Pentagon Report on india china Relations: धोखा खा गया अमेरिका? पेंटागन की रिपोर्ट में भारत-चीन रिश्तों पर भारी कन्फ्यूजन

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अमेरिका ने चीन पर अपनी नई रिपोर्ट (2025) जारी की है, जिसमें भारत को लेकर किए गए दावे बेहद अजीबोगरीब हैं. रिपोर्ट कहती है कि चीन भारत के साथ ‘दोस्ती’ और स्थिरता चाहता है, लेकिन साथ ही यह भी मानती है कि उसने अरुणाचल प्रदेश को अपने ‘कोर इंटरेस्ट’ में शामिल कर लिया है. क्यों एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि महाशक्ति अमेरिका, चीन के इस डबल गेम को समझने में बुरी तरह फेल हो रहा है.

धोखा खा गया अमेरिका? पेंटागन की रिपोर्ट में भारत-चीन रिश्तों पर भारी कन्फ्यूजनपीएम नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (रॉयटर्स)

नई दिल्ली/वॉशिंगटन. क्या दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका, अपने सबसे बड़े दुश्मन चीन की चाल को समझने में चूक रही है? या फिर चीन का दोहरा चरित्र इतना शातिर है कि पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग के एक्सपर्ट्स भी चकमा खा गए? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका ने चीन की मिलिट्री पावर पर अपनी ताजा रिपोर्ट (2025) जारी की है. इस रिपोर्ट में भारत और चीन के रिश्तों पर जो बातें कही गई हैं, वो एक-दूसरे की विरोधी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह रिपोर्ट कन्फ्यूजन का पुलिंदा है. एक तरफ अमेरिका कहता है कि चीन, भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है. वहीं दूसरी तरफ चेतावनी देता है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने ‘कोर इंटरेस्ट’ मान लिया है. अब सवाल यह है कि चीन दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है या जमीन हड़पने की तैयारी कर रहा है? दोनों बातें एक साथ सच कैसे हो सकती हैं?

पेंटागन की रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली बात चीन की नीयत को लेकर है. रिपोर्ट कहती है कि चीन भारत के साथ सरहद पर शांति चाहता है और रिश्तों को ‘स्थिर’ करना चाहता है. उसी रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने ‘कोर इंटरेस्ट’ में डाल दिया है. ‘कोर इंटरेस्ट’ का मतलब है वो मुद्दा, जिस पर कोई देश रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो युद्ध भी लड़ लेगा, जैसे चीन ताइवान और तिब्बत को मानता है.
कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने अमेरिका के इस आकलन को गलत बताया है. उनका कहना है, अगर चीन वाकई अरुणाचल को इतना अहम मानता, तो शांति की बात क्यों करता? और अगर शांति चाहता, तो लद्दाख में जमे हजारों सैनिकों को पीछे क्यों नहीं हटाता? असलियत यह है कि चीनी सेना अभी भी भारतीय जमीन पर नजर गड़ाए बैठी है, जो किसी भी तरह से दोस्ती का सबूत नहीं है.

अरुणाचल चीन की जिद है या सिर्फ डराने का पैंतरा?

ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि अमेरिका चीन की चाल को समझ नहीं पाया. हकीकत ये है क‍ि चीन ने तिब्बत को हमेशा अपना माना है, लेकिन अरुणाचल पर उसका दावा सिर्फ भारत पर दबाव बनाने का एक तरीका है. इसकी वजह बेहद साफ है. अरुणाचल प्रदेश ताइवान से तीन गुना बड़ा है और वहां भारतीय सेना का मजबूत पहरा है. चीन भी जानता है कि इसे कब्जाना नामुमकिन है. इसलिए वह सिर्फ शोर मचाता है ताकि भारत ड‍िफेंस‍िव रहे और तिब्बत के मुद्दे पर चुप रहे. इसे बारगेनिंग चिप यानी सौदा करने का जरिया कहते हैं, जिसे अमेरिका शायद चीन की असली मंशा समझ बैठा है.

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