विदेश में नौकरी का सपना पड़ा भारी, म्यांमार में गुलामों की तरह जी रहे गुजरात के 100 युवा, बयां किया दर्द
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Gujarat News: गुजरात समेत भारत के 100 से अधिक युवा म्यांमार में जॉब स्कैम का शिकार होकर बंधक बने. वीडियो जारी कर वे भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं. फिलहाल म्यांमार के एक स्थानीय एनजीओ ने इन भारतीय युवाओं को आश्रय दिया है. लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. गुजरात सहित भारत के अन्य राज्यों और पड़ोसी देशों के कई युवक-युवतियां वहां फंसे हुए हैं.
गुजरात के युवाओं ने वीडियो के जरिए मदद की गुहार लगाई है. वडोदरा. विदेश में अच्छी नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना देखकर गए गुजरात और देश के अन्य हिस्सों के 100 से अधिक युवा म्यांमार में एक बड़े मुसीबत में फंस गए हैं. वडोदरा शहर और सांढासाल गांव के करीब 10 युवाओं समेत राज्यभर के कई लोग वहां एक बड़े ‘जॉब स्कैम’ का शिकार हुए हैं. इन युवाओं ने सोशल मीडिया पर अपना एक दर्दनाक वीडियो जारी किया है. वीडियो में वे भारत सरकार से अपनी सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं. बताया जा रहा है कि इन युवाओं को डाटा एंट्री की नौकरी का लालच दिया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें बंधक बना लिया गया. फिलहाल ये सभी युवा एक स्थानीय एनजीओ (NGO) की मदद से वहां दिन काट रहे हैं और वतन वापसी की राह देख रहे हैं.
पीड़ित युवाओं के मुताबिक, एजेंटों ने उन्हें म्यांमार में अच्छी सैलरी वाली ‘डाटा एंट्री’ की नौकरी का ऑफर दिया था. सुनहरे भविष्य की उम्मीद में ये युवा वहां चले गए. लेकिन वहां पहुंचते ही उनके सामने सच्चाई आई. उनके साथ धोखा हुआ था. उन्हें जिस काम के लिए बुलाया गया था, वह केवल एक छलावा था. असलियत में उन्हें वहां बंधक जैसी स्थिति में रखा गया है.
14 से 18 घंटे जबरन काम और प्रताड़ना: वीडियो में अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़ितों ने बताया कि म्यांमार में उनसे जानवरों जैसा सुलूक किया जा रहा है. उन्हें बंधक बनाकर जबरन 14 से 18 घंटे तक काम कराया जाता था. मना करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था. यह स्थिति न केवल अमानवीय है बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है.
इमिग्रेशन के बाद भी नहीं मिल रहा रास्ता: फंसे हुए युवाओं ने बताया कि पिछले 20 दिनों से उनकी इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद उन्हें वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है. उन्हें किसी भी तरह से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. वे एक तरह से वहां कैद होकर रह गए हैं. उनके पास खाने-पीने और रहने के भी उचित साधन नहीं बचे हैं.
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग: फिलहाल म्यांमार के एक स्थानीय एनजीओ ने इन भारतीय युवाओं को आश्रय दिया है. लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. गुजरात सहित भारत के अन्य राज्यों और पड़ोसी देशों के कई युवक-युवतियां वहां फंसे हुए हैं. उन्होंने वीडियो के जरिए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द उन्हें इस नर्क से निकालकर सुरक्षित उनके घर पहुंचाए.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें