BJP Tamil Nadu Mission | Vijay Party NDA : विजय पर डोरे, AIADMK से मोलभाव, तमिलनाडु में बीजेपी का सबसे बड़ा दांव
दक्षिण भारत का दुर्ग कहे जाने वाले तमिलनाडु में बीजेपी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है. लोकसभा चुनावों में अपनी पैठ बढ़ाने के बाद अब विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए ने अपनी रणनीति का गियर पूरी तरह बदल दिया है. खबर है कि तमिलनाडु की राजनीति में गेम चेंजर साबित होने के लिए बीजेपी एक ऐसा दांव चलने जा रही है, जो अगर सटीक बैठा तो सत्ताधारी डीएमके के पैरों तले जमीन खिसक सकती है. सूत्रों के मुताबिक, एनडीए की निगाहें अब तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और हाल ही में राजनीति में कदम रखने वाले थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी विजय को एनडीए में शामिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. अगर यह गठबंधन होता है, तो तमिलनाडु की राजनीति का पूरा गणित ही बदल जाएगा.
बीजेपी अध्यक्ष का इंदिरा गांधी वाला जवाब
विजय आए तो कैसे फायदा?
- विजय की सबसे बड़ी ताकत उनके युवा फॉलोवर्स हैं. तमिलनाडु में फर्स्ट टाइम वोटर्स की एक बड़ी तादाद है जो पारंपरिक पार्टियों से हटकर कुछ नया देखना चाहती है.
- डीएमके सरकार के खिलाफ जो भी एंटी इनकमबेंसी है, उसे विजय के करिश्मे और बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे के साथ मिलाकर एक बड़ी जीत में बदला जा सकता है.
- बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने साफ किया कि विजय को सिर्फ वोट काटने वाला कहना गलत होगा. विजय किसके वोट काटेंगे और किसको फायदा पहुंचाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जनता डीएमके सरकार से कितनी नाराज है.
बीजेपी का ‘मिशन 60’
विजय को साथ लाने की कोशिशों के बीच, बीजेपी अपने पुराने सहयोगी एआईएडीएमके के साथ भी सीटों के बंटवारे को लेकर सख्त मोलभाव कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच सीटों को लेकर रस्साकशी चल रही है. पूर्व सीएम पलानीस्वामी चाहते हैं कि उनकी पार्टी 170 सीटों पर चुनाव लड़े. वे बीजेपी को 23 सीटें देने को तैयार हैं. पिछले चुनाव में 20 सीटें दी थीं. लेकिन बीजेपी इस बार 60 सीटों की मांग कर रही है. पार्टी का कहना है कि वह किसी भी हाल में 40 से कम सीटों पर नहीं लड़ेगी.
बीजेपी को 60 सीटें क्यों चाहिए?
इसके पीछे बीजेपी की एक बड़ी रणनीति है. दरअसल, बीजेपी सिर्फ अपने लिए सीटें नहीं मांग रही, बल्कि वह ओ. पन्नीरसेल्वम और टीटीवी दिनाकरन जैसे नेताओं को भी एडजस्ट करना चाहती है. खबर है कि बीजेपी 60 सीटें मांगकर उनमें से करीब 20 सीटें ओपीएस और दिनाकरन गुट को देना चाहती है. बीजेपी का मकसद है कि एआईएडीएमके के सभी धड़ों को एक साथ लाकर एंटी-डीएमके वोटों का बंटवारा रोका जाए. हालांकि, ईपीएस गुट इन दोनों नेताओं की वापसी के खिलाफ रहा है, लेकिन बीजेपी ब्रिज का काम कर रही है.
पीयूष गोयल का दौरा और बंद कमरे की बैठकें
- एआईएडीएमके सबसे बड़े भाई की भूमिका में हो सकती है. उसे 150-160 सीटें मिल सकती हैं.
- बीजेपी को 40-50 सीटें मिल सकती हैं. इसमें ओपीएस और दिनाकरन गुट शामिल हो सकते हैं.
- रामदास की पार्टी पीएमके को 23 सीटें मिल सकती हैं.
- विजयकांत की पार्टी को 6 सीटें देने का प्रस्ताव है, लेकिन वे ज्यादा की मांग कर रहे हैं.
- अगर सहमति बनी तो टीटीवी दिनाकरन की पार्टी को 6 सीटें मिल सकती हैं.
विजय आए तो क्या बदलेगा?
अगर विजय की पार्टी भी इस गठबंधन का हिस्सा बनती है, तो सीटों के इस गणित में बड़ा फेरबदल करना होगा. अन्नाद्रमुक और बीजेपी को अपनी कुछ सीटें विजय के लिए छोड़नी होंगी. बीजेपी के लिए विजय का साथ आना दोहरी जीत होगी. विजय की पार्टी के आने से यह नैरेटिव खत्म होगा कि बीजेपी सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी है. विजय, एआईएडीएमके और बीजेपी का वोट शेयर डीएमके गठबंधन को पछाड़ने के लिए काफी हो सकता है.
थाई महीने का इंतजार
तमिलनाडु में एक कहावत है- थाई पिरंदाल वड़ी पिरक्कम यानी जब थाई महीना यानी जनवरी आता है, तो नए रास्ते खुलते हैं. न्यूज18 तमिल के मुताबिक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी इसी कहावत का जिक्र किया. उन्होंने कहा, अभी चुनाव में तीन महीने बाकी हैं…जनवरी, फरवरी, मार्च. देखिए आगे क्या होता है. थाई महीने में रास्ता निकलेगा.