइल छोले-कुलचे की शुरुआत की.
गौरव बिसेन बताते हैं कि यह रेस्टोरेंट उन्होंने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर शुरू किया है. तीनों की एक ही सोच थी- खाने में क्वालिटी और असली स्वाद. इसी वजह से उन्होंने अमृतसर से अनुभवी शेफ बुलाए हैं, जो सालों से वहां कुलचे और छोले बना रहे हैं. यही कारण है कि यहां का टेस्ट बिल्कुल ऑथेंटिक लगता है. यहां मिलने वाले कुलचे आम कुलचों से काफी बड़े होते हैं, लगभग रोटी के साइज के. एक प्लेट में भरपूर छोले और दो बड़े कुलचे दिए जाते हैं, जो पेट भी भर देते हैं और मन भी खुश कर देते हैं. छोले न ज्यादा तीखे, न फीके- एकदम संतुलित स्वाद, जो हर उम्र के लोगों को पसंद आता है.
युवाओं से लेकर परिवारों की बना पसंद
गौरव आगे बताते हैं कि बाजार में कई जगह छोले-कुलचे मिल जाते हैं, लेकिन असली देसी स्वाद कहीं-कहीं ही मिलता है. हम रोज ताजे कुलचे तैयार करते हैं. आटा, स्टफिंग और छोले- सब कुछ यहीं बनाया जाता है. किसी तरह का शॉर्टकट नहीं अपनाया जाता है. दिल्ली में अक्सर छोले-कुलचे तवे पर बनाए जाते हैं, लेकिन यहां तंदूर में बनने की वजह से स्वाद दोगुना हो जाता है. तंदूर की गर्मी कुलचे को बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम बना देती है. ऊपर से जब बटर पिघलता है, तो हर बाइट में उसका स्वाद महसूस होता है. यहां आने वाले लोग भी इस स्वाद की जमकर तारीफ करते हैं. कई ग्राहकों का कहना है कि उन्हें ऐसा स्वाद पहले सिर्फ दिल्ली या अमृतसर में ही मिला था. अब वही जायका खंडवा में मिल रहा है, वो भी अपने शहर के माहौल में. चौपाल रेस्टोरेंट धीरे-धीरे युवाओं से लेकर परिवारों की पसंद बनता जा रहा है. शाम के समय यहां खासा रौनक रहती है. लोग दोस्तों के साथ बैठकर गरम-गरम छोले-कुलचे का मजा लेते नजर आते हैं.
गौरव का कहना है कि उनका सपना है कि खंडवा को भी फूड के मामले में एक अलग पहचान मिले. हम चाहते हैं कि जब कोई बाहर का व्यक्ति खंडवा आए, तो वह कहे कि यहां का छोले-कुलचे जरूर खाना. अगर आप भी कुछ नया, देसी और दमदार स्वाद ढूंढ रहे हैं, तो रामेश्वर मंदिर के सामने स्थित चौपाल रेस्टोरेंट जरूर जाएं. यकीन मानिए, यहां का छोले-कुलचे का स्वाद आपको दिल्ली और अमृतसर की गलियों की याद दिला देगा और शायद आप वही स्वाद दोबारा कहीं और न ढूंढ पाएं.