डायबिटीज, मोटापा और कमजोरी… एक देसी खीर में छुपा है इलाज! डॉक्टर भी कर रहे हैं तारीफ – Madhya Pradesh News

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एक वक्त था जब कोदो-कुटकी का नाम सुनते ही लोग मुंह फेर लेते थे. इसे आदिवासी इलाकों और गरीबों का भोजन माना जाता था. लेकिन समय बदला और सोच भी. अब मध्य प्रदेश का यह देसी सुपरफूड अमीरों की थाली में भी खास जगह बना चुका है. खासतौर पर विंध्य क्षेत्र में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है. रीवा से लेकर पूरे विंध्य अंचल तक, गांव हो या शहर, हर जगह लोग अब कोदो-कुटकी को पसंद करने लगे हैं.

सेहत का खजाना है कोदो-कुटकी
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन Dr. Deepak Kulshreshtha बताते हैं कि कोदो और कुटकी मोटे अनाज जरूर हैं, लेकिन इनके फायदे बेहद बड़े हैं. इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम पाया जाता है. यही वजह है कि ये अनाज डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अल्सर जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. इन्हें खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती.

श्री अन्न से बन रहे हैं नए-नए प्रोडक्ट
आज कोदो-कुटकी से सिर्फ दाल या भात ही नहीं, बल्कि पास्ता, बिस्किट, कुकीज और टोस्ट जैसे कई प्रोडक्ट भी बनाए जा रहे हैं. डॉक्टर बताते हैं कि जिस तरह आमतौर पर लोग सुबह पोहा खाते हैं, उसी तरह कोदो-कुटकी का दलिया भी खाया जा सकता है. यह हड्डियों को मजबूत करता है और पचने में भी हल्का होता है. गर्भवती महिलाओं के लिए तो कुटकी की दूध वाली खीर बेहद फायदेमंद मानी जाती है.

कुटकी की खीर, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल
कुटकी की खीर भारतीय मिठाइयों में खीर का एक खास और हेल्दी रूप है. यह ग्लूटेन-फ्री होती है, इसलिए जिन लोगों को पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, उनके लिए भी यह बेहतरीन विकल्प है. कुटकी से उपमा, डोसा, इडली और पोंगल जैसे व्यंजन तो बनते ही हैं, लेकिन इसकी खीर और पायसम का स्वाद भी कमाल का होता है.

खीर बनाते समय रखें ये जरूरी बातें
बेहतरीन खीर के लिए हमेशा छिलका उतरी हुई ताजी कुटकी ही लें, क्योंकि इसके छोटे दानों का छिलका उतारना काफी मुश्किल होता है. ध्यान रखें कि कुटकी पकने पर फूल जाती है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें. चूंकि इसे सीधे दूध में पकाया जाता है, इसलिए खीर काफी मलाईदार बनती है.

दूध, गुड़ और नारियल से बढ़ाएं स्वाद
अगर आप अलग स्वाद चाहते हैं या लैक्टोज से एलर्जी है, तो सामान्य दूध की जगह नारियल के दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं. चीनी की जगह गुड़ डालकर खीर को और भी हेल्दी बनाया जा सकता है. बस गुड़ को पहले पानी में उबालकर छान लें और कुटकी पकने के बाद ही दूध में मिलाएं.

परोसने का देसी अंदाज
कुटकी की खीर गर्म या ठंडी, दोनों तरह से खाई जा सकती है. बस ध्यान रखें कि ठंडी होने पर यह थोड़ी गाढ़ी हो जाती है. ऊपर से तले हुए काजू, किशमिश, नारियल के टुकड़े डालें और स्वाद को दोगुना करने के लिए एक चम्मच शुद्ध देसी घी जरूर डालें. यकीन मानिए, ये देसी खीर एक बार खाई तो बार-बार बनाने का मन करेगा.

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