सपनों में मरे हुए अपनों का दिखना क्या कोई इशारा है? यहां जानिए ख्वाबों की हकीकत

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Religious News: सपनों में अपने या मरे हुए रिश्तेदारों का दिखना लोगों के मन में कई सवाल पैदा करता है. इस्लाम की नजर में ऐसे ख्वाबों की अलग-अलग ताबीर बताई गई है. शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इफराहीम हुसैन के अनुसार अच्छे सपने खुशी और सुकून का संकेत होते हैं, जबकि डरावने सपनों पर अल्लाह से पनाह मांगने की हिदायत है. साथ ही मरहूम लोगों के लिए दुआ और कुरआन की तिलावत को बेहतर अमल बताया गया है, इस्लामी मान्यताओं के अनुसार जरूरी.

अलीगढ़: अक्सर लोग बताते हैं कि उन्हें सपनों में अपने करीबी रिश्तेदार या जान-पहचान के लोग दिखाई देते हैं, जो या तो उनसे दूर रहते हैं या फिर इस दुनिया से जा चुके होते हैं. ऐसे ख्वाबों को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं. इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन से खास बातचीत की.

सपनों की होती है अलग-अलग हकीकत
जानकारी देते हुए शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश, मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि अक्सर लोगों को सपनों में अपने करीबी रिश्तेदार या परिचित नज़र आते हैं. ये लोग या तो दूर रहते होते हैं या फिर दुनिया से रुख़सत हो चुके होते हैं. इस्लाम की नज़र में ऐसे सपनों की अलग-अलग हकीकत होती है.

कोई अपना दिखाई दे तो इस बात की ओर करता है इशारा
मौलाना साहब के मुताबिक, अगर सपने में कोई अपना दिखाई दे और वह खुशी, सुकून या कामयाबी की ओर इशारा करता हो, तो ऐसे ख्वाब को अच्छा माना जाता है. ऐसे सपनों से दिल को सुकून मिलता है और इंसान को सकारात्मक एहसास होता है. वहीं अगर कोई सपना डरावना हो, जिससे घबराहट पैदा हो या नुकसान की ओर संकेत करता हो, तो ऐसे ख्वाब को बुरा माना जाता है.

बुरे सपनों की दी गई है हिदायत
मौलाना ने बताया कि बुरे सपनों के लिए इस्लाम में यह हिदायत दी गई है कि इंसान नींद से उठकर बाईं ओर हल्का सा थूके, अल्लाह से पनाह मांगे और हर तरह के नुकसान से हिफाज़त की दुआ करे. साथ ही कामयाबी और भलाई के लिए दुआ करना बेहतर बताया गया है.

सपनों से नहीं होती डरने की जरूरत
मौलाना इफराहीम हुसैन ने यह भी कहा कि कई बार मर चुके अपने भी सपनों में दिखाई देते हैं. वे कभी अच्छी हालत में होते हैं और कभी खराब हालत में नज़र आते हैं. ऐसे सपनों से डरने की जरूरत नहीं होती. बल्कि उनके लिए ज़िक्र करना, मग़फिरत की दुआ करना और कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर सवाब पहुंचाना एक बेहतर अमल माना गया है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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