‘बच्चों से दाह संस्कार करवा लेना’, पिता की मौत, मां घर छोड़कर चली गई, चंबा के दो मासूम भाई बहन पूछ रहे हमारा क्या कूसर?

Share to your loved once


चम्बा. हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक और दर्दनाक घटना सामने आई है. दयोला पंचायत के दलेला गांव में दो मासूम बच्चों की दुनिया एक साथ उजड़ गई. करीब 20 दिन पहले उनके पिता का साया सिर से उठ गया और उसी समय उनकी माँ उन्हें बेसहारा छोड़कर कहीं चली गई.एक तरफ पिता की मौत का ग़म, दूसरी तरफ जिंदा माँ की ममता का इंतज़ार.

दरअसल, चंबा के चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत दियोला के दलेला गांव का यह मामला है. यहां पर 9 और 5 साल के भाई औऱ बहन एक तरह से अनाथ हो हो गए हैं.  महिला की पहचान हितेश कुमारी पत्नी नेहरू लाल के रूप में हुई है. गांव के एक शख्स ने महिला के लापता होने की रिपोर्ट नकरोड़ पुलिस चौकी में दर्ज करवाई है.

उधर, इन मासूमों की आँखें हर दिन दरवाज़े की ओर टिकी रहीं, लेकिन माँ की ममता अब तक नहीं लौटी. सवाल यह नहीं कि माँ कहाँ गई, सवाल यह है कि कोई माँ अपने कलेजे के टुकड़ों को यूँ कैसे छोड़ सकती है?फिलहाल बच्चों के ताया ने उन्हें कुछ दिनों के लिए अपने घर में शरण दी है, लेकिन यह सहारा कब तक रहेगा—यह चिंता हर किसी के मन में है.

ताया ने एक समाजसेवी के साथ मिलकर जिला प्रशासन को पूरे मामले से अवगत कराया. प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल जिला बाल कल्याण समिति को मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए. बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंच चुका है.

पिता की रहती थी तबीयत खराब, मां मांग रही थी तलाक

बच्चों के ताया ने बताया कि मेरे भाई की तबीयत खराब हुई थी, उन्हें टांडा रेफर किया गया. घर में पहले से ही क्लेश था और बच्चों की मां तलाक मांग रही थी. भाई की मौत के बाद वह इन मासूमों को छोड़कर चली गई.उन्होंने बताया कि वह सुबह घर छोड़ कर चली गई थी और शाम को उसके भाई का देहांत हो गया. जब गांव वालों ने उस महिला से संपर्क किया तो उसने कहा कि मैं बहुत दूर चली गई हूं और बच्चों से उसका दाह संस्कार करवा लेना. इतनी सी बात कह कर मां ने फोन बंद कर दिया. अब सरकार से गुहार है कि बच्चों के भविष्य के लिए कुछ किया जाए.

अब सरकार से गुहार है कि बच्चों के भविष्य के लिए कुछ किया जाए.

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत सहायता मिलने की उम्मीद

मामले में साथ आए समाजसेवी ने बताया कि जैसे ही उन्हें गांव में इस त्रासदी की जानकारी मिली, वे तुरंत बच्चों से मिले और प्रशासन को सूचित किया. उपायुक्त ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला बाल कल्याण समिति को निर्देश दिए और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी रिपोर्ट भेजी गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि भजोत्रा पंचायत के अनाथ बच्चों की तरह इन दो मासूमों को भी मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत सहायता मिलेगी. बच्चे से जब माँ के बारे में पूछा गया, तो मासूम की बात ने हर किसी की आँखें नम कर दीं.

मासूम की बात ने हर किसी की आँखें नम कर दीं.

जब पूछा गया कि माँ की याद आती है?

भारी मन से बच्चे ने कहा कि माँ हमें छोड़कर चली गई है. जब पूछा गया कि माँ की याद आती है? तो बच्चे ने धीमी आवाज़ में कहा, नहीं. क्योंकि माँ ने कहा था कि अपने बाप को पानी भी मत पूछना. इन शब्दों में छिपा दर्द किसी भी पत्थरदिल को पिघला दे. जिंदा माँ के होते हुए भी अनाथ हो चुके ये बच्चे आज समाज और सिस्टम से सिर्फ एक सहारे की आस लगाए बैठे हैं. गौरतलब है कि हाल ही में चंबा से चार भाई बहनों की भी इसी तरह की कहानी सामने आई थी. ये बच्चे भी एक जर्जर घर में रह रहे थे. मा ने दूसरी शादी कर ली थी. हालांकि, इनकी मदद के लिए प्रदेशभर से लोग आगे आए थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP