50 लाख की घूस और 800 चीनी मेहमान; कार्ति चिदंबरम पर 14 साल बाद कोर्ट का एक्‍शन, आरोप तय

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चीनी वीजा घोटाले में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की मुश्किलें अब कानूनी तौर पर और गहरा गई हैं. दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कार्ति चिदंबरम और छह अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया. अदालत ने साफ कहा कि सीबीआई द्वारा पेश की गई सामग्री प्रथम दृष्टया कार्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त और गंभीर संदेह पैदा करती है.

50 लाख की घूस और 800 चीनी मेहमान; कार्ति चिदंबरम पर कोर्ट का एक्‍शन, आरोप तयकोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया.

राजधानी की विशेष अदालत ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की कानूनी राहत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. करीब 14 साल पुराने चीनी वीजा रिश्वत मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने आदेश दिया कि कार्ति और उनके सहयोगियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए जाएं. यह मामला उस दौर का है जब कार्ति के पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री की कुर्सी संभाल रहे थे. सीबीआई का आरोप है कि कार्ति ने अपने पिता के पद का फायदा उठाते हुए एक निजी बिजली कंपनी के लिए नियमों के खिलाफ जाकर सैकड़ों चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाए. अदालत ने 98 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि वर्तमान चरण में जांच एजेंसी के पास आरोपी को कटघरे में खड़ा करने के लिए “प्रबल संदेह” मौजूद है.

क्या है पूरा मामला?
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, यह मामला साल 2011 का है. पंजाब में ‘तलवंडी साबो पावर लिमिटेड’ (TSPL) नाम की एक कंपनी 1980 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगा रही थी. इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य एक चीनी कंपनी ‘शेडोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्प’ (SEPCO) कर रही थी. प्रोजेक्ट में देरी हो रही थी और चीनी इंजीनियरों की भारी कमी थी. नियमों के तहत गृह मंत्रालय से अतिरिक्त वीजा मिलना मुश्किल था. आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए कंपनी ने कार्ति चिदंबरम के करीबी सहयोगी एस. भास्कररमन से संपर्क किया और 50 लाख रुपये की रिश्वत के बदले 800 अतिरिक्त ‘प्रोजेक्ट वीजा’ की सुविधा प्राप्त की.

अदालत की तल्ख टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कार्ति के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है. अदालत ने सरकारी गवाह के बयानों को आधार मानते हुए कहा कि गवाह खुद कार्ति के चेन्नई स्थित कार्यालय गया था. वहां कार्ति ने उसे भास्कररमन से बात करने का निर्देश दिया. सीबीआई ने कॉल रिकॉर्ड और ईमेल का हवाला देते हुए बताया कि रिश्वत का भुगतान होने के बाद कार्ति ने फोन पर इसकी पुष्टि भी की थी. अदालत ने कहा कि साजिशकर्ताओं का हर मोड़ पर एक साथ होना जरूरी नहीं बल्कि एक सामान्य उद्देश्य के लिए काम करना ही साजिश (IPC 120-B) की पुष्टि करता है.

कानूनी कार्रवाई और आगे का रास्ता
अदालत ने कार्ति चिदंबरम, एस. भास्कररमन, टीएसपीएल और मुंबई स्थित ‘बेल टूल्स’ सहित अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8, 9 और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत आरोप तय करने को कहा है. भास्कररमन पर सबूत मिटाने (धारा 204) का भी आरोप लगेगा. हालांकि, अदालत ने आठवें आरोपी चेतन श्रीवास्तव को राहत देते हुए उन्हें आरोपमुक्त कर दिया है. अब इस मामले में नियमित ट्रायल शुरू होगा, जो कार्ति चिदंबरम के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.

About the Author

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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