अमीर बाप की बेटी से प्यार, फिर पटरी पर मिली लाश, प्रेमी के मर्डर मिस्ट्री का वो सच जो 18 साल बाद भी है अधूरा!

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मोहब्बत जब रसूख और पैसे की दीवारों से टकराती है तो अंजाम कभी-कभी लहूलुहान भी हो जाता है. साल 2007 की वह घटना, जिससे पूरा देश चौंक गया था. आज भी न केवल पश्चिम बंगाल के कोलकाता की हवाओं में बल्कि कई शहरों के रसूखदार परिवारों के बेटियों से इश्क करने वालों प्रेमियों के लिए एक अनसुलझा सवाल बना हुआ है. यह कहानी है एक साधारण से ग्राफिक डिजाइनर रिजवानुर रहमान और लग्जरी लाइफ जीने वाली प्रियंका टोडी की. प्रियंका, जो कोलकाता के बड़े होजरी टाइकून अशोक टोडी की बेटी थी. उनके प्यार का सफर जितना रोमांचक था, उसका अंत उतना ही खौफनाक और रहस्यमयी रहा. आज 18 साल बाद भी यह मामला आत्महत्या और हत्या की थ्योरी के बीच झूल रहा है.

इश्क, निकाह और रसूख का टकराव रिजवानुर और प्रियंका की मुलाकात एक कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर में हुई थी. रिजवानुर एक मध्यमवर्गीय परिवार से था, जबकि प्रियंका अरबों के साम्राज्य की वारिस. दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा और अगस्त 2007 में उन्होंने गुपचुप तरीके से ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी कर ली. जब प्रियंका के पिता अशोक टोडी को इसकी भनक लगी तो जैसे कोलकाता के सत्ता गलियारों में तूफान आ गया. टोडी परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था. उन्होंने रिजवानुर को धमकाना शुरू किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पुलिसिया तंत्र का इस्तेमाल किया गया.

देश का चर्चित लव स्टोरी

कोलकाता पुलिस का ‘विलेन’ अवतार और मानसिक प्रताड़ना इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. कहानी में नया मोड़ तब आया जब कोलकाता पुलिस के आला अधिकारी इस निजी मामले में कूद पड़े. आरोप है कि तत्कालीन पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों ने रिजवानुर को लालबाजार पुलिस मुख्यालय बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. उसे धमकी दी गई कि अगर उसने प्रियंका को नहीं छोड़ा तो उसे झूठे केस में फंसा दिया जाएगा. दबाव इतना बढ़ा कि प्रियंका को कुछ समय के लिए अपने मायके जाना पड़ा. रिजवानुर को वादा किया गया था कि वह वापस आएगी, लेकिन वह कभी नहीं लौटी.

21 सितंबर 2007 की वह काली रात

कोलकाता के पटिपुकुर रेलवे ट्रैक का खौफनाक मंजर 21 सितंबर की सुबह कोलकाता के पटिपुकुर रेलवे ट्रैक पर एक युवक की क्षत-विक्षत लाश मिली. वह कोई और नहीं, बल्कि रिजवानुर रहमान था. उसकी मौत की खबर फैलते ही कोलकाता की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा. लोग इसे ‘अमीर बनाम गरीब’ की जंग मानने लगे. आरोप लगा कि अशोक टोडी ने पुलिस के साथ मिलकर रिजवानुर का कत्ल करवाया और उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए पटरी पर फिंकवा दिया.

हत्या या आत्महत्या?

लेफ्ट की सरकार ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी. उस समय विपक्षी नेता ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को काफी हाईलाइट किया. ममता के दबाव के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इसे ‘हत्या’ नहीं, बल्कि ‘आत्महत्या के लिए उकसाना’ माना. सीबीआई का तर्क था कि पुलिस और ससुराल वालों के मानसिक दबाव के कारण रिजवानुर ने अपनी जान दे दी. अशोक टोडी और कुछ पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाया गया, लेकिन ‘हत्या’ का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला.

18 साल का इंतजार और अनसुलझे सवाल

आज 18 साल बीत चुके हैं, लेकिन रिजवानुर की मां और भाई आज भी कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं. उनका मानना है कि रिजवानुर जैसा बहादुर लड़का, जो अपनी पत्नी के लिए पूरी व्यवस्था से लड़ गया, वह आत्महत्या नहीं कर सकता. 2025 में भी यह केस कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बीच आदेशों का दौर चलता रहा, कुछ अधिकारी रिटायर हो गए.

वहीं प्रेमिका प्रियंका टोडी ने अपनी अलग जिंदगी बसा ली, लेकिन इंसाफ की फाइल पर धूल जमी हुई है. रिजवानुर रहमान की मौत आज भी भारतीय न्याय प्रणाली के सामने एक बड़ा सवालिया निशान है. क्या एक आम आदमी का प्यार रसूखदारों के सामने हमेशा हार जाएगा? यह मर्डर मिस्ट्री 2026 में भी पुलिस और सीबीआई का पीछा करती रहेगी, क्योंकि जब तक ‘हत्या या आत्महत्या’ का अंतिम सच सामने नहीं आता, रिजवानुर की आत्मा और उसका परिवार शांत नहीं होगा.

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